ग्रेटर नोएडा में अगर किसी एक स्थान का नाम ऐसा है जिसे शायद ही कोई नागरिक न जानता हो तो वह है परी चौक। शहर की पहचान बन चुके परी चौक से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं।

Greter Noida News : ग्रेटर नोएडा में अगर किसी एक स्थान का नाम ऐसा है जिसे शायद ही कोई नागरिक न जानता हो तो वह है परी चौक। शहर की पहचान बन चुके परी चौक से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। नौकरीपेशा लोग हों, विद्यार्थी हों, कारोबारी हों या आसपास के गांवों और सेक्टरों के निवासी किसी न किसी काम से अधिकांश लोगों को कभी न कभी परी चौक से होकर गुजरना पड़ता है। लेकिन परी चौक से गुजरने का मतलब इन दिनों एक और चीज भी माना जाने लगा है, जाम में फंसने की गारंटी!
सुबह हो या शाम, कामकाजी दिनों का समय हो या छुट्टी का दिन, परी चौक और उसके आसपास यातायात का दबाव बढ़ते ही वाहनों की लंबी कतारें लगना आम बात हो गई है। कुछ मिनट की दूरी तय करने में वाहन चालकों को कई बार काफी समय लग जाता है। जाम में फंसे नागरिक पहले घड़ी देखते हैं, फिर सामने खड़े वाहनों को देखते हैं और अंत में उनकी नजर ट्रैफिक पुलिस को तलाशने लगती है।
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परी चौक पर जाम में फंसे नागरिकों का एक अनौपचारिक 'रिवाज' भी बनता जा रहा है। वाहन आगे नहीं बढ़ता तो पहले हॉर्न बजता है, फिर चालक परेशान होता है और कुछ देर बाद नोएडा ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था को लेकर नाराजगी शुरू हो जाती है।
कई वाहन चालकों का कहना है कि जब जाम में फंसे नागरिक परेशान होकर ट्रैफिक पुलिस को कोसते हैं तो लगता है कि शायद ये 'दुआएं' ट्रैफिक विभाग तक पहुंच रही होंगी। लेकिन जाम की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि विभाग तक पहुंचने से पहले ही ये 'दुआएं' ट्रैफिक के किसी सिग्नल पर फंस जाती हैं। नागरिकों की नाराजगी का आलम यह है कि जाम में फंसे लोगों की बातचीत का एक बड़ा हिस्सा ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर शिकायतों में निकल जाता है। सवाल यह है कि यदि रोजाना हजारों लोगों को एक ही स्थान पर परेशानी हो रही है तो आखिर इस परेशानी का स्थायी समाधान कब होगा?
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परी चौक ग्रेटर नोएडा का महत्वपूर्ण यातायात केंद्र है। आसपास के सेक्टरों, गांवों, संस्थानों और प्रमुख मार्गों से आने वाला यातायात यहां एकत्र होता है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के महत्वपूर्ण इलाकों की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी परी चौक बेहद अहम मार्ग है।
यातायात का दबाव बढ़ने पर चौराहे के आसपास वाहनों की गति बेहद धीमी हो जाती है। कहीं वाहन रेंगते नजर आते हैं तो कहीं वाहन चालकों को आगे बढ़ने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जाम केवल वाहन चालक का समय ही नहीं खाता, बल्कि इसके कारण पूरे आसपास के यातायात पर असर पड़ता है। एक तरफ वाहन कतार में खड़े रहते हैं तो दूसरी तरफ उससे जुड़े मार्गों पर भी यातायात का दबाव बढ़ने लगता है।
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नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब परी चौक पर प्रतिदिन यातायात का भारी दबाव रहता है तो ट्रैफिक पुलिस की व्यवस्था वहां कितनी प्रभावी है? व्यंग्य में कहें तो परी चौक पर जाम देखकर ऐसा लगता है कि जाम लगाने वाले वाहनों की संख्या और ट्रैफिक संभालने वाली व्यवस्था के बीच कोई 'मुकाबला' चल रहा है और हर दिन जाम जीत रहा है। लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर दिखाई देती है तो वह उनके लिए लगभग 'त्योहार' जैसा अनुभव होता है। वरना रोज की कहानी वही है परी चौक पहुंचिए, गाड़ियों की कतार देखिए, इंजन चालू रखिए, हॉर्न बजाइए और इंतजार कीजिए।
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परी चौक के जाम को लेकर नागरिकों की नाराजगी अब कोई नई बात नहीं है। रोजाना जाम में फंसने वाले लोग सोशल मीडिया से लेकर आपसी बातचीत तक में ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा जाए तो ग्रेटर नोएडा के नागरिकों ने नोएडा ट्रैफिक पुलिस को रोजाना इतनी 'गालियां' दे दी हैं कि अगर गालियों से ट्रैफिक व्यवस्था सुधरती तो परी चौक आज देश का सबसे व्यवस्थित चौराहा होता। लेकिन समस्या यह है कि नागरिकों की नाराजगी के बावजूद जाम की समस्या बार-बार सामने आती है।
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परी चौक कोई ऐसा चौराहा नहीं है जहां अचानक एक दिन यातायात का दबाव बढ़ गया हो। यहां लगातार बड़ी संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। इसलिए नागरिकों की मांग है कि परी चौक के लिए केवल मौके पर ट्रैफिक संभालने की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और वैज्ञानिक ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाना चाहिए। पीक आवर्स में अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती, यातायात का बेहतर डायवर्जन, सिग्नल टाइमिंग की समीक्षा, पैदल यात्रियों और सार्वजनिक परिवहन की आवाजाही को व्यवस्थित करना तथा आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने जैसे उपायों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
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ग्रेटर नोएडा को आधुनिक और नियोजित शहर के रूप में विकसित किया गया है। चौड़ी सड़कें और बेहतर कनेक्टिविटी इसकी बड़ी पहचान हैं। ऐसे में शहर के सबसे महत्वपूर्ण चौराहों में शामिल परी चौक पर बार-बार लगने वाला जाम नागरिकों के लिए परेशानी का विषय ही नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन पर भी सवाल खड़ा करता है। नागरिकों का कहना है कि वे रोज जाम में फंसकर ट्रैफिक पुलिस को कोसते हैं और ट्रैफिक पुलिस शायद रोज जाम देखकर व्यवस्था संभालने में जुटती है। लेकिन अगर दोनों का यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो परी चौक की पहचान 'ग्रेटर नोएडा का प्रवेश द्वार' से ज्यादा 'ग्रेटर नोएडा का स्थायी जाम पॉइंट' बन जाएगी।
अब देखना यह है कि नागरिकों की नाराजगी, रोजाना की शिकायतें और सोशल मीडिया पर उठती आवाजें नोएडा ट्रैफिक पुलिस को परी चौक के लिए कोई ठोस और स्थायी समाधान निकालने के लिए प्रेरित करती हैं या फिर नागरिक कल भी जाम में फंसकर आज की तरह ही ट्रैफिक पुलिस को 'ढेर सारी गालियां' देते रहेंगे।
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