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महाराष्ट्र पुलिस ने एक ऐसे कथित ठग को गिरफ्तार किया है, जिस पर अलग-अलग राज्यों में वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए महिलाओं को झांसा देकर शादी करने और फिर करोड़ों रुपये की ठगी करने के गंभीर आरोप हैं।

Greater Noida News : महाराष्ट्र पुलिस ने एक ऐसे कथित ठग को गिरफ्तार किया है, जिस पर अलग-अलग राज्यों में वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए महिलाओं को झांसा देकर शादी करने और फिर करोड़ों रुपये की ठगी करने के गंभीर आरोप हैं। आरोपी की पहचान सीतापुर निवासी अनुज त्रिवेदी के रूप में हुई है, जिसे ग्रेटर नोएडा से पकड़ा गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक वह अब तक कम से कम 25 महिलाओं को अपने जाल में फंसा चुका था। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब जांच के दौरान उसके कथित संबंध एक राजनीतिक परिवार से जुड़े होने की चर्चा सामने आई। हालांकि पुलिस ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इसकी जांच अलग एंगल से की जा रही है।
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पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अलग-अलग नाम और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर महिलाओं को निशाना बना रहा था। वह मैट्रिमोनियल साइट्स और वैवाहिक विज्ञापनों के जरिए संपर्क करता था और फिर भरोसा जीतकर शादी करता था।
इन पीड़ितों में कई महिलाएं दिव्यांग, तलाकशुदा या आर्थिक-सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से थीं। शादी के बाद वह धीरे-धीरे संपत्ति और पैसे हड़पने की रणनीति अपनाता था।
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इस पूरे मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में ठाणे से हुई, जब 75 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि आरोपी ने उनकी 45 वर्षीय बेटी से संपर्क कर 2019 में शादी की। शादी के बाद उसने परिवार को मकान बेचकर नया घर बनाने का भरोसा दिलाया और इसी बहाने करीब 82 लाख रुपये हड़प लिए। बाद में फरवरी 2022 में वह महिला को दिल्ली ले गया और एक शादी समारोह में शामिल होने का बहाना बनाकर 33 तोला सोना लेकर फरार हो गया। इस तरह कुल मिलाकर करीब 97 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज किया गया।
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पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक ही पहचान पर नहीं रुका। उसने अजय अग्रवाल, संतोष सिंह, जयप्रकाश और रमेश चंद्र गुप्ता जैसे कई फर्जी नामों का इस्तेमाल किया। गिरफ्तारी के समय वह चंद्रप्रकाश त्रिवेदी के नाम से ग्रेटर नोएडा में रह रहा था। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड, मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे नेटवर्क में उसके परिवार के सदस्य या अन्य सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं।
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स्थानीय जानकारी के अनुसार, अनुज त्रिवेदी का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था। करीब ढाई दशक पहले वह लखनऊ में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम करता था। बाद में उसने सिक्योरिटी एजेंसी और प्रॉपर्टी कारोबार में कदम रखा और कुछ ही वर्षों में कथित तौर पर बड़ी संपत्ति खड़ी कर ली। लखनऊ में कोठी, नैमिषारण्य में मकान और गांव में स्कूल तक स्थापित करने की बात सामने आई है।
महाराष्ट्र पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी से अर्जित रकम कहां-कहां निवेश की गई और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही उसके कथित राजनीतिक संबंधों की भी गहन जांच की जा रही है। यह मामला सिर्फ एक ठगी का नहीं, बल्कि पहचान बदलकर वर्षों तक चलाए गए एक संगठित जाल का संकेत देता है, जिसने कई परिवारों को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर नुकसान पहुंचाया है।
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