पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत कारीगरों को डिजिटल बाजार, ई-कॉमर्स, जीईएम और निर्यात से जोड़ने की पहल, 9 लाभार्थी मीशो से जुड़े और 10 को QR कोड मिला।

ग्रेटर नोएडा। पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने तथा उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार से निकालकर देश-विदेश के बाजार तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में गाजियाबाद में आयोजित एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम में पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 से अधिक लाभार्थियों को उद्यमिता, डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन मार्केटिंग, वित्तीय सेवाओं, सरकारी खरीद और निर्यात के अवसरों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कई लाभार्थियों को सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक भुगतान व्यवस्था से भी जोड़ा गया।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एमएसएमई विकास एवं सुविधा कार्यालय (MSME-DFO), ओखला, नई दिल्ली द्वारा जिला उद्योग केंद्र, गाजियाबाद के सहयोग से 2 सितंबर 2026 को गुलाब वाटिका, जवाहर नगर, गाजियाबाद में पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों के लिए यह जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। Greater Noida News:
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को केवल सरकारी सहायता तक सीमित न रखते हुए उन्हें आधुनिक कारोबार की जरूरतों से जोड़ना रहा। कार्यक्रम में 100 से अधिक पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों ने भाग लिया।
कारीगरों को बताया गया कि आज के दौर में किसी उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी ब्रांडिंग, पैकेजिंग, सही मूल्य निर्धारण, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री भी बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने बाजार की बदलती जरूरतों और प्रतिस्पर्धा के बीच अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी जानकारी दी। Greater Noida News:
कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी ठोस कदम उठाया गया। 9 पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को Meesho प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड किया गया। इससे इन कारीगरों को अपने उत्पाद ऑनलाइन बेचने और व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम में लाभार्थियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण, उत्पादों को प्रदर्शित करने तथा ऑनलाइन बिक्री की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते महत्व को देखते हुए कार्यक्रम में डिजिटल भुगतान पर भी विशेष जोर दिया गया। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) के माध्यम से 10
इस पहल से कारीगर अपने ग्राहकों से डिजिटल माध्यम से भुगतान प्राप्त कर सकेंगे। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। Greater Noida News:
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि पांच ऐसे शिल्पकारों की पहचान करना रही, जिनके उत्पादों में निर्यात की संभावनाएं देखी गईं। इन कारीगरों को निर्यात से संबंधित आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पादों को सही तरीके से ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार रणनीति के साथ प्रस्तुत किया जाए तो उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थान मिल सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ नवीन कुमार, सहायक निदेशक तथा सुनील कुमार, उप निदेशक, MSME-DFO, ओखला, नई दिल्ली द्वारा स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत किए जाने के साथ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन सुनील कुमार ने किया।
इस अवसर पर मोहम्मद आक़िफ़, सहायक आयुक्त उद्योग, जिला उद्योग केंद्र, गाजियाबाद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए उन्हें संस्थागत सहयोग के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, उद्यमिता और बाजार से जोड़ना जरूरी है। आधुनिक तकनीक और बाजार की जानकारी का उपयोग करके कारीगर अपने छोटे व्यवसाय को अधिक मजबूत और टिकाऊ बना सकते हैं।
कार्यक्रम में कई तकनीकी और ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए। राजेश कश्यप ने मार्केटिंग, ब्रांडिंग एवं मूल्य निर्धारण के संबंध में जानकारी देते हुए उत्पाद की पहचान बनाने, सही कीमत तय करने, बाजार के रुझान समझने और प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के तरीकों पर चर्चा की।
सुश्री वीणा सिंह ने पीएम विश्वकर्मा योजना की प्रमुख विशेषताओं और लाभों की जानकारी दी। उन्होंने लाभार्थियों को योजना के माध्यम से उपलब्ध अवसरों को समझने और उनका अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
वहीं बुध राम, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, केनरा बैंक ने वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संबंध में जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को लेकर भी लाभार्थियों को जागरूक किया गया। विवेक मौर्य ने सरकारी खरीद प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कारीगर और सूक्ष्म उद्यमी अपने उत्पादों को सरकारी खरीद व्यवस्था से जोड़कर नए बाजार तलाश सकते हैं।
इसके अलावा Meesho ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया भी समझाई गई और मौके पर ही नौ लाभार्थियों का पंजीकरण कराया गया। Greater Noida News:
कार्यक्रम में केवल पारंपरिक कारोबार तक सीमित जानकारी नहीं दी गई, बल्कि कारीगरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म, पैकेजिंग और आधुनिक व्यावसायिक प्रक्रियाओं की जानकारी भी दी गई।
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के रविन्दर खटाना ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हुए 10 लाभार्थियों के QR कोड तैयार किए।
वहीं रंजन उप्रेती, एक्सपोर्ट कंसल्टेंट ने उद्यमिता एवं कौशल विकास से जुड़ी सरकारी योजनाओं, प्रोत्साहनों, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों पर विस्तार से जानकारी दी।
ग्रेटर नोएडा और गौतम बुद्ध नगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे पारंपरिक कारीगर और छोटे उद्यमी हैं, जो अपने हुनर के दम पर वर्षों से कारोबार कर रहे हैं। लेकिन बाजार, ब्रांडिंग, डिजिटल बिक्री और वित्तीय व्यवस्था की सीमित जानकारी के कारण उनके उत्पाद बड़े बाजार तक नहीं पहुंच पाते।
ऐसे में पीएम विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को ऑनलाइन मार्केटिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी खरीद और निर्यात से जोड़ने की पहल छोटे कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कार्यक्रम में दी गई जानकारी से यह स्पष्ट हुआ कि पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार व्यवस्था से जोड़कर कारीगरों की आय और कारोबार के दायरे को बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटल तकनीक, वित्तीय सेवाओं, ऑनलाइन बाजार और निर्यात के अवसरों से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों के लिए आयोजित यह कार्यक्रम पारंपरिक कारीगरों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय संस्थानों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नए बाजारों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। इससे कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक उद्यम में बदलने और व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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