ग्रेटर नोएडा में एक मंच पर जुटी अनेक हस्तियां, किया चिंतन
Greater Noida News
भारत
चेतना मंच
17 Jun 2024 06:02 PM
Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा शहर विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों के मामले में अग्रणी हो रहा है। इसी कड़ी में ग्रेटर नोएडा में राष्ट्र चिंतन नामक संगठन का खास आयोजन हुआ। ग्रेटर नोएडा के जीएनआईओटी कॉलेज में आयोजित राष्ट्र चिंतन की गोष्ठी में अनेक बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। ग्रेटर नोएडा समेत देश भर के अनेक चिंतकों ने गोष्ठी में राष्ट्र के सम्पूर्ण विकास पर चिंतन तथा मनन किया।
राष्ट्र चिंतन की 16वीं गोष्ठी सम्पन्न
राष्ट्र चिंतन संस्था के सह मीडिया प्रभारी बी.एस. अवाना ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में राष्ट्र चिंतन की 16वीं गोष्ठी का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा में स्थित जीएनआईओटी के सभागार में
प्रबुद्ध नागरिकों के मंच राष्ट्रचिंतना की 16वीं गोष्ठी का आयोजन "प्रकृति केंद्रित विकास" विषय पर आयोजित किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में राष्टï्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक श्री के एन गोविंदाचार्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रचिंतन के अध्य्क्ष प्रो बी एस राजपूत, राष्ट्रचिंतन के सचिव अजेय कुमार गुप्ता अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय, कार्यक्रम संयोजक श्री नरेश गुप्ता जी, कृष्णानंद सागर जी ने गणमान्य अतिथियों श्रीमान गोविंदाचार्य जी और गोस्वामी सुशील जी महाराज एवम् भारत विकास परिषद के प्रांत अध्यक्ष श्री एन के शर्मा जी का पटका पहनाकर स्वागत किया। प्रोफेसर विवेक कुमार, हैड एमिटी प्रौद्योगिकी संस्थान ने गोष्ठी का संचालन किया। माननीय गोविंदाचार्य ने कहा कि यह देश विविधता वाला देश है। व्यक्ति से बड़ा समाज, समाज से बड़ा देश है। जल, जंगल, जमीन यदि नहीं रहे तो हम भी नहीं रहेंगें। हमें सरहद, समाज और संस्कृति सभी को बचाना है। पिछले पांच सौ वर्षों के विकास के प्रयास, छद्म प्रयास हैं।
उन्नति, सतत विकास और शांति, तीनों होने चाहिए। हमारे यहां कृषि पंचांग नष्ट हुआ है। प्रकृति ने भूगोल बनाया है, मनुष्य ने इतिहास बनाया है। हमारे देश में विकेंद्रीकृत स्वदेशी विकास होना चाहिए। नए देव व नए तीर्थों की वंदना यही राम राज्य है। नजरिया बदले तो, नजर बदलें, समाज एवं सरकार दोनों सक्रिय हो तभी उन्नति संभव है। राष्ट्रचिंतन के अध्यक्ष प्रोफेसर बलवंत सिंह राजपूत ने कहा कि भारतीय जीवन पद्वति यज्ञमय पद्वति रही है और इसमें हमेशा से प्रकृति से साम्य स्थापित कर सतत विकास की परिपाटी रही है। दुनिया जिस पर्यावरण संरक्षण की बात आज कर रही है, उसका ज्ञान हमारे यहां वैदिक काल से है।
Greater Noida News