ग्रेटर नोएडा में ECHS कार्ड के फर्जी इस्तेमाल का बड़ा खेला, 4 गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पतालों में फर्जी ECHS कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले एक सुनियोजित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पतालों में फर्जी ECHS कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले एक सुनियोजित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में उजागर हुए इस मामले में पुलिस ने एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने दूसरी युवती की पहचान का इस्तेमाल कर इलाज कराया, लाखों रुपये का फायदा उठाया और मौत के बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को छिपाने की कोशिश की।
ग्रेटर नोएडा में जांच के दौरान खुला फर्जी इलाज का नेटवर्क
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया सेल के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा की बिसरख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड के जरिए मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, ECHS कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वादी की बेटी के नाम से बने दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए तनु नाम की महिला का इलाज कराया। इस इलाज पर आने वाले करीब 6 लाख 50 हजार रुपये के खर्च का गलत तरीके से लाभ उठाया गया। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपचार के दौरान महिला की मौत हो जाने पर गिरोह ने कथित तौर पर उसी फर्जी पहचान के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार करवा दिया।
बहन के इलाज के लिए अपनाया गया फर्जी रास्ता
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिखा सिंह, यश सिंह, जितेंद्र यादव और दानिश खान के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में शिखा सिंह ने बताया कि उसकी सगी बहन तनु लंबे समय से बीमार थी। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण उसका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान बुलंदशहर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक परिचित के जरिए उसकी मुलाकात दानिश खान से हुई। शिखा के मुताबिक, दानिश ने कम खर्च में इलाज कराने का भरोसा दिया। उसके कहने पर उसने और उसके भाई यश सिंह ने तनु को किसी दूसरी युवती की पहचान पर अस्पताल में भर्ती कराया। इसके लिए व्हाट्सएप पर भेजे गए फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया।
इलाज के दौरान मौत, फिर फर्जी नाम पर लिया गया शव
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि उपचार के दौरान तनु की मौत हो गई। इसके बाद शव भी उसी फर्जी नाम और पहचान के आधार पर लिया गया। पूछताछ में यह भी पता चला कि इस पूरे काम के बदले दानिश खान को करीब 65 हजार रुपये ऑनलाइन दिए गए, जबकि बाकी रकम नकद में चुकाई गई। यह खुलासा ग्रेटर नोएडा में अस्पतालों की दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। जिस आसानी से फर्जी कागजात के सहारे इलाज, क्लेम और बाद की औपचारिकताएं पूरी की गईं, उसने पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
दो साल से चल रहा था धोखाधड़ी का खेल
पूछताछ में दानिश खान ने बताया कि वह अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर पिछले करीब दो वर्षों से इस तरह का काम कर रहा था। दोनों ऐसे लोगों को तलाशते थे, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था और इलाज या क्लेम की प्रक्रिया पूरी कराकर कमीशन लिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इस तरह के मामलों में आरोपियों का तरीका बेहद सुनियोजित था। जरूरतमंद मरीजों की पहचान करना, फर्जी दस्तावेज जुटाना, अस्पताल में भर्ती कराना और बाद में क्लेम का लाभ लेना यह पूरा खेल एक तय नेटवर्क के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि दानिश खान और उसका साथी प्रदीप पहले भी नोएडा के थाना फेस-2 क्षेत्र से जेल जा चुके हैं। अब ग्रेटर नोएडा पुलिस फरार आरोपी प्रदीप की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इलाज दिलाया है। Greater Noida News
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पतालों में फर्जी ECHS कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले एक सुनियोजित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाना क्षेत्र में उजागर हुए इस मामले में पुलिस ने एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने दूसरी युवती की पहचान का इस्तेमाल कर इलाज कराया, लाखों रुपये का फायदा उठाया और मौत के बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरे खेल को छिपाने की कोशिश की।
ग्रेटर नोएडा में जांच के दौरान खुला फर्जी इलाज का नेटवर्क
गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया सेल के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा की बिसरख पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड के जरिए मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, ECHS कार्ड और आधार कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने वादी की बेटी के नाम से बने दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए तनु नाम की महिला का इलाज कराया। इस इलाज पर आने वाले करीब 6 लाख 50 हजार रुपये के खर्च का गलत तरीके से लाभ उठाया गया। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपचार के दौरान महिला की मौत हो जाने पर गिरोह ने कथित तौर पर उसी फर्जी पहचान के आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार करवा दिया।
बहन के इलाज के लिए अपनाया गया फर्जी रास्ता
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिखा सिंह, यश सिंह, जितेंद्र यादव और दानिश खान के रूप में हुई है। पुलिस पूछताछ में शिखा सिंह ने बताया कि उसकी सगी बहन तनु लंबे समय से बीमार थी। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर होने के कारण उसका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान बुलंदशहर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक परिचित के जरिए उसकी मुलाकात दानिश खान से हुई। शिखा के मुताबिक, दानिश ने कम खर्च में इलाज कराने का भरोसा दिया। उसके कहने पर उसने और उसके भाई यश सिंह ने तनु को किसी दूसरी युवती की पहचान पर अस्पताल में भर्ती कराया। इसके लिए व्हाट्सएप पर भेजे गए फर्जी ECHS कार्ड और आधार कार्ड का इस्तेमाल किया गया।
इलाज के दौरान मौत, फिर फर्जी नाम पर लिया गया शव
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि उपचार के दौरान तनु की मौत हो गई। इसके बाद शव भी उसी फर्जी नाम और पहचान के आधार पर लिया गया। पूछताछ में यह भी पता चला कि इस पूरे काम के बदले दानिश खान को करीब 65 हजार रुपये ऑनलाइन दिए गए, जबकि बाकी रकम नकद में चुकाई गई। यह खुलासा ग्रेटर नोएडा में अस्पतालों की दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। जिस आसानी से फर्जी कागजात के सहारे इलाज, क्लेम और बाद की औपचारिकताएं पूरी की गईं, उसने पूरे सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
दो साल से चल रहा था धोखाधड़ी का खेल
पूछताछ में दानिश खान ने बताया कि वह अपने साथी प्रदीप के साथ मिलकर पिछले करीब दो वर्षों से इस तरह का काम कर रहा था। दोनों ऐसे लोगों को तलाशते थे, जो महंगे इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं होते थे। इसके बाद उन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था और इलाज या क्लेम की प्रक्रिया पूरी कराकर कमीशन लिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, इस तरह के मामलों में आरोपियों का तरीका बेहद सुनियोजित था। जरूरतमंद मरीजों की पहचान करना, फर्जी दस्तावेज जुटाना, अस्पताल में भर्ती कराना और बाद में क्लेम का लाभ लेना यह पूरा खेल एक तय नेटवर्क के जरिए संचालित किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि दानिश खान और उसका साथी प्रदीप पहले भी नोएडा के थाना फेस-2 क्षेत्र से जेल जा चुके हैं। अब ग्रेटर नोएडा पुलिस फरार आरोपी प्रदीप की तलाश में जुटी है। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को इसी तरह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इलाज दिलाया है। Greater Noida News












