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जी-20 सम्मलेन मे शिरकत करने आये विदेशी मेहमानों को इस मीनाकारी कलाकृति को भेंट कर खूब तारीफ बटोरी थी। गुलाबी मीनाकारी के संरक्षक कुंज बिहारी सिंह जो गुलाबी मीनाकारी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं और उन्होंने इस कला को फैलाने के लिए कई देशों की यात्रा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कला के मुरीद है ।
कहा जाता है यह कला ईरान में उत्पन्न हुई और मुगल काल में इस को भारतीय उपमहाद्वीप में लाया गया, तामचीनी और कीमती धातु की इस कला को जीआई टैग 2015 में मिला था।शिल्पकार ने बताया, "कला भले ही फारस (ईरान) से आई हो, लेकिन बनारस (वाराणसी) के लोगों ने इसे अपना बना कर इसे प्रसिद्ध बना दिया है।"
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एक वक्त था जब हाथियों, घोड़ों, मोर आदि की आकृतियों के साथ मीनाकारी में सोने चांदी के आभूषणों को भी अलंकृत किया जाता था। अब भारतीय देवताओं की मूर्तियों को भी चमकीले नीले, हरे, पीले और लाल रंग में उम्दा मीनाकारी का काम होता है।
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वाराणसी मे गंगा किनारे रह्ने वाले बहुत सारे लोगो के लिये यह रोजी-रोटी का मुख्य स्रोत है । इस शिल्पकला के कद्रदान कम होने के कारण इसके कुशल कारीगरों की संख्या कम होने लगी थी। 2007 और 2014 के बीच शिल्प लगभग गायब हो गया था, क्योंकि कारीगरों के लिए कोई सरकारी प्रोत्साहन नहीं था। वर्ष 2015 मे जीआई टैग मिलने से इस कला की संजीवनी मिली और अब इसके कद्रदान बढ़ते जा रहें है ।
कारीगर सोने और चांदी पर आकृतियां उकेर कर सजावटी सामान मोर,हाथी,गणेश जी,मैजिक बर्ड्स इसके साथ झुमका कड़ा और हंसली,चांद बाली गले का सेट समेत और भी कई सामान बनाते है । UP International Trade Show मे भी यह कलाकृति लोगों को आकर्षित कर रही है । शुक्रवार को इस स्टाल पर खासी भीड़ रही और लोगो ने इसके ऑर्डर भी दियें ।
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