
Noida News / ग्रेटर नोएडा। अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर आंदोलन करते आ रहे किसानों ने एक फिर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ हुंकार भरी है। किसानों ने एक बार फिर से जोरदार आंदोलन की रणभेरी बजाई है। जिसके तहत ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसानों ने ग्रेटर नोएडा कार्यालय का घेराव करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने प्राधिकरण कार्यालय के बाहर महापंचायत शुरू कर दी।
इस महापंचायत में बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं। किसानों का आरोप है कि बीते 24 जून को हुए समझौते को प्राधिकरण व प्रशासन लागू नहीं कर रहा है और न ही किसानों की समस्याओं के निस्तारण के लिए हाईपॉवर कमेटी का गठन किया गया है।
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आपको बता दें कि बीते 25 जून को मुख्यमंत्री योगी के गौतमबु़द्धनगर के दौरे से पहले किसानों को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी मांगों को लेकर हाई पॉवर कमेटी का गठन किया जाएगा। इस आश्वासन के बाद 61 दिनों तक चले किसान आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था। लेकिन बाद में शासन ने किसी भी तरह की हाई पॉवर कमेटी के गठन से इंकार कर दिया था। जिसके बाद किसान सभा ने एक बार फिर प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान किया था। मंगलवार की दोपहर बड़ी संख्या में किसान प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचे और प्राधिकरण अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन कर धरने पर बैठ गए।
किसान नेता डा. रूपेश वर्मा, वीर सिंह नागर व अन्य के नेतृत्व में किसानों ने महापंचायत शुरू कर दी है। इस दौरान रिंकू प्रधान, रोहित गुर्जर, अमन टाईगर, भूपेन्द्र नागर, जितेद्र नागर सहित बड़ी संख्या में महिलाएं बुजुर्ग व युवा मौजूद रहे। खबर लिखे जाने तक किसान प्राधिकरण पर जमे हुए थे।
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किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण कार्यालय के बाहर एक ओर जहां किसान नारेबाजी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के लिहाज से भारी मात्रा में पुलिस फोर्स भी तैनात की गई है। जानकारी के अनुसार यहां पर कई थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया हैं।
आपको बता दें कि इससे पहले ग्रेटर नोएडा प्रधिकारण के खिलाफ दो महीने तक आंदोलन चला था। आंदोलन कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच 24 जून 2023 को समझौता हो गया था। इसके साथ ही यह आंदोलन 15 जुलाई तक स्थगित कर दिया गया था।
लिखित समझौते के मुताबिक 18 दिनों तक जेल में बंद 33 किसानों की रिहाई, मुकदमे वापसी और अन्य मुद्दों का जल्द समाधान करने के लिए एक हाईपावर कमेटी बनाई जानी थी। इस कमेटी में सरकार के उच्च्प्र पदस्थ अधिकारी, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी, जनप्रतिनिधियों के साथ ही साथ किसान प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना था। ये पूरा आंदोलन अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में 60 दिनों तक चला और 61वें दिन किसानों के 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट के मसले सहित अन्य मसलों पर किसानों एवं प्राधिकरण के बीच समझौता संपन्न हुआ था।
समझौते के तहत 10 प्रतिशत आबादी प्लॉट एवं अन्य सभी मसलों को नोटिफिकेशन जारी कर हाई पॉवर कमेटी का 30 जून तक शासन स्तर से गठन किया जाना था। कमेटी के अध्यक्ष औद्योगिक विकास मंत्री को बनाया जाना था। इस समझौते की घोषणा के वक्त चेतना मंच ने समाचार प्रकाशित किया था जिसमें हमने कहा था कि किसानों को समझौते के नाम पर केवल झुनझुना मिला है। किसी भी प्रकार से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 25 जून को नोएडा में होने वाले कार्यक्रम से पहले आंदोलन समाप्त कराने का प्रशासनिक मशीनरी पर प्रेशर था। इस कारण किसानों को केवल आश्वासन का झुनझुना थमाकर उस वक्त के आंदोलन को खत्म कराया गया था। इस समझौते के 10 दिन के बाद ही यह बात सामने आ गई थी कि शासन किसानों के मुद्दे पर हाईपॉवर कमेटी का गठन नहीं कर रहा है। इस पर भी चेतना मंच ने विस्तृत समाचार प्रकाशित करते हुए आपको बताया था कि किसानों को मिला आश्वासन का झुनझुना, वह भी टूटा हुआ। आश्वासन पूरा न होने के कारण किसानों ने 18 जुलाई 2023 (आज) से एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बार आंदोलन का बिगुल फुंक दिया है। Noida News
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