न्यू नोएडा परियोजना में जमीन अधिग्रहण की तैयारी तेज। 281 किसानों ने दी सहमति, पहले चरण में 2027 तक 3,165 हेक्टेयर जमीन लेने का लक्ष्य। जानिए मुआवजे और विकसित भूखंड की पूरी जानकारी।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी के बाद अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक नए और आधुनिक शहर न्यू नोएडा को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (DNGIR) के नाम से विकसित होने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारियां तेज हो गई हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 281 किसानों ने आपसी सहमति से अपनी जमीन देने के लिए सहमति पत्र जमा कराए हैं। नोएडा प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण की दरें तय कर ली हैं और अब प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है।
चेतना मंच पर न्यू नोएडा परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को लगातार प्रमुखता से उठाया जाता रहा है। अब जमीन अधिग्रहण की ताजा जानकारी सामने आने के बाद यह परियोजना एक नए चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। हालांकि, किसानों की सहमति मिलने और अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने में अंतर है। परियोजना की वास्तविक रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीन हस्तांतरण, मुआवजे और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं को कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।
न्यू नोएडा परियोजना के लिए किसानों की सहमति जुटाने के उद्देश्य से प्राधिकरण के अधिकारियों ने गांवों के किसानों और ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें की हैं। इन बैठकों में जमीन लेने की प्रक्रिया, मुआवजे और विकसित भूखंड दिए जाने की व्यवस्था को लेकर चर्चा की गई। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 281 किसानों ने आपसी सहमति के आधार पर जमीन देने के लिए अपने सहमति पत्र जमा किए हैं। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्ण करुणेश ने परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी बड़े नए शहर को बसाने के लिए सबसे पहले पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराना जरूरी होता है। किसानों के साथ सहमति बनना इस दिशा में अहम कदम है, लेकिन पूरी जमीन का अधिग्रहण होने और विकास कार्य शुरू होने में अभी कई चरण पूरे करने होंगे।
न्यू नोएडा को दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र यानी DNGIR के रूप में विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित शहर का विस्तार गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर जिले के दादरी क्षेत्र के आसपास के गांवों में होना है। विभिन्न प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, योजना में कुल 80 गांव शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य केवल आवासीय कॉलोनियां बसाना नहीं, बल्कि औद्योगिक विकास, रोजगार, व्यावसायिक गतिविधियों और आधुनिक शहरी सुविधाओं को एक साथ विकसित करना है। इसकी योजना चार चरणों में बनाई गई है, जिसमें 2041 तक विकास के विभिन्न लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। न्यू नोएडा को आधुनिक नियोजन, बेहतर सड़क संपर्क, औद्योगिक निवेश और सुनियोजित शहरी सुविधाओं के आधार पर विकसित करने की परिकल्पना है। यदि योजना निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी और बुलंदशहर के आसपास के क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।
न्यू नोएडा परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण एक साथ पूरा करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करने की योजना है। ताजा रिपोर्टों में दिए गए चरणवार लक्ष्य इस प्रकार हैं।
पहले चरण में 3,165 हेक्टेयर जमीन लेने का लक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी चरण में जमीन उपलब्ध होने के आधार पर आगे के औद्योगिक और शहरी विकास की दिशा स्पष्ट होगी।
न्यू नोएडा परियोजना में किसानों के लिए मुआवजे की दर और विकसित भूखंड का लाभ सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पहले दो चरणों में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की दरों के आधार पर मुआवजा और अधिग्रहित जमीन के बदले 6 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की व्यवस्था बताई गई है। तीसरे और चौथे चरण में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की दरों के आधार पर मुआवजे तथा 7 प्रतिशत विकसित भूखंड का प्रावधान बताया गया है।
अक्टूबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, न्यू नोएडा के पहले चरण में गौतमबुद्ध नगर और बुलंदशहर के 37 गांवों की लगभग 3,165 हेक्टेयर जमीन लेने की तैयारी की जा रही है। इनमें बुलंदशहर के 24 और गौतमबुद्ध नगर के 13 गांव शामिल बताए गए हैं। प्राधिकरण की ओर से जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, खसरा-खतौनी और सर्वे संबंधी काम भी किए जा रहे हैं। जमीन अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त वर्क सर्किल बनाने की जानकारी भी सामने आई है, ताकि प्रशासनिक कार्यों और भूमि संबंधी प्रक्रिया को गति दी जा सके। पहले चरण में जिस क्षेत्र में जमीन उपलब्ध होगी, वहां विकास की शुरुआत होने की संभावना है। हालांकि, किसी खास गांव में औद्योगिक सेक्टर या अन्य निर्माण कार्य कब शुरू होगा, यह जमीन हस्तांतरण, योजना की स्वीकृति और विकास संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा।
न्यू नोएडा की स्थापना का असर केवल प्रस्तावित शहर तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इसका प्रभाव आसपास के औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा ने पिछले कुछ दशकों में औद्योगिक विकास, आवासीय परियोजनाओं और शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। यमुना सिटी और Jewar Airport के आसपास विकसित हो रहे क्षेत्र ने भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं। ऐसे में न्यू नोएडा को इन शहरों के अगले बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। यदि इसके मास्टर प्लान में पर्याप्त हरित क्षेत्र, आधुनिक सीवरेज व्यवस्था, जल संरक्षण, बेहतर सार्वजनिक परिवहन, चौड़ी सड़कें और प्रदूषण नियंत्रण जैसे पहलुओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह सुनियोजित शहरी विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
न्यू नोएडा परियोजना के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जमीन अधिग्रहण को सहमति और निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने की है। 281 किसानों के सहमति पत्र जमा होने की खबर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इसके बाद जमीन के दस्तावेजों का सत्यापन, संबंधित औपचारिकताएं, भुगतान और भूमि हस्तांतरण जैसे कदम अहम होंगे। पहले चरण में 2027 तक 3,165 हेक्टेयर जमीन लेने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके बाद दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में परियोजना का विस्तार करने की योजना है। हालांकि, लक्ष्य निर्धारित होने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा शहर उसी समय तक बनकर तैयार हो जाएगा। आने वाले महीनों में किसानों की सहमति की संख्या, अधिग्रहण की वास्तविक प्रगति, मुआवजे के भुगतान और विकास योजनाओं पर होने वाले निर्णय इस परियोजना की दिशा तय करेंगे।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी और आसपास के क्षेत्रों के विकास से जुड़ी यह परियोजना स्थानीय निवासियों, किसानों, कारोबारियों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है। जमीन अधिग्रहण की ताजा प्रगति ने इस बात को फिर चर्चा में ला दिया है कि न्यू नोएडा का विकास किस रफ्तार से आगे बढ़ेगा और इसका लाभ स्थानीय लोगों तक कैसे पहुंचेगा। चेतना मंच इस परियोजना से जुड़े घटनाक्रमों में किसानों के मुआवजे, विकसित भूखंड की व्यवस्था, गांवों में जमीन अधिग्रहण और नए शहर की विकास योजनाओं जैसे पहलुओं पर नजर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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