ग्रेटर नोएडा की एक पॉश हाईराइज सोसायटी में अचानक उल्लुओं का ऐसा खौफ छाया कि लोग घर से बाहर निकलने तक में डरने लगे। पिछले सात-आठ दिनों से लगातार हो रहे हमलों ने ला रेजिडेंशिया सोसायटी के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है ।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों की चमचमाती इमारतों के बीच इन दिनों एक ऐसा खौफ पसरा हुआ है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। यहां किसी अपराधी गिरोह, आवारा कुत्तों या किसी जंगली जानवर का आतंक नहीं, बल्कि उल्लुओं के अचानक और लगातार हो रहे हमलों** ने लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी सावधान कर दिया है।बिसरख थाना क्षेत्र स्थित ला रेजिडेंशिया सोसायटी में पिछले सात-आठ दिनों से उल्लुओं के हमलों की घटनाओं ने निवासियों को डरा दिया। सोसायटी में रहने वाले कई लोग इन हमलों में घायल हुए। मामला पुलिस तक पहुंचा तो पुलिस ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद सात उल्लुओं को पकड़ लिया और उन्हें सूरजपुर स्थित वेटलैंड के जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया। उल्लू तो पकड़ लिए गए, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी वहीं खड़ा हैआखिर इस हाईराइज पॉश सोसायटी में इतने उल्लू अचानक कहां से आए ? स्थानीय निवासियों के पास इसका जवाब नहीं है। पुलिस भी फिलहाल इस रहस्य की तह तक नहीं पहुंच पाई है और वन विभाग के सामने भी उल्लुओं के अचानक इस तरह एक जगह एकत्र होने की पूरी वजह स्पष्ट नहीं है। Greater Noida News
वन विभाग की कार्रवाई के बाद भले ही सोसायटी के लोगों को तत्काल राहत मिली हो, लेकिन जिन लोगों ने उल्लुओं के हमले झेले हैं, उनके मन से डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।सोसायटी के लोगों का कहना है कि लगातार कई दिनों तक उल्लुओं के हमले होने के कारण लोगों को यह डर सताता रहा कि कहीं अचानक किसी पेड़, पार्क या रास्ते में उल्लू उन पर हमला न कर दें। खास बात यह है कि मामला किसी एक उल्लू तक सीमित नहीं था। वन विभाग की टीम ने सात उल्लुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा है। यही संख्या इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है। Greater Noida News
ला रेजिडेंशिया के निवासियों के बीच इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इसी सवाल की है। क्या ये उल्लू पहले से यहां रह रहे थे? क्या पुराने पेड़ों में इनके घोंसले थे? क्या किसी ने इनके घोंसलों के साथ छेड़छाड़ की? या फिर इन उल्लुओं को कहीं से लाकर यहां छोड़ा गया? इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। जिला वन अधिकारी रजनीकांत मित्तल ने चेतना मंच को बताया कि हाईराइज सोसायटी में अचानक उल्लुओं का आना और फिर लोगों पर आक्रामक हमला करना गंभीर विषय है। उनके अनुसार, सोसायटी में मौजूद पुराने पेड़ों में उल्लुओं ने अपने घोंसले बनाए हो सकते हैं। संभव है कि स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति ने उनके घोंसलों अथवा उनके आसपास छेड़छाड़ की हो, जिसके बाद उल्लू आक्रामक हो गए और लोगों पर हमले करने लगे। हालांकि, यह अभी एक संभावित कारण है और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक वजह की पुष्टि होना बाकी है। Greater Noida News
जिला वन अधिकारी रजनीकांत मित्तल के मुताबिक वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए सात उल्लुओं को पकड़ लिया है। इन सभी उल्लुओं को सूरजपुर स्थित वेटलैंड के जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया है, जहां उनके प्राकृतिक वातावरण में रहने की व्यवस्था है। वन विभाग ने ला रेजिडेंशिया के निवासियों से यह भी कहा है कि यदि कार्रवाई के बाद भी सोसायटी में कोई उल्लू दिखाई देता है तो लोग स्वयं उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग को सूचना दें। Greater Noida News
इस पूरे घटनाक्रम में एक दूसरा सवाल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वन्यजीवों से जुड़े लोगों के बीच यह बात सामने आती रही है कि देश में उल्लुओं की विभिन्न प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित हैं। उल्लुओं को पकड़ना, उनका अवैध व्यापार करना अथवा उन्हें नुकसान पहुंचाना कानूनी कार्रवाई का विषय हो सकता है। इसी वजह से यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं इन उल्लुओं को किसी अवैध गतिविधि के लिए पकड़कर ले जाया तो नहीं जा रहा था और किसी कारणवश उन्हें सोसायटी के आसपास छोड़ दिया गया? यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल **उल्लुओं के हमले का मामला नहीं**, बल्कि वन्यजीवों के संभावित अवैध कारोबार से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन सकता है। हालांकि, **ला रेजिडेंशिया की घटना में अभी तक इस आशंका के समर्थन में कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है।** इसलिए इसे फिलहाल जांच का विषय ही माना जाना चाहिए। Greater Noida News
भारत में उल्लू को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। हिंदू धार्मिक मान्यता में उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। इसी कारण उल्लू सामान्य वन्यजीव होने के साथ-साथ धार्मिक आस्था से भी जुड़ा हुआ है। लेकिन धार्मिक मान्यता अपनी जगह है और वन्यजीव संरक्षण कानून अपनी जगह। किसी भी वन्यजीव को पकड़ना, उसका व्यापार करना अथवा उसे नुकसान पहुंचाना कानून के दायरे में आता है। Greater Noida News
पुलिस तक पहुंची शिकायत, वन विभाग ने संभाला मोर्चा
उल्लुओं के लगातार हमलों से परेशान सोसायटी के लोगों ने मामले की शिकायत बिसरख थाना पुलिस से की थी। पुलिस ने मामले की जानकारी वन विभाग को दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उल्लुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया। काफी प्रयास के बाद सात उल्लुओं को पकड़ा गया। लेकिन कार्रवाई के बाद भी एक सवाल अनुत्तरित रह गया ये उल्लू आखिर इतनी बड़ी संख्या में यहां पहुंचे कैसे? Greater Noida News
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सोसायटी में मौजूद पुराने पेड़ उल्लुओं के लिए प्राकृतिक आश्रय हो सकते हैं। यदि इन पेड़ों पर उल्लुओं ने घोंसले बनाए थे तो उनके आसपास मानवीय गतिविधियों अथवा किसी प्रकार की छेड़छाड़ के कारण वे आक्रामक हुए होंगे। ऐसे में यह भी जरूरी हो जाता है कि सोसायटी परिसर के पुराने पेड़ों, संभावित घोंसलों और आसपास के क्षेत्र की जांच की जाए। क्योंकि सात उल्लुओं को पकड़ लेना इस घटना का तत्काल समाधान तो हो सकता है, लेकिन घटना की जड़ तक पहुंचना अभी बाकी है। Greater Noida News
उल्लुओं के हमलों में घायल हुए लोगों के लिए यह घटना सामान्य नहीं है। हाईराइज सोसायटी में रहने वाले लोगों ने शायद ही कभी सोचा होगा कि घर से बाहर निकलते समय उन्हें आसमान से आने वाले किसी पक्षी के हमले से बचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ेगी। वन विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, लेकिन घायल लोग और प्रत्यक्षदर्शी अभी भी इस घटना को याद करके सहम जाते हैं। Greater Noida News
ला रेजिडेंशिया की घटना ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की तेजी से विकसित होती हाईराइज संस्कृति के बीच वन्यजीवों और इंसानी बस्तियों के बदलते रिश्ते पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर बढ़ रहा है। ऊंची इमारतें खड़ी हो रही हैं। पुराने पेड़ और प्राकृतिक क्षेत्र लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में यदि किसी वन्यजीव ने किसी सोसायटी परिसर को अपना आश्रय बना लिया है तो उसके साथ मानव व्यवहार किस तरह का होना चाहिए, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है। सात उल्लू पकड़कर जंगल में छोड़ दिए गए हैं, लेकिन ला रेजिडेंशिया के लोगों के मन में बैठा सवाल अभी भी वहीं है ग्रेटर नोएडा में हर डाल पर उल्लू बैठा है, अंजाम में गुलिस्तां क्या होगा ? Greater Noida News
विज्ञापन