
Greater Noida News : सामाजिक कार्यकर्ता कर्मवीर नागर प्रमुख ने एक अहम माँग उठाई है। उनका कहना है कि ग्रेटर नोएडा के शहरी क्षेत्र और गांवों में एलईडी लाइट्स लगाकर रोशनी से चकाचौंध करने के लिए सूर्या नामक कंपनी को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा बहुत बड़ा टेंडर दिया गया है। स्ट्रीट लाइट्स लगाने वाली कंपनी के पास ही मेंटेनेंस का भी ठेका है। लेकिन लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व गांवों में लगाई गई स्ट्रीट लाइट्स अधिकतर खराब पड़ी रहती हैं, जबकि शहरी सेक्टर्स में स्ट्रीट लाइट्स बहुत कम खराब होती हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि गांवों में घटिया क्वालिटी की स्ट्रीट लाइट्स लगाई गई हैं।
श्री नागर के मुताबिक़ प्रत्येक गांव में किसी भी तरह की शिकायत के लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हुए हैं। इस ग्रुप पर प्राधिकरण के अधिकारी और गांव के लोग जुड़े हुए हैं। ऐसा ही एक व्हाट्सएप ग्रुप ग्राम मिलक लच्छी के लिए भी बना हुआ है। सलिल यादव महाप्रबंधक के तबादला होने के बाद अब इस ग्रुप पर डाली गई शिकायतों का वरिष्ठ अधिकारी संज्ञान तक नहीं लेते हैं।
इसका जीवंत उदाहरण ग्राम मिलक लच्छी के ग्रुप पर नोएडा प्राधिकरण में तैनात इलेक्ट्रिक मेंटेनेंस विभाग के अधिकारी गुरविंदर सिंह को संबोधित करते हुए डाली गई शिकायत है। गुरविंदर सिंह नामक इस अधिकारी द्वारा शिकायत का संज्ञान लेने और उसका रिस्पांस करने तक की जहमत नहीं उठाई गई। अगर यह ग्रुप प्राधिकरण के उच्च अधिकारियों के दिशा निर्देशन में शिकायतों के निस्तारण के मकसद से बनाया गया है तो ग्रुप पर रिस्पांस न करने वाले ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस अधिकारी द्वारा शिकायत का संज्ञान न लेने और रिस्पांस न देने से ऐसे अधिकारी की सूर्या नामक कंपनी के लोगों के साथ निश्चित तौर पर कोई ना कोई भ्रष्टाचारी सांठगांठ प्रतीत होती है। ताकि कंपनी का मेंटिनेंस पर होने वाला खर्च बचाया जा सके।
श्री नागर आगे कहते हैं कि गांवों में आए दिन स्ट्रीट लाइट्स की खराबी के मद्देनजर सूर्या कंपनी द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाइट्स की क्वालिटी की भी जांच नितांत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त सूर्या कंपनी के साथ हुए अनुबंध को आम जनता की जानकारी हेतु भी प्रकाशित कराया जाना इसलिए नितांत आवश्यक है ताकि टेंडर सेवा शर्तों के अनुसार कंपनी की शिकायत की जा सके।
इस कंपनी के अब तक भुगतान हुए बिलों की भी जांच कराई जाए क्योंकि स्ट्रीट लाइट ठीक करने हेतु निश्चित तौर पर समय सुनिश्चित किया गया होगा लेकिन टेंडर सेवा शर्तों के अनुसार स्ट्रीट लाइट्स की मेंटिनेंस नहीं हो पा रही है। अगर कंपनी के गलत बिल पास किए जा रहे हैं तो उन संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किया जाना नितांत आवश्यक है जो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के राजस्व को प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर क्षति पहुंचा रहे हैं। Greater Noida News