
शैलेंद्र ने मामले में पुलिस और कॉलेज प्रशासन से माफी मांगी है और आश्वासन दिया है कि भविष्य में वह ऐसी किसी गलती को दोहराएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल 12वीं तक पढ़ाई की है और यह वीडियो उनके दोस्तों द्वारा सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया था। वीडियो वायरल होते ही शैलेंद्र खुद भी चिंतित हो गया और बार-बार स्पष्ट किया कि उसका कॉलेज से कोई संबंध नहीं है।
वहीं, IIMT कॉलेज के डायरेक्टर जनरल अंकुर जौहरी ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। उनका कहना है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर कॉलेज की छवि धूमिल करने के लिए यह फर्जी वीडियो बनाया। जौहरी ने जोर देकर कहा कि पोस्टर में दिखने वाला युवक वास्तव में कॉलेज का होनहार छात्र है, जिसे लंदन की एक प्रतिष्ठित कंपनी में उच्च पैकेज पर नौकरी मिली है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
थाना नॉलेज पार्क पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया। वीडियो वायरल होने के बाद शैलेंद्र को थाने बुलाया गया, जहां उसने कबूल किया कि यह वीडियो उसके दोस्तों ने मजाक में बनाया था। पुलिस ने शैलेंद्र को कड़ी चेतावनी दी और उसे छोड़ दिया। फिलहाल पुलिस और कॉलेज प्रशासन ने जनता से अपील की है कि बिना सत्यापन के किसी भी वायरल वीडियो पर भरोसा न करें और अफवाह फैलाने से बचें। Greater Noida News