
Noida News : जेवर में चौधरी मेडिकेयर में एक अबोध बालक के हाथ झुलसने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग नींद से जागा है। चेतना मंच द्वारा अवैध अस्पताल को लेकर लगातार दिए गए अपडेट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अवैध अस्पतालों के खिलाफ अभियान शुरू किया है। विभाग की ओर से गौतमबुद्धनगर के डेढ सौ से ज्यादा अवैध अस्पताल और क्लीनिक को चिन्हित किया और 20 अवैध अस्पतालों को नोटिस जारी किए हैं। इन अस्पतालों को 15 दिन के भीतर सभी कागजातों समेत जवाब देने को कहा गया है। 15 दिन बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले जेवर में बने अवैध अस्पताल चौधरी मेडिकेयर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक बच्चे के दोनों हाथ बुरी तरह से झुसल गए थे। एम्स अस्पताल में डाक्टरों को इस बच्चे के दोनों हाथ काटने पड़े थे। इस समाचार को चेतना मंच ने प्रमुखता से प्रकाशित करने के साथ ही इस अवैध अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग की खामियों को उजागर किया था। जिसके बाद डीएम के आदेश पर उक्त अस्पताल को सील कर दिया गया।
जिला स्वास्थ्य विभाग के उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंदन सोनी के अनुसार, बिना पंजीकरण के चल रहे अस्पताल और क्लीनिकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अब तक 20 नोटिस जारी हो गए हैं, एक सप्ताह में अन्य 150 को भी नोटिस भेज दिए जाएंगे। नोटिस के माध्यम से रजिस्ट्रेशन नहीं कराने की वजह पूछी गई है। जिनके आवेदन रद्द हुए हैं उनसे पूछा गया है कि कब तक खामियां सुधार ली जाएंगी। नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं होने और रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर इन अस्पतालों और क्लीनिकों को अवैध मानते हुए सीलिंग की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट कमेटी के चेयरमैन जिलाधिकारी होते हैं। तीनों प्राधिकरण के ओएसडी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, डिप्टी सीएमओ सहित 9 सदस्य इस कमेटी में होते हैं। जेवर में निजी अस्पताल में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है और ऐसे अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
अस्पताल, क्लीनिक खुद को पंजीकृत कराएं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोगों को न्यूनतम सुविधाएं और सेवाएं दी जा रही हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाले सभी संस्थानों के लिए जरूरी है कि मरीजों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ सिस्टम और मेडिकल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें। संस्थानों का दायित्व है कि कोई रोगी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है तो उसे वो सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं जिससे रोगी को स्टेबल किया जा सके। संस्थान सेवाओं की कीमत निर्धारित सीमाओं के भीतर तय करें और हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं में प्रदर्शित करें। Noida News