ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों के धरने में पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत ने प्राधिकरणों को खुली चेतावनी दी। किसानों की मांगों और आंदोलन को लेकर टिकैत ने कहा कि ज्यादती बर्दाश्त नहीं होगी।

Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का आंदोलन सोमवार को उस समय और गरमा गया, जब भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल राकेश टिकैत धरना स्थल पर पहुंचे। बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी के बीच टिकैत ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला और आंदोलन को मजबूती देने का संदेश दिया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर पिछले कई दिनों से किसान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन चल रहा है। किसानों ने अपनी मांगों को लेकर 14 सितंबर को महापंचायत का ऐलान किया था। इससे पहले भी किसान संगठनों की ओर से स्पष्ट किया गया था कि मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। Greater Noida News
राकेश टिकैत के ग्रेटर नोएडा पहुंचने के दौरान बड़ी संख्या में किसान धरना स्थल और आसपास के क्षेत्र में मौजूद रहे। सोशल मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो में किसानों की बड़ी भीड़, हाथों में भारतीय किसान यूनियन के झंडे और नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी दिखाई दे रहे हैं। टिकैत ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। प्राधिकरणों की मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने आंदोलनरत किसानों को एकजुट रहने और अपनी मांगों को मजबूती से उठाने का संदेश दिया। Greater Noida News
धरना स्थल पर अपने संबोधन में राकेश टिकैत ने प्राधिकरणों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की ज्यादती की गई तो किसान चुप नहीं बैठेंगे। उनके मुताबिक प्राधिकरणों की मनमानी को चलने नहीं दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो किसान आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। टिकैत के संबोधन की सबसे ज्यादा चर्चा 'ईंट से ईंट बजा देने' वाली चेतावनी को लेकर हो रही है। उनके इस बयान के बाद धरना स्थल पर किसानों में खासा जोश दिखाई दिया। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा में किसानों का मौजूदा आंदोलन मुख्य रूप से 10 प्रतिशत विकसित भूखंड, आबादी के लंबित मामलों का निस्तारण, उचित मुआवजा और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी अन्य मांगों को लेकर है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक किसान संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन को निर्णायक लड़ाई बताते हुए मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटने की बात कही है। किसानों का कहना है कि वर्षों से उनकी समस्याएं प्राधिकरण के स्तर पर लंबित हैं। ऐसे में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और जमीन पर उसका क्रियान्वयन चाहिए। Greater Noida News
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय के बाहर चल रहे धरने में लगातार बड़ी संख्या में किसान शामिल हो रहे हैं। 12 सितंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार धरना चौथे दिन भी जारी था और 14 सितंबर को प्राधिकरण के सामने महापंचायत की तैयारी की जा रही थी। अब राकेश टिकैत के धरना स्थल पर पहुंचने से आंदोलन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान आंदोलन का बड़ा समर्थन मिलने का संदेश गया है। टिकैत पहले भी ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र के किसानों से जुड़े मामलों में अपनी सक्रियता दिखा चुके हैं। हाल में जेवर क्षेत्र के दयानतपुर गांव के किसानों ने भी 7 प्रतिशत आवासीय भूखंड और 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के संबंध में टिकैत से संपर्क किया था। Greater Noida News
राकेश टिकैत के ग्रेटर नोएडा पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी और सड़क पर दिखाई दे रही भीड़ को किसान आंदोलन के बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा रहा है। धरना स्थल पर किसानों के हाथों में झंडे और बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी इस बात का संकेत दे रही है कि प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन अब और बड़ा रूप ले सकता है। Greater Noida News
राकेश टिकैत के पहुंचने के बाद किसानों की रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। किसान संगठनों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों पर ठोस निर्णय चाहते हैं। ऐसे में अब निगाहें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत तथा आंदोलन की आगामी रणनीति पर टिकी हैं। किसानों के बीच टिकैत का संदेश साफ है एकजुट रहिए, अपनी मांगों से पीछे मत हटिए और प्राधिकरण की मनमानी को स्वीकार मत कीजिए। ग्रेटर नोएडा में किसान आंदोलन के मौजूदा घटनाक्रम ने एक बार फिर किसान बनाम प्राधिकरण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, यह प्राधिकरण की ओर से होने वाली कार्रवाई और किसानों की अगली रणनीति पर निर्भर करेगा। Greater Noida News
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