बेहद पवित्र मिट्टी है दादरी नगर की, शामिल है शहीदों का खून
भारत
चेतना मंच
08 Aug 2025 04:26 PM
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का दादरी नगर एक ऐतिहासिक नगर है। ग्रेटर नोएडा के एक किनारे पर स्थित दादरी नगर की मिट्टी बेहद पवित्र मिट्टी है। जो भी भारतीय देश से प्रेम करता है। हर उस भारतीय के लिए दादरी की मिट्टी पवित्र है। दरअसल दादरी की मिट्टी में भारत के अनेक क्रांतिकारी शहीदों का खून मिला हुआ है। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र का दादरी नगर भारत की 1857 की क्रांति का बहुत बड़ा साक्षी रहा है। Greater Noida Samachar
अंग्रेजों की छठी का दूध याद दिला दिया था दादरी के क्रांतिकारियों ने
दादरी नगर में रहने वाले क्रांतिकारियों ने दादरी से लेकर गाजियाबाद तक की जमीन पर अंग्रेजों के साथ बहुत ही बहादुरी के साथ युद्ध लड़ा था। दादरी के शूरवीरों ने अंग्रेजों को उनकी छठी का दूध याद दिलवा दिया था। ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की दादरी तहसील में क्रांतिकारियों के नाम लिखकर शिलापट्ट स्थापित किया हुआ है। दादरी के इस शिलापट्ट को ‘क्रांतिकारी स्तम्भ’ कहा जाता है। इतिहास बताते हैं कि वर्ष-1857 की क्रांति में दादरी के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को कोट के पुल से आगे नहीं बढ़ने दिया था। अंग्रेजी सेना ने कई बार क्रांतिकारियों का दमन करने का प्रयास किया, लेकिन जोश से भरे हुए दादरी के क्रांतिवीरों के आगे अंग्रेजों की एक न चली। हर बार अंग्रेजों को मुंह की खानी पड़ी।
दादरी के क्रांतिकारियों से अंग्रेज इतनी अधिक खुन्नस खा गए थे कि उन्होंने आधी रात को दादरी रियासत पर धावा बोल कई क्रांतिकारियों की हत्या कर दी। बंधक बनाए गए क्रांतिकारियों को अगले दिन बुलंदशहर के काले आम पर एक साथ फांसी दे दी गई थी। इतिहास बताता है कि विभिन्न तिथियों में दादरी के कुल 87 क्रांतिकारियों को फांसी दी गई। फांसी पर चढ़ने वालों में दादरी रियासत के जमींदार राव रोशन सिंह, उनके बेटे बिशन सिंह व एक भतीजा राव उमराव सिंह भी शामिल थे। दादरी रियासत के मालिक कटहेरा गांव के दरगाही सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल बजा दिया था। कई बार उन्होंने अंग्रेजी सेना को उल्टे पैर भागने पर मजबूर कर दिया था। उनकी मौत के बाद उनके बेटे राव रोशन सिंह व बिशन सिंह एवं भतीजे राव उमराव सिंह ने इस लड़ाई को जारी रखा। इस बीच चिटहेरा गांव के रिंग लीडर के नाम से मशहूर फत्ता नंबरदार, लुहारली गांव के मजलिस भाटी, हिम्मत सिंह गुर्जर, मुलकी गुर्जर, करीम बख्स, कल्लू जमींदार, झंडू जमींदार, फतेह सिंह, सुलेख महावड़, हरदयाल गहलोत, कल्ला गहलोत,अहसान गुर्जर ने भी अंग्रेजी सेना के खिलाफ बिगुल बजा दिया था।
आजादी की लड़ाई में दादरी क्रांतिकारियों का गढ़ बन गया था। रोशन सिंह व उमराव सिंह ने दिल्ली के मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का सहयोग लेकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई को तेज कर दिया था। मालागढ़ के नवाब वलीदाद खां को बहादुरशाह का नजदीकी माना जाता था। राव रोशन सिंह व उमराव की वलीदाद खां के साथ गहरी दोस्ती थी। तीनों ने अपने तोपखाने के साथ 30 व 31 मई 1857 को गाजियाबाद के हरनंदी (हिंडन) नदी के पास अंग्रेज सेना को दिल्ली जाने से रोक दिया। दोनों तरफ से जमकर लड़ाई लड़ी गई। क्रांतिकारियों के जोश को देख अंग्रेजी सेना को पीछे हटना पड़ा। हालांकि इस लड़ाई में अंग्रेजी सेना के साथ कई क्रांतिकारी भी शहीद हुए थे। उनकी कब्रें हरनंदी के पास बनी हुई हैं। इसके बाद क्रांतिकारियों ने सिकंदराबाद के पास अंग्रेजों का खजाना लूट लिया। गुलावटी के पास दो दर्जन अंग्रेज सिपाहियों को क्रांतिकारियों को मौत के घाट उतारकर उनके 90 घोड़े छीन लिए थे।
दादरी के इतिहास को जीवंत कराने का प्रयास
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के दादरी नगर में सक्रिय जय हो नामक सामाजिक संगठन दादरी के क्रांति के इतिहास को जीवंत बनाने के प्रयास में लगा हुआ है। नीचे दिए गए लिंक को खोलकर आप दादरी के इतिहास को जीवंत बनाने के अभियान के साथ जुड़ सकते हैं। Greater Noida Samachar