जेवर एयरपोर्ट जोन में नया खतरा, निवेश पर मंडराए संकट के बादल
Greater Noida News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:53 AM
Greater Noida News : जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों और रियल एस्टेट निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने जेवर एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे में निर्माण को लेकर नई गाइडलाइंस लागू कर दी हैं। इन नियमों में ऊंचाई, निर्माण अनुमति और तकनीकी उपकरणों के उपयोग को लेकर सख्ती बरती गई है। इन नए प्रावधानों का सबसे ज्यादा असर उन निवेशकों और बिल्डरों पर पड़ सकता है, जिन्होंने मुनाफे की उम्मीद में यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर क्षेत्र में भारी पूंजी निवेश किया था।
क्या हैं नए नियम?
नए नियम के अनुसार, 4 KM दायरे में 6 मंजिल से ऊंची इमारतों के निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। मोबाइल टावर लगाने की भी अनुमति नहीं दी जाएगी। 10 KM के भीतर बिना AAI की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के कोई भी निर्माण कार्य प्रतिबंधित रहेगा। 20 KM दायरे में किसी भी ऊंचाई वाले निर्माण, वृक्षारोपण, लेज़र उपकरण और ड्रोन के उपयोग के लिए AAI की पूर्व मंजूरी आवश्यक होगी। ड्रोन उड़ाने और लेज़र उत्सर्जक उपकरणों के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
आम लोगों और निवेशकों पर असर
इन नियमों का असर सीधे तौर पर उन लोगों पर पड़ेगा जो अपने मकानों का विस्तार करना चाहते हैं, कृषि भूमि को रिहायशी प्रोजेक्ट में तब्दील कर रहे हैं, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश कर चुके हैं, स्थानीय निवासियों को अब हर निर्माण से पहले AAI से मंजूरी लेनी होगी, जो एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया मानी जाती है। इससे निजी निर्माण में देरी के साथ-साथ कानूनी पेचीदगियां भी बढ़ सकती हैं। जेवर एयरपोर्ट की घोषणा के बाद से नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आस-पास की जमीनों में निवेश को बूम मिला था। 2018 के बाद प्लॉट्स की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई। मार्केट रेट अब ₹80,000 से ₹95,000 प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच चुका है। जबकि यमुना अथॉरिटी का रेट अभी भी लगभग ₹34,000 प्रति वर्ग मीटर है। इनमें से कई प्रोजेक्ट्स बिना NOC के शुरू हो चुके हैं। अब इन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। यदि कोई निर्माण अवैध पाया जाता है या ढहाया जाता है, तो इससे निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट्स में देरी और असमंजस
NOC प्रक्रिया में देरी से प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी डेट प्रभावित हो सकती है। लागत बढ़ेगी, जिससे खरीदारों का मुनाफा घटेगा। कई निवेशक जिनके पैसे फंसे हैं, वो अब कानूनी दांव-पेंच और अनिश्चितता के दौर में हैं। इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिन लोगों ने जमीन खरीदी है या अपार्टमेंट बुक कराया है, उनका पैसा सुरक्षित है? नियमों की सख्ती से जहां कुछ हद तक हवाई सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं इससे निवेश का माहौल प्रभावित हो सकता है। खासकर वे निवेशक जो जेवर को भविष्य का 'गोल्डन ज़ोन' मानकर यहां पैसे लगा चुके हैं, उनकी उम्मीदें फिलहाल धुंधली दिख रही हैं।