उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 के अंतिम दिन बागपत का घेवर लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने वाले परिवार की परंपरा आखिर इस अंतरराष्ट्रीय मंच तक कैसे पहुंची ?

Greater Noida News : उत्तर प्रदेश की औद्योगिक ताकत, पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान और उद्यमिता को देश-दुनिया के सामने पेश करने वाला उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 (UPITS 4.0) आज 29 सितंबर को अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर, ग्रेटर नोएडा में 25 सितंबर से चल रहे इस पांच दिवसीय आयोजन में कारोबार के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के पारंपरिक खान-पान ने भी लोगों का खूब ध्यान खींचा है। इनमें बागपत का पारंपरिक घेवर आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस बार UPITS में पहली बार 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन कुजीन' (ODOC) को भी प्रमुखता दी गई है। इसके तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया गया है। इसी पहल में बागपत का घेवर लोगों को अपने स्वाद और बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया से आकर्षित कर रहा है। Greater Noida News
आमतौर पर घेवर को सावन और रक्षाबंधन के मौसम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ग्रेटर नोएडा के ट्रेड शो में बागपत के घेवर ने इस धारणा को बदल दिया है। लोग सितंबर के अंत में भी बड़ी रुचि के साथ घेवर खरीद रहे हैं और उसका स्वाद ले रहे हैं। बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार की तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने की परंपरा चली आ रही है। ट्रेड शो में उनके परिवार से जुड़े दीपक गोयल स्टॉल का संचालन कर रहे हैं। यहां पांच कारीगर लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। घेवर बनते देखना भी लोगों के लिए अपने आप में आकर्षण बना हुआ है। स्टॉल पर आने वाले लोग खास तौर पर यह सवाल कर रहे हैं कि सावन समाप्त होने के बाद भी घेवर कैसे उपलब्ध है। स्टॉल संचालकों के मुताबिक अब बागपत के घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया और बदलती खान-पान की पसंद के कारण सालभर इसकी मांग बनी रहती है। Greater Noida News
बागपत के इस घेवर की खासियत इसका कुरकुरा स्वाद और ऊपर लगाई जाने वाली खोये की परत बताई जा रही है। शुद्ध दूध से तैयार खोये का इस्तेमाल इसे अलग स्वाद देता है।
ट्रेड शो में इसका भाव करीब 600 रुपये प्रति किलोग्राम रखा गया है। दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने बागपत के घेवर का स्वाद लिया है। कई लोगों के लिए घेवर तैयार करने की पारंपरिक प्रक्रिया देखना भी ट्रेड शो का खास अनुभव बन गया। Greater Noida News
बागपत का घेवर अकेला ऐसा पारंपरिक स्वाद नहीं है जिसने UPITS में लोगों का ध्यान खींचा है। शामली की प्रसिद्ध 'पलंग तोड़' बर्फी और पेड़ा भी लोगों की पसंद बने हुए हैं। ट्रेड शो में आने वाले देशी-विदेशी मेहमान उत्तर प्रदेश की पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद ले रहे हैं। इस तरह UPITS में कारोबार के साथ उत्तर प्रदेश की खान-पान की विविधता भी दुनिया के सामने पहुंच रही है। ODOC की पहल स्थानीय मिठाई और खाद्य कारोबारियों के लिए नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंचने का माध्यम बन रही है। Greater Noida News
UPITS 2026 का पैमाना केवल खान-पान और प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। ट्रेड शो के चार दिनों में ही 5,48,881 लोगों की फुटफॉल दर्ज की जा चुकी थी। 28 सितंबर तक 3,765 कारोबारी समझौते (MoUs) करीब 5,500 करोड़ रुपये के मूल्य के दर्ज किए गए। इसके अलावा लगभग 12,500 करोड़ रुपये की कारोबारी पूछताछ भी सामने आई है। आयोजकों के अनुसार चार दिनों में 35,387 B2B बैठकें हुईं। इनमें मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र की बैठकों के साथ रिवर्स बायर-सेलर मीटिंग भी शामिल हैं। अंतिम दिन इन आंकड़ों में और वृद्धि की संभावना है। Greater Noida News
UPITS 2026 में 2,400 से अधिक प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। आयोजन में रूस, ऑस्ट्रिया, जापान, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम जैसे साझेदार देशों की भागीदारी रही। विदेशी खरीदारों की भागीदारी ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का अवसर दिया। 25 सितंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में UPITS 2026 का उद्घाटन किया था। पांच दिनों तक चले इस आयोजन में उद्योग, MSME, ODOP, हस्तशिल्प, हथकरघा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और पारंपरिक उत्पादों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। Greater Noida News
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