Greater Noida News: पिछले कुछ समय से सोसायटी में पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें लगातार मिल रही थीं। बीते एक सप्ताह में कई लोगों ने उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याओं की शिकायत की। इसके बाद एओए की ओर से पानी के सैंपल जांच के लिए निजी लैब भेजे गए।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक सोसायटी में दूषित पानी की आपूर्ति का मामला सामने आया है। सोसायटी के निवासियों का दावा है कि गंगाजल की खराब गुणवत्ता के कारण 100 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं। इस घटना के बाद सोसायटी के 11 टावरों में रहने वाले करीब 1640 परिवारों में चिंता का माहौल है। लोगों ने पानी की गुणवत्ता और समय पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर एओए और संबंधित अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय से सोसायटी में पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें लगातार मिल रही थीं। बीते एक सप्ताह में कई लोगों ने उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याओं की शिकायत की। इसके बाद एओए की ओर से पानी के सैंपल जांच के लिए निजी लैब भेजे गए। निवासियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट में पानी में कोलीफॉर्म और ई.कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली है। ये बैक्टीरिया दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों से जुड़े माने जाते हैं। लोगों का दावा है कि करीब दो सप्ताह के अंदर 100 से अधिक लोग बीमार हुए हैं जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की भी है।
बीमारी के मामले सामने आने के बाद सोसायटी के कई परिवारों ने पानी का इस्तेमाल करने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। लोग आरओ के पानी को भी उबालकर पी रहे हैं। निवासियों का कहना है कि अगर समय रहते पानी की जांच और टैंकों की सफाई पर ध्यान दिया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। सोसायटी निवासी ने बताया कि उनके घर के सभी सदस्य बीमार हो गए हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। वहीं, दूरसे निवासी ने एओए पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ओवरहेड टैंकों की सफाई और पानी की नियमित जांच जरूरी थी। उनके मुताबिक, समय पर कदम उठाए जाते तो बड़ी संख्या में लोग बीमार होने से बच सकते थे।
इस मामले में एओए के जनरल सेक्रेटरी ने सफाई दी है। उनका कहना है कि लोगों की शिकायतों के बाद ही पानी की जांच कराई गई और रिपोर्ट आने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को भी जानकारी दी गई। उन्होंने निवासियों के लापरवाही वाले आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में टैंकों की सफाई में कुछ दिक्कतें आती हैं और सितंबर के पहले सप्ताह से सफाई का काम शुरू कराया जाएगा।
मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम भी सोसायटी पहुंची और पानी के नमूने लिए। इन सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सोसायटी के लोग पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं और जल्द से जल्द समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि पानी दूषित होने की असली वजह क्या थी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
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