जय प्रकाश गौड़ के JP समूह ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से लेकर पूरे उत्तर भारत में रीयल स्टेट उद्योग का नक्शा ही बदल दिया था। वर्तमान में जयप्रकाश गौड़ के साम्राज्य की सबसे बड़ी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स दिवालिया होकर बिक गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘‘आखिर कैसे बर्बाद हुआ जयप्रकाश गौड़

नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में रियल स्टेट का साम्राज्य चलाने वाली जेपी एसोसिएटस कंपनी बर्बाद हो चुकी है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में अनाप-शनाप ढंग से निवेश करके बर्बाद हुई जेपी एसोसिएटस कंपनी के मालिक के तौर पर काम कर रहे मनोज गौड की ED के द्वारा गिरफ्तारी बर्बादी के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। जेपी एसोसिएट्स के मालिक मनोज गौड़ को ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। हाल ही में जेपी एसोसिएट्स को वेदांता उद्योग समूह ने खरीदा था। कंपनी बिक जाने के बाद जय प्रकाश गौड़ (संस्थापक) तथा उसके बेटों को लगता था कि वह अब पूरी तरह से सुरक्षित हो गए हैं।
ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे देश में जयप्रकाश गौड़ की कम्पनी JP समूह के नाम से प्रसिद्ध रही है। जयप्रकाश गौड़ ने JP के जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Group of Companies) के द्वारा बहुत बड़ा साम्राज्य खड़ा किया था। जयप्रकाश गौड़ के इस साम्राज्य का केन्द्र बना था उत्तर प्रदेश का ग्रेटर नोएडा क्षेत्र। जय प्रकाश गौड़ के JP समूह ने ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से लेकर पूरे उत्तर भारत में रीयल स्टेट उद्योग का नक्शा ही बदल दिया था। वर्तमान में जयप्रकाश गौड़ के साम्राज्य की सबसे बड़ी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स दिवालिया होकर बिक गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि ‘‘आखिर कैसे बर्बाद हुआ जयप्रकाश गौड़ का पूरा साम्राज्य?’
जयप्रकाश गौड़ का साम्राज्य कैसे बर्बाद हो गया? अथवा क्यों डूबा जयप्रकाश गौड़ का इतना बड़ा जहाज इस बात का विश्लेषण करने से पहले यह बताना जरूरी है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बड़ी पहचान के साथ उभरी थी। इन दिनों जयप्रकाश एसोसिएट्स के दिवालिया की प्रक्रिया NCLT में चल रही थी। इसी बीच जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए बोली लगाई गई। बोली की प्रक्रिया में गौतम अडानी की कंपनी अडानी समूह ने भी भाग लिया। बोली प्रक्रिया में भाग लेते हुए वेदांता उद्योग समूह ने सबसे अधिक बोली लगाकर जयप्रकाश एसोसिएट्स को अपनेनाम कर लिया। वेदांता उद्योग समूह ने 17 हजार करोड़ रुपए की बोली लगाकर जयप्रकाश एसोसिएट्स का सफल अधिग्रहण करने मेंसफलता हासिल कर ली। जल्दी ही कानूनी प्रक्रिया पूरी करके वेदांता उद्योग समूह जयप्रकाश गौड की प्रसिद्ध कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) का विधिवत स्वामित्व प्राप्त कर लेगा।
आपको बता दें कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के कर्जदाताओं ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत कंपनी की बिक्री के लिए एक प्रक्रिया आयोजित की। इस प्रक्रिया में कई बोलीदाताओं ने भाग लिया लेकिन अंत में केवल दो कंपनियां- अडानी और वेदांता ने ही बोलियां लगाईं। वेदांता ने अडानी समूह को पीछे छोड़ते हुए अंतत: 17,000 करोड़ रुपये की सफल बोली लगाई, जिससे उसका नेट मौजूदा मूल्य 12,505 करोड़ रुपये रहा। बता दें कि जेपी समूह द्वारा ऋण भुगतान में चूक के बाद जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड को दिवाला कार्यवाही में ले जाया गया। (JAL) के लेनदार 57,185 करोड़ रुपये का भारी भरकम दावा कर रहे थे। लम्बी प्रक्रिया के बाद बात 17 हजार करोड़ रूपये में फाइनल हो गई है। आपको यह भी बता दें कि जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के पास प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाएं हैं। इनमें ग्रेटर नोएडा में जेपी ग्रीन्स, नोएडा में जेपी ग्रीन्स विशटाउन और जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी, जो आगामी जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निकट रणनीतिक रूप से स्थित है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में इसके तीन कॉमर्शियल तथा औद्योगिक कार्यालय भी हैं, जबकि इसके होटल कैटेगरी की दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में पांच संपत्तियां हैं। जयप्रकाश एसोसिएट्स के पास मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में चार सीमेंट कारखाने हैं और मध्यप्रदेश में पट्टे पर ली गई चूना पत्थर की अनेक खदानें हैं ।
जयप्रकाश गौड़ के साम्राज्य की बर्बादी के कारण पर जाने से पहले जयप्रकाश गौड़ के JP समूह के इतिहास को जानना बहुत जरूरी है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में रीयल एस्टेट का पर्यायवाची बनकर प्रसिद्ध हुए JP समूह का इतिहास बहुत ही रोचक है। JP उद्योग समूह तथा जयप्रकाश एसोसिएट्स के संस्थापक जयप्रकाश गौड़ का जन्म 1931 में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास स्थित बुलंदशहर के एक छोटे से गांव में हुआ था। छोटे शहर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने 1948 में थॉम्पसन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया और 1950 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद जयप्रकाश गौड़ उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (ओवरसियर) के पद पर नौकरी करने लगे। उन्होंने मात्र 7 साल तक नौकरी की। सरकारी नौकरी छोडक़र जयप्रकाश गौड़ ने साल 1979 में जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना कर दी। जयप्रकाश गौड़ ने मात्र 10 हजार रुपये की छोटी सी पूंजी के साथ अपने बिजनेस की शुरुआत की थी। जयप्रकाश गौड़ का उद्योग चलाने का मंत्र काम कर गया। देखते ही देखते जयप्रकाश एसोसिएट्स ने बड़ी-बड़ी कंपनियां स्थापित करनी शुरू कर दी। वर्ष-2000 के दशक की शुरुआत तक JP उद्योग समूह हर जगह छा गया था। बिजली (Power), सीमेंट (Cement), hospitality और सबसे महत्वपूर्ण रियल एस्टेट। हर सेक्टर में जेपी की तूती बोलती थी। JP उद्योग समूह ने साल 2003 में एक बड़ा प्रोजेक्ट हासिल कया। यह प्रोजेक्ट था ग्रेटर नोएडा और आगरा को जोडऩे का। यानी 165 किलोमीटर लंबा यमुना एक्सप्रेस वे (Yamuna Expressway) बनाने का। इस प्रोजेक्ट की कल्पना यूपी सरकार ने 2001 में की थी। 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेस वे का विकास जेपी समूह द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत किया गया है। दुर्भाग्य से यह प्रोजेक्ट JP समूह का सबसे पहला ‘‘फेल” प्रोजेक्ट साबित हुआ। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 13,000 करोड़ रुपये थी। इतनी बड़ी लागत लगाकर कमाई लगभग जीरो रही।
ग्रेटर नोएडा से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में जयप्रकाश गौड़ की तूती बोलने का सबसे बड़ा कारण यह था कि उनके सिर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती का सीधा आशीर्वाद था। साल 2012 में सुश्री मायावती का राजनीतिक सूरज अस्त हो गया। मायावती के अस्त होते ही जयप्रकाश गौड़ के बुरे दिन शुरू हो गए। जयप्रकाश गौड़ तथा उनके कारोबार को चलाने वाले उनके बेटों को लगता था कि अब वे बड़ा साम्राज्य बना चुके हैं उन्हें किसी के राजनीतिक संरक्षण की जरूरत नहीं रही है। जयप्रकाश गौड़ तथा उनके बेटों की यह राजनीतिक संरक्षण के बिना कारोबार करने की सोच उनकी विफलता का सबसे बड़ा कारण बनती चली गई। विश्लेषकों का मत है कि जयप्रकाश गौड़ ने मायावती के बाद किसी बड़े नेता का आशीर्वाद प्राप्त कर लिया होता तो जयप्रकाश गौड़ का पूरा साम्राज्य बचा रह सकता था। बैंकों से अनाप-शनाप ढंग से लोन लेना भी जयप्रकाश गौड़ की कंपनी के लिए बेहद घातक साबित हुआ।ऊपर से जयप्रकाश गौड़ के बेटों तथा बेटियों में ‘‘सुपर” बनने की लड़ाई ने भी जयप्रकाश गौड़ के साम्राज्य को डुबाने में पूरी भूमिका निभाई। कुल मिलाकर राजनीतिक संरक्षण के अभाव में जयप्रकाश गौड़ का अच्छा-खासा फलता-फूलताहुआ साम्राज्य डूब गया।
जयप्रकाश गौड़ के परिवार के भविष्य को लेकर अनेक चर्चाएं चल रही हैं। ज्यादातर विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स बिक जाने के बाद जयप्रकाश गौड़ के परिवार का भविष्य अंधकार में है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि जयप्रकाश गौड़ का परिवार एक बार फिर से कम बैक करने का भरपूर प्रयास करेगा। हमारी नजर जयप्रकाश गौड़ के JP समूह पर बनी हुई है। हम आपको अपडेट करते रहेंगे।