ग्रेटर नोएडा में खेल परिसर बचाने के लिए युवाओं ने पैदल मार्च किया। प्राधिकरण से बातचीत के बाद युवक-युवतियों को स्टेडियम में प्रैक्टिस की अनुमति मिली। टेंडर को लेकर भी गंभीर सवाल उठे।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में खेल मैदानों और खेल सुविधाओं को बचाने के लिए शुरू हुई युवाओं (Zen-G) की लड़ाई अब असर दिखाने लगी है। सोमवार को खेल परिसर बचाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियों (Zen-G) ने क्षेत्रीय खेल परिसर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय तक पैदल मार्च किया। इस मार्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के ऐसे बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए जो सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बलों तथा अन्य सरकारी नौकरियों की शारीरिक परीक्षाओं की तैयारी के लिए खेल मैदानों का इस्तेमाल करते हैं। आंदोलन में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, पुलिस-प्रशासन और संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। बैठक में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी पूरी तरह डरे हुए तथा समर्पित नजर आए।
इस दौरान संघर्ष समिति तथा प्राधिकरण के बीच 8 सूत्रीय मांग पर लम्बी वार्ता हुई। इस वार्ता के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि वे जल्द ही युवाओं की मांगों के विषय में सूचित करेंगे। इस बैठक के बाद 7 सितंबर 2026 की शाम 5 बजे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने खेल परिसर पर लगाए गए अपने ताले को खोल दिया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से संघर्ष समिति को यह भी बताया गया कि उनकी शेष मांगों को 8 सितंबर 2026 को उन्हें सूचित कर दिया जाएगा।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के डरे तथा सहमे हुए अधिकारियों ने बैठक में यह तय किया कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के युवक और युवतियां बिना किसी रोक-टोक के क्षेत्रीय खेल परिसर में जाकर अपनी नियमित प्रैक्टिस, एक्सरसाइज और अन्य खेल गतिविधियां कर सकेंगे। युवाओं के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के युवा रोजाना शारीरिक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए खेल मैदानों पर निर्भर हैं। इस कारण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा शाम को 5 बजे खेल परिसर का ताला खोले जाने पर ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का युवा वर्ग खुशियां मनाता हुआ नजर आया। संघर्ष समिति का कहना है कि क्षेत्रीय खेल परिसर केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हैं जो पुलिस, सेना, पैरामिलिट्री और अन्य सेवाओं में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं।
सोमवार के पैदल मार्च की सबसे महत्वपूर्ण बात युवाओं की भागीदारी रही। संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां स्टेडियम से प्राधिकरण कार्यालय तक पहुंचे। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के युवा भी शामिल रहे। कई ऐसे युवक-युवतियां हैं जो रोजाना दौड़, एक्सरसाइज और अन्य शारीरिक अभ्यास के लिए खेल मैदानों का इस्तेमाल करते हैं। युवाओं का तर्क है कि सरकारी नौकरियों में शारीरिक परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए खुले और सुरक्षित मैदान अत्यंत आवश्यक हैं। यदि मौजूदा मैदानों का उपयोग सीमित किया गया या वहां पहुंच मुश्किल हुई तो इसका सीधा असर तैयारी कर रहे युवाओं पर पड़ेगा। पैदल मार्च के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों और प्राधिकरण-पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। आंदोलन के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए अधिकारियों की ओर से युवाओं की तत्काल मांग पर सकारात्मक रुख अपनाया गया। बैठक में यह आश्वासन दिया गया कि स्थानीय युवक और युवतियां क्षेत्रीय खेल परिसर में जाकर अपनी रोजमर्रा की खेल एवं शारीरिक गतिविधियां कर सकेंगे। संघर्ष समिति की अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया गया है।
इस पूरे विवाद का एक और गंभीर पहलू ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के परियोजना विभाग से जुड़ा हुआ है। संघर्ष समिति की ओर से प्राधिकरण में तैनात चर्चित इंजीनियर जीएम प्रोजेक्ट (GM Project) ए.के. सिंह को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। समिति का आरोप है कि क्षेत्रीय खेल परिसर की आड़ में करोड़ों रुपये के टेंडर को "मैनेज" करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रेटर नोएडा के खेल परिसर से जुड़ा यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। चेतना मंच के संपादक तथा वरिष्ठ पत्रकार आर.पी. रघुवंशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी टैग किया है। श्री रघुवंशी की पोस्ट में खेल मैदानों को बचाने के लिए युवाओं की मुहिम, पैदल मार्च और प्राधिकरण के साथ हुई बातचीत को प्रमुखता से सामने रखा गया है। यह संकेत देता है कि मामला अब केवल स्थानीय खेल मैदान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए शासन और प्रशासन के उच्च स्तर तक भी पहुंचाया जा रहा है। Greater Noida News :
ग्रेटर नोएडा तेजी से विकसित होता शहर है। यहां नई सोसायटियां, सड़कें, व्यावसायिक क्षेत्र और संस्थान लगातार विकसित हो रहे हैं। ऐसे में शहर में उपलब्ध खेल मैदानों की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। खासकर ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के ऐसे युवाओं के लिए, जो महंगे निजी जिम या स्पोर्ट्स क्लब का खर्च वहन नहीं कर सकते, सरकारी अथवा सार्वजनिक खेल मैदान बेहद महत्वपूर्ण हैं। एक मैदान किसी खिलाड़ी के लिए सिर्फ खेलने की जगह नहीं होता। यही मैदान किसी युवक की सेना में भर्ती की तैयारी का केंद्र हो सकता है, किसी युवती की पुलिस भर्ती की तैयारी का स्थान हो सकता है और किसी बच्चे के भविष्य का पहला खेल मंच भी बन सकता है।
फिलहाल सोमवार की बैठक के बाद युवाओं को क्षेत्रीय खेल परिसर में प्रवेश और अभ्यास की अनुमति मिलने को संघर्ष समिति अपनी बड़ी सफलता मान रही है। लेकिन आंदोलन यहीं समाप्त होता दिखाई नहीं दे रहा। समिति की अन्य मांगें अभी लंबित हैं और टेंडर को लेकर लगाए गए आरोप भी जांच और स्पष्टीकरण की मांग करते हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण खेल परिसरों को युवाओं के लिए स्थायी रूप से सहज और सुलभ बनाएगा? क्या प्रस्तावित विकास कार्यों और टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होगी? और क्या संघर्ष समिति की बाकी मांगों पर भी जल्द निर्णय लिया जाएगा?
ग्रेटर नोएडा को देश के आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने की योजनाओं के बीच यह सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि यहां के युवाओं के लिए खेल के मैदान कितने सुरक्षित, सुलभ और उपयोगी रहेंगे? युवाओं का यह आंदोलन फिलहाल एक बात स्पष्ट कर चुका है कि खेल मैदान केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य की तैयारी का मैदान है। इस विषय में नीचे दिए गए लिंक से आप अधिक जान सकते हैं। Greater Noida News :
https://x.com/rpraghuvanshi/status/2096776912261825017
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के साथ हुई संघर्ष समिति की बैठक में गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष उमेश भाटी एडवोकेट, रितेश भाटी, आर्य बंधु के नाम से खास पहचान रखने वाले सतेन्द्र नागर, मुकेश विधूड़ी, काजल, दीपक, उमेश, दिनेश एवं सोनू सहित ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के जेन-जी... का प्रतिनिधित्व करने वाले अनेक बड़े चेहरे शामिल थे।
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