क्या ग्रेटर नोएडा की MSME इकाइयों पर बढ़ती महंगाई की मार अब कारोबार के लिए बड़ा संकट बनती जा रही है ? कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों ने औद्योगिक इकाइयों का लागत गणित किस तरह बिगाड़ दिया है ?

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में काम कर रहीं MSME इकाइयों के सामने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। क्राफ्ट पेपर, पॉलीमर, प्लास्टिक दाना, स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम सहित कई जरूरी कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतमबुद्ध नगर ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए सरकार और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। Greater Noida News
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन, गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि पिछले डेढ़ से दो महीनों में क्राफ्ट पेपर की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसके अलावा पॉलीमर, प्लास्टिक दाना, स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम सहित कई अन्य कच्चे माल भी लगातार महंगे हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई उत्पादों के दाम हर दूसरे-तीसरे दिन बढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में ग्रेटर नोएडा की औद्योगिक इकाइयों के लिए उत्पादन लागत का सही आकलन करना और ग्राहकों को समय पर कीमत बताना मुश्किल हो रहा है। Greater Noida News
IBA अध्यक्ष के मुताबिक बढ़ती कीमतों का असर कोरुगेट बॉक्स, पैकेजिंग, प्लास्टिक, पॉलीबैग, फोम, इंजीनियरिंग समेत विभिन्न MSME सेक्टर पर पड़ रहा है। उत्पादन लागत बढ़ने के साथ इन इकाइयों की कार्यशील पूंजी पर भी दबाव बढ़ रहा है। अमित कुमार उपाध्याय ने जिला प्रशासन और जिला उद्योग केंद्र से पेपर निर्माताओं, डीलरों, उद्योग संगठनों और MSME प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमतों में बार-बार हो रही बढ़ोतरी के कारणों की समीक्षा जरूरी है। यदि बाजार में कृत्रिम मूल्य वृद्धि या असंतुलन की स्थिति है तो उस पर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। Greater Noida News
MSME उद्योगों की एक बड़ी समस्या Input Tax Credit (ITC) को लेकर भी बताई गई है। अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि कई उद्योग 18 प्रतिशत GST पर कच्चा माल खरीदते हैं, जबकि तैयार उत्पाद 5 प्रतिशत GST पर बेचते हैं। इससे बड़ी राशि ITC के रूप में लंबे समय तक फंस जाती है। उन्होंने कहा कि छोटी और सूक्ष्म औद्योगिक इकाइयों के पास कार्यशील पूंजी सीमित होती है। ऐसे में ITC की राशि अटकने और कच्चे माल की कीमत बढ़ने से नकदी प्रवाह पर दोहरी मार पड़ रही है। IBA अध्यक्ष ने कहा कि कई MSME इकाइयां अपने पुराने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए बढ़ी हुई लागत के बावजूद घाटे में उत्पादन करने को मजबूर हैं। यदि कच्चे माल की कीमतों में लगातार इसी तरह वृद्धि होती रही तो कई छोटी औद्योगिक इकाइयों के सामने कारोबार बंद करने का संकट पैदा हो सकता है। इससे रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है। Greater Noida News
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और जिला उद्योग केंद्र से ITC रिफंड की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की है। संगठन ने लंबित रिफंड के निस्तारण के लिए विशेष शिविर लगाने, MSME इकाइयों को राहत पैकेज देने, ब्याज अनुदान और कार्यशील पूंजी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की है। अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि MSME उद्योग केवल कारोबार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने वाली औद्योगिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और कार्यशील पूंजी के संकट को देखते हुए सरकार एवं प्रशासन को समय रहते ठोस कदम उठाने की जरूरत है। Greater Noida News
विज्ञापन