
Noida News : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर चल रहा किसानों का धरना शनिवार की देर शाम समाप्त हो गया। चेतना मंच ने पहले ही आशंका व्यक्त की थी कि इस धरने को तुड़वाने के लिए 'सरकारी दूत' सक्रिय हैं और किसी भी समय धरना बिना नतीजे के हट सकता है। हुआ भी ठीक ऐसा ही। शविार की देर शाम राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर ने ग्रेटर नोएडा के एसीओ आनंद वर्धन का लिखा हुआ एक पत्र किसान नेताओं को सौंपा और 60 दिन से रात दिन चल रहा किसानों का धरना समाप्त हो गया। किसानों को मिला बस एक ''झुनझुना''
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीओ आनंद वर्धन की तरफ से लिखा जो पत्र किसान नेताओं को सौंपा गया है, उसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के औ़द्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल नंदी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति किसानों के सारे मामले निपटाएगी। कमेटी के अध्यक्ष औद्योगिक विकास मंत्री होंगे। साथ ही कमेटी में प्राधिकरण के चेयरमैन व प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास मनोज कुमार सिंह, प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, राज्य सभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर, गौतमबुद्धनगर के सांसद डा. महेश शर्मा, दादरी के विधायक तेजपाल सिंह नागर, जेवर के विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह शामिल होंगे। यह कमेटी किसानों के मसलों पर विचार करके उनका समाधान सुझाएगी।
इस पत्र के हाथ में आने के बाद किसान नेताओं में मंत्रणा हुुई। 6 जून से जेल में बंद किसान नेता पहले ही काफी टूट चुके थे। उन्होंने वार्ता करके घोषणा कर दी कि हम अपना धरना 15 जुलाई तक के लिए स्थगित कर रहे हैं। 15 जुलाई तक यदि हमारी मांगे नहीं मानी गई तो दुबारा धरना शुरू करेंगे। यह अलग बात है कि धरना शुरू करते समय इन्हीं नेताओं ने बार बार घोषणा की थी कि इस बार का आंदोलन आरपार का होगा। किसी भी कीमत पर किसान खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे। अब लोग पूछ रहे हैं कि एक चिट्ठी जो झुनझुने से अधिक कुछ भी नहीं है के बलबुते पर आंदोलन वापस लेने की क्या मजबूरी थी ?
किसानों का धरना तुड़वाने के लिए 'सरकारी दूत' पिछले कई दिनों से प्रयास कर रहे थे। बीच में किसान इस बात पर सहमत भी नजर आ रहे थे कि जो हाईपॉवर कमेटी बनाई जानी है, उसे बनाने वाले पत्र पर नोएडा प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रीतू माहेश्वरी खुद हस्ताक्षर करके किसानों को सौंप दे तो किसान वापस चले जाएंगे। श्रीमती रितु माहेश्वरी इस बात के लिए तैयार नहीं हुई। उन्होंने कहा कि नीचे के अधिकारी ही साइन करेंगे। कई दिनों से इसी बात पर पेंच फंसा हुआ था। अब शासन व प्रशासन पर यह दबाव था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को जिले में आ रहे हैं, ऐसे में किसानों का धरना गलत संदेश देगा इसलिए किसी भी कीमत पर इस धरने को समाप्त कराना है। यही कारण रहा कि सरकार के दूत किसान नेताओं को पटाने में कामयाब हो गए और जो नेता दावा कर रहे थे कि खाली हाथ वापस नहीं जाएंगे वे बस एक चिट्ठीनुमा झुनझुना लेकर खुशी खुशी अपने घर वापस चले गए।
तर्क यह दिया गया कि किसानों की मांगे शासन स्तर की हैं, इसलिए शासन स्तर पर ही उनका निपटारा होगा। लोग कह रहे हैं कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा एवं यमुना विकास प्राधिकरण के बोर्ड के पास ही सारी शक्ति निहित है। बोर्ड में प्रस्ताव पास कराकर ही यहां सारे फैसले होते हैं। यदि प्राधिकरण व सरकार गंभीर होती तो बोर्ड की बैठक करके किसानों की सारी मांगे पूरी की जा सकती थी। किसानों की सभी मांगे जायज हैं, इस बात से कोई मना नहीं कर रहा है। फिर भी कमेटी बनाने का एक झुनझुना भर लेकर किसानों का इतना बड़ा आंदोलन वापस हो जाना पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अनेक प्रकार की चर्चाओं के बीच 'सेटिंग गेटिंग' के आरोप भी लग रहे हैं।
किसान सभा के नेता व इस आंदोलन के अगुवा रहे डा. रुपेश वर्मा ने चेतना मंच से बात करते हुए कहा कि किसानों ने अपना धरना समाप्त नहीं किया है, बल्कि धरना स्थगित किया है। उन्हें दिए गए आश्वासन के आधार पर यदि कार्यवाही नहीं हुई तो 15 जुलाई से और अधिक शक्ति के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस आंदोलन की तैयारी के लिए गांव गांव सभाएं की जाएगी। पंचायतें भी होंगी। इन सभाओं व पंचायतों में उनक तमाम नेताओं व संगठनों का आभार व्यक्त किया जाएगा, जिन्होंने इस आंदोलन में सहयोग दिया है। उन्होंने बताया कि उनके आंदोलन को समाजवादी पार्टी के नेताओं खासतौर से विधायक अतुल प्रधान, आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद, महासचिव रविंद्र भाटी, लोकदल के नेता जर्नादन भाटी, लोकदल के विधायक मदन भैया, विधायक चंदन चौहान, कांग्रेस के नेता अजय चौधरी तथा किसान यूनियनों के सभी गुटों ने आंदोलन को व्यापक समर्थन दिया है। हम इन सभी संगठनों एवं नेताओं का आभार व्यक्त करते हैं। श्री वर्मा ने जोर देकर कहा कि किसानों की मांगे पूरी होने तक वें शांति से नहीं बैठेंगे। Noida News