आखिर क्यों डर में जी रहे 900 परिवार? ग्रेटर नोएडा वेस्ट का मामला
Greater Noida Samachar
ग्रेटर नोएडा
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:26 AM
ग्रेटर नोएडा
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 03:26 AM
Greater Noida Samachar: अपना एक घर होना हर मध्यमवर्गीय परिवार का सपना होता है लेकिन जब वह सपना पूरा होकर भी अधूरा लगे तो तकलीफ दोहरी हो जाती है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित महागुन मंत्रा 2 सोसायटी के करीब 900 परिवार आज ऐसी ही दोहरी पीड़ा झेल रहे हैं। इन्हें फ्लैट का पजेशन तो मिल गया लेकिन अब वर्षों से अपनी रजिस्ट्री के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। इन परिवारों पर हर दिन सिर्फ एक सवाल सिर पर मंडराता है क्या ये घर वाकई हमारा है?
अब तक जारी है अधूरी मालिकाना हक की जंग
जानकारी के मुताबिकत, यह प्रोजेक्ट 2014 में लॉन्च हुआ था और वादा किया गया था कि 2017 तक फ्लैट मिल जाएगा। लेकिन असल पजेशन 2022 में मिला वो भी अधूरी सुविधाओं और हजारों अनसुलझे सवालों के साथ। स्थानीय निवासी कहते हैं, "पजेशन तो मिला, लेकिन लिफ्ट नहीं, बिजली-पानी नहीं, सुरक्षा नहीं। और अब 2 साल हो गए लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो रही। हमने पीएमओ, सीएम, डीएम, सांसद, विधायक सब जगह गुहार लगाई पर कोई सुनवाई नहीं हुई।" बिल्डर पर अथॉरिटी का करीब 22 करोड़ रुपये बकाया था जिसमें मार्च 2024 तक केवल 6 करोड़ का भुगतान हुआ। नतीजा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिला और रजिस्ट्री अटकी रह गई। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब 18 करोड़ रुपये स्टांप ड्यूटी के रूप में जमा हो चुके हैं तो उसका ब्याज कहां जा रहा है? क्या वो लोगों को लौटेगा या सोसायटी के विकास में लगेगा? फिलहाल इसका कोई जवाब नहीं है।
रीसेल भी बना सिरदर्द
रजिस्ट्री की अनुपस्थिति में फ्लैट का रीसेल करना भी मुश्किल है। जो बेचने की सोचते हैं, उन्हें बिल्डर से 4% ट्रांसफर चार्ज चुकाना पड़ता है। अन्य निवासी कहते हैं, "हमने अपनी जिंदगी की पूंजी इसमें लगा दी। अब अगर ₹80 लाख में प्रॉपर्टी बेचें तो ₹3-4 लाख बिल्डर की जेब में जाते हैं। ये तो लूट है, सिस्टम के संरक्षण में!" वहीं 65 साल की महिला बताती हैं, "हमने रिटायरमेंट से पहले एक घर का सपना देखा था पर अब पजेशन के बाद भी चैन नहीं है। हर वक्त डर रहता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए।" सोसायटी में रहने वाले परिवार बताते हैं कि आज भी लिफ्ट, सुरक्षा और रखरखाव जैसे बुनियादी इंतजाम अधूरे हैं। बच्चे बिना पार्क और सुरक्षित माहौल के रह रहे हैं, बुजुर्ग अनिश्चितता में जी रहे हैं।
अधिकारियों से 59 मेल लेकिन नतीजा शून्य
निवासियों ने अथॉरिटी, डीएम और राज्य सरकार को 59 मेल और कई ज्ञापन दिए। एक बार डीएम ने मीटिंग भी बुलाई लेकिन उसके बाद फिर सन्नाटा। लोगों को शक है कि बिल्डर कहीं सिस्टम की आड़ में उन्हें लटका कर खुद निकलने की तैयारी में है। न तो नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च हो रहे हैं और न मौजूदा प्रोजेक्ट्स में कोई दिलचस्पी दिखाई जा रही है। हर वीकेंड को जब कोई आम नागरिक परिवार संग वक्त बिताता है तो महागुन मंत्रा 2 के निवासी बिल्डर के ऑफिस या साइट के बाहर धरना देते हैं। धूप हो, बारिश हो या ठंड वो हिम्मत नहीं हारते। उनकी बस एक ही मांग है, “जब हमने हर कागज, हर पेमेंट पूरा कर दिया तो अब हमारा घर हमारी कानूनी मिल्कियत क्यों नहीं बन रहा?”