खबर सामने आते ही ग्रेटर नोएडा और खासकर जेवर-बेल्ट में उत्साह की लहर दौड़ गई। गोविंदगढ़ गांव में ढोल-नगाड़ों के बीच लोग नाचते नजर आए, वहीं प्रवीण के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र के गोविंदगढ़ गांव से उठी एक बड़ी खबर ने पूरे इलाके की धड़कनें तेज कर दी हैं। देश-दुनिया में तिरंगा लहराने वाले पैरा एथलीट प्रवीण कुमार को खेलों में असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार 2026 देने की घोषणा हुई है। खबर सामने आते ही ग्रेटर नोएडा और खासकर जेवर-बेल्ट में उत्साह की लहर दौड़ गई। गोविंदगढ़ गांव में ढोल-नगाड़ों के बीच लोग नाचते नजर आए, वहीं प्रवीण के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
कम उम्र में ही प्रवीण कुमार ने पैरा एथलेटिक्स में ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं, जिनका डंका सिर्फ भारत में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी बजा है। पेरिस पैरा ओलंपिक 2024 में हाई जंप में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का सिर गर्व से ऊंचा किया। इससे पहले 2022 के एशियन पैरा गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। गांव वालों का कहना है कि प्रवीण ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण इलाकों में संसाधनों की कमी और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत इरादों से दुनिया जीती जा सकती है। ग्रेटर नोएडा के युवाओं के लिए प्रवीण अब सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि संघर्ष और जीत की मिसाल बन चुके हैं।
प्रवीण कुमार की लगातार चमकती उपलब्धियों ने उन्हें सिर्फ मैदान का स्टार नहीं, राज्य का गौरव बना दिया है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधी भर्ती योजना के तहत उन्हें डीसीपी पद पर नियुक्त करने का निर्णय पहले ही ले लिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कई मौकों पर उनकी मेहनत और जज़्बे की खुलकर तारीफ कर चुके हैं। अब पद्मश्री की घोषणा के बाद ग्रेटर नोएडा में उनके प्रशंसकों और खेल प्रेमियों की खुशी जैसे दोगुनी हो गई है।
प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह (गोविंदगढ़, जेवर) बताते हैं कि बचपन में ही बेटे को विकलांगता का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने कभी अपने हालात को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने कहा, “वो पढ़ाई में भी हमेशा अव्वल रहा। खेल के साथ पढ़ाई को उसने कभी अलग नहीं किया। स्कूल में एक बार उछल-कूद प्रतियोगिता में उसने पहला स्थान हासिल किया था वहीं से उसका झुकाव हाई जंप की ओर बढ़ता गया।” प्रवीण कुमार ने भी अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वह एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। बचपन में कई बच्चे उन्हें साथ खेलने से कतराते थे, क्योंकि वे ठीक से दौड़ नहीं पाते थे। लेकिन स्कूल में एक दौड़ प्रतियोगिता के दौरान उन्हें पहली बार हाई जंप करने का मौका मिला। प्रवीण कहते हैं, “जब मैंने पहली बार हाई जंप किया तो सब हैरान रह गए। उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि अब यही मेरी ताकत बनेगी और मैं इसी के सहारे आगे बढ़ूंगा। Greater Noida News