
Noida News /ग्रेटर नोएडा। 'भगवान के घर देर है किन्तु अंधेर नहीं' तथा 'बहुत देर से मिला है भारत में न्याय' ये दोनों ही कहावत 4 वर्षीय मासूम बच्चे रितिक के ऊपर सटीक बैठ रही है। इस मासूम बच्चे को पूरे साढ़े तीन साल बाद न्याय मिला है। गौतमबुद्धनगर की जिला अदालत ने यह न्याय किया है। बच्चे के परिवार जनों ने अदालत के फैसले पर संतोष व्यक्त किया है।
गौतमबुद्धनगर जिले की कचहरी में तैनात शासकीय अधिवक्ता ब्रह्मजीत भाटी ने बताया कि मूलरूप से बिहार के सहरसा निवासी ब्रह्मदत्त गुलिस्तानपुर में किराये पर कमरा लेकर रहते थे। 24 जनवरी 2021 को घर से बाहर उनके छोटे बेटे रितिक को अगवा कर लिया गया। शिकायत पर पुलिस केस दर्ज कर बच्चे की तलाश में जुट गई। जांच में पुलिस को पता चला कि करीब एक माह पहले ब्रह्मदत्त के पड़ोस में रहने आए। जिला कन्नौज गांव उत्तर निवासी अनिल और विजय वारदात के बाद से लापता हैं। शक होने पर वारदात के 21 दिन बाद पुलिस ने अनिल को गिरफ्तार किया।
अनिल ने पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया। अनिल की निशानदेही पर पुलिस ने औद्योगिक क्षेत्र साइड बी स्थित कंपनी के पीछे दलदल से बच्चे का क्षतविक्षत शव बरामद किया। कपड़े, जूते आदि से परिजनों ने बच्चे की शिनाख्त की। इसके बाद अनिल के साथी विजय को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस दोनों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। जिला न्यायालय ने केस की सुनवाई की और गवाहों के बयान सुनकर अनिल और विजय को दोषी मानते हुए शुक्रवार को उम्रकैद का सजा सुना दी।
पुलिस अनिल को लेकर जिला अस्पताल मेडिकल परीक्षण के लिए लेकर पहुंची थी। लघुशंका के बहाने अनिल फरार हो गया था। आरोपी अस्पताल की फॉल्स सीलिंग में छुप गया था। पुलिस ने सर्च अभियान चलाकर छह घंटे बाद आरोपी को दबोच लिया था। मासूम के अपहरण के हत्यारोपी के कस्टडी से फरार होने पर महकमे में हड़कंप मच गया था।
बताया जाता है कि बालक का पिता ब्रह्मजीत छोटा मोटा व्यापार कर परिवार का गुजारा करता है। ब्रह्मजीत का बड़ा बेटा थैलिसीमिया बीमारी से पीड़ित है। आमतौर पर हर 29 दिन में उसका खून बदला जाता है। ब्रह्मजीत को बड़े बेटे के उपचार के लिए और व्यापार में लगाने के लिए रुपयों की आवश्यकता थी। इसके चलते वह लोन लेने का प्रयास कर रहा था। उसे फोन पर बात करते हुए अनिल और विजय ने सुन लिया था। दोनों ने दो लाख रुपये की फिरौती के लिए छोटे बेटे का अपहरण कर लिया था। Noida News