
Greater Noida : अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे ग्रेटर नोएडा के किसानों से सरकार डर गई है। सरकार का डर इतना बढ़ गया है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसान नेताओं को उनके खुद के घरों में ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। सरकारी तंत्र किसानों को UP के CM योगी आदित्यनाथ से नहीं मिलने देना चाहता है। इस कारण बृहस्पतिवार की देर रात से ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसान नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया गया है।
आपको बता दें कि शुक्रवार (आज) को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ग्रेटर नोएडा पहुंच रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने अंसल एवं सर्वोत्तम बिल्डर से प्रभावित गांवों के कई किसान नेताओं को उनके घरों में नजर बंद कर दिया है। लंबे समय से आंदोलनरत किसानों ने बीते दिनों मुख्यमंत्री के ग्रेटर नोएडा आगमन पर घेराव का ऐलान किया था। ऐसे में कमिश्नरेट पुलिस ने देर रात से किसानों के घेराव को विफल करने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसान नेताओं को उनके घरों में नजर बंद किया हुआ है।
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आपको बता दें कि असल एवं सर्वोत्तम बिल्डर से प्रभावित गांव भी बील अकबरपुर, रामगढ़, बोड़ाकी, कैमराला, भोगपुर आदि गांव के किसान बीते करीब दो माह से आंदोलनरत हैं। किसानों का आरोप है कि अंसल एवं सर्वोत्तम बिल्डर मिलकर उनकी जमीनों पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। वहीं जिन किसानों ने आज तक अपनी जमीन बेची भी नहीं है उनकी जमीनों के कूटराचित नक्शे बनाकर बिल्डर द्वारा फर्जी तरीके से प्लाटों की बुकिंग की जा रही है। ऐसी स्थिति में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के किसान रामगढ़ गांव में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। किसानों ने ऐसे शासन प्रशासन द्वारा कोई सुनवाई नहीं किए जाने पर ग्रेटर नोएडा आगमन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का घेराव किए जाने का ऐलान किया था।
शुक्रवार को (आज) मुख्यमंत्री का ग्रेटर नोएडा स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी में दौरा है। जिसे ध्यान में रखते हुए कमिश्नरेट पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता एवं राष्ट्रीय लोक दल के पूर्व जिला अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार एवं एडवोकेट कपिल शर्मा, किसान नेता सुनील फौजी, वीरसिंह उर्फ लाला चेयरमैन, यशपाल भाटी आदि को देर रात से उन्हीं के घरों में नजरबंद किया हुआ है। ताकि वो किसानों को एकत्र कर मुख्यमंत्री का घेराव करने में सफल ना हो सकें। जिसे लेकर किसानों में खासा रोष व्याप्त है। वहीं किसान अंदरखाने अपनी योजना के अनुसार किसी अन्य स्थान पर एकत्र होकर मुख्यमंत्री का घेराव करने की योजना बना रहे हैं।