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ग्रेटर नोएडा से लेकर दिल्ली तथा मुंबई तक चर्चा में रहने वाली प्रसिद्ध कंपनी जेपी एसोसिएट्स बिक चुकी है। दिवालिया घोषित होने के बाद जयप्रकाश गौड की कंपनी जेपी एसोसिएट्स को प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडानी ने खरीद लिया है।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा से लेकर दिल्ली तथा मुंबई तक चर्चा में रहने वाली प्रसिद्ध कंपनी जेपी एसोसिएट्स बिक चुकी है। दिवालिया घोषित होने के बाद जयप्रकाश गौड की कंपनी जेपी एसोसिएट्स को प्रसिद्ध उद्योगपति गौतम अडानी ने खरीद लिया है। पहले इस कंपनी को वेदांता उद्योग समूह खरीदने वाला था। लम्बी कानूनी प्रक्रिया के बीच जेपी उद्योग समूह की कंपनी को गौतम अडानी की कंपनी ने खरीद लिया है। Greater Noida News
गौतम अडानी ने जयप्रकाश गौड की कंपनी जेपी एसोसिएट्स को कुल 14 हजार 535 करोड़ रूपए की बोली लगाकर खरीदा है। जिस जेपी कंपनी को 14533 करोड़ रूपए में खरीदा गया है उस कंपनी के ऊपर 40 हजार 822 करोड़ रूपए का कर्जा है। अब सवाल यह उठता है कि 14533 करोड़ रूपए में बिकने वाली जेपी एसोसिएट्स के कर्ज के 26287 करोड़ रूपए का भुगतान कौन करेगा? यह भी कह सकते हैं कि 26287 करोड़ रूपए कहां से आएंगे। Greater Noida News
आपको बता दें कि जेपी एसोसिएटस लिमिटेड (JAL) को खरीद कर गौतम अडानी जेपी उद्योग समूह के मालिक बन गए। इस बीच उन बैंकों को मोटा घाटा हो रहा है जिन बैंकों ने (JAL) को मोटा कर्ज दे रखा था। Jaiprakash Associates Limited (JAL) को लोन देने वाले बैंकों और वित्तीय संस्थानों की लिस्ट बहुत लंबी है। कंपनी ने लगभग 19 बैंकों/वित्तीय संस्थाओं से लोन ले रखा है। अब जब जेपी एसोसिएट्स दिवालिया प्रक्रिया में अदाणी ग्रुप के हाथों बिक रही है तो 40822 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस नुकसान को वित्तीय भाषा में हेयर कट कहा जाता है। Greater Noida News
इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया के तहत जब कोई कंपनी दिवालिया (Bankrupt) होती है, तो उसके बकाया को चुकाने के लिए लेनदारों को जो समझौता करना पड़ता है, उसे वित्तीय भाषा में 'हेयरकट' (Haircut) कहते हैं। यानी अब ₹40822 करोड़ का नुकसान लेंडर्स को उठाना पड़ेगा। यानी लेंडर्स को 40822 करोड़ का हेयरकट उठाना पड़ेगा। जयप्रकाश गौड़ की जेपी एसोसिएट्स को खरीदने के लिए सबसे ऊंची बोली अनिल अग्रवाल की वेदांता ने लगाई थी। उसने लगभग 17 हजार करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। लेकिन पेमेंट करने का उसका प्लान अदाणी के प्लान से अलग था। वेदांता 17 हजार करोड़ रुपये की पेमेंट करने में लगभग 5 साल लगाता। वहीं, अदाणी ने इसे 2 साल में पूरा करने का प्लान दिया था। यही कारण है कि लेंडर्स की कमेटी ने अदाणी ग्रुप को चुना। Greater Noida News
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