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ग्रेटर नोएडा के डॉक्टर रमेश वर्मा (अधिकारी केन्द्रीय चिकत्सा CGHS) के अनुसार सरकोपेनिया 50 की उम्र के बाद लगभग 10% लोगों पर प्रभाव डाल ही देता है। होता यूं है कि इस आयु के बाद लोगों में लगभग 3% मसल्स स्ट्रैंथ कम होने लगती है। यह स्थिति ही सरकोपेनिया है। इसका कारण है मसल्स ग्रोथ के सिग्नल और टियर्डाउन सिगनल्स के बीच इमबैलेंस होना। मसल्स में कमी आने के कारण व्यक्ति की स्ट्रेंथ कम होने लगती है। इसके साथ ही बैलेंस करने की क्षमता भी कम होती जाती है। सरकोपेनिया की वजह से ही इंसान अपनी हर रोज करने वाली गतिविधियों को करने से भी थोड़ा जी सा चुराने लगता है। जैसे सीढ़ियां चढ़ना, किसी चीज को उठाना, यहां तक कि लोग तो पैदल चलना भी छोड देते हैं। वैसे हेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट से इससे बचा भी जा सकता है। भाग भाग कर नहीं तो धीरे-2 ही सही पर सीढ़ियाँ चढ़ें। छोड़ें नहीं । इंटरनेशनल ओस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के अनुसार यह 60 और 70 की उम्र के बाद और तेजी से होने लगता है। क्योंकि मसल्स फाइबर में कमी और मसल्स साइज में कमी यह दोनों ही मसल्स मास में कमी का कारण बनते हैं। कम और छोटे मसल्स फाइबर की कॉम्बिनेशन से ही मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं ।