यमुना एक्सप्रेसवे पर राज कल्पना ट्रैवल्स की स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत ने परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बस बिहार में पंजीकृत थी और उसके फिटनेस तथा परमिट से जुड़े दस्तावेज अलग-अलग राज्यों से होने की जानकारी सामने आई है।

Greater Noida : यह एक कड़वा सच है। कड़वा सच यह है कि ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर 9 लोगों की जान लेकर 9 परिवारों को नहीं बल्कि उन परिवारों के हजारों रिश्तेदारों, उनके रिश्तेदारों तथा मित्रों को मिलाकर लाखों लोगों को खून के आँसू रूलाने वाली दुर्घटना के लिए एक बस नहीं बल्कि हमारा पूरा भ्रष्ट सिस्टम जिम्मेदार है। उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में तैनात नीचे से लेकर ऊपर तक के सारे अफसरों को इस मामले में कम से कम निलंबित तो तुरन्त कर देना चाहिए। साथ ही दोषी अफसरों को जेल में भेजना चाहिए। इस विषय में पढ़ें चेतना मंच की टीम द्वारा की गई व्यापक पड़ताल की इंटरनल स्टोरी-
एक डग्गामार बस उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा की सडक़ों पर मौत का पैगाम बनकर दौड़ती रही किन्तु उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के आला अफसरान भ्रष्टाचार का जमाजम पीकर बेसुध रहे। नतीजा आग का गोला बनी बस में सवार नौ परिवारों के दिए बुझ गए। अभी तक इस वीभत्स हादसे के बाद भी उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के किसी भी अफसर पर कोई आंच तक नहीं आई। उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार नियम-कानून तथा व्यवस्था को ठेंगा दिखाकर खुलेआम अट्टाहास कर रहा है। अन्य हादसों की तरह यह हादसा भी विभाग की फाइलों में दफन होने को तैयार है। इतने बड़े हादसे के बाद भी न तो सरकार की तंद्रा टूटी और न ही उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग की खुमारी ऊपर से बेशर्मी यह है कि पूरा भ्रष्ट सिस्टम एक बस के ड्राइवर, कंडक्टर तथा हेल्पर को जेल भिजवाकर आराम से सो रहा है।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर 23/24 सितंबर 2026 की रात जिस स्लीपर बस में आग लगी, उसका पंजीकरण नंबर बीआर32पीए 8647 है (BR 32 PA8647)। बस का पंजीकरण कहीं से भी हो सकता है, इसमें कोई कौतुक नहीं। मगर इस बस का फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान से जारी कराया गया। यहीं पर माथा ठनकता है। नौ लोगों की कब्रगाह बनी इस बस का पंजीकरण जिला परिवहन कार्यालय, मधुबनी (बिहार) से हुआ। इसका फिटनेस सर्टिफिकेट राजस्थान के अजमेर के ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन से जारी हुआ। इस बस का स्वामित्व और संचालन करने वाले मालिक का संबंध मध्य प्रदेश के छतरपुर से है। राज कल्पना ट्रैवल्स के संचालन में चलने वाली यह स्लीपर बस नई दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा (उत्तर प्रदेश) जा रही थी। मंजिल पर पहुंचने से पहले ही आग का गोला बन गई। व्यवस्था पर हंसना और मौतों पर रोना आता है कि पंजीकरण दूसरे राज्य का फिटनेस तीसरे राज्य का और 19 चालान उत्तर प्रदेश में। सवालों का सवाल यह कि फिर भी यह स्लीपर बस यमुना एक्सप्रेस-वे पर कश्मीरी गेट से महोबा तक कैसे दौड़ती रही? कौन है जवाबदेह? बात जवाबदेही की आती है तो सीधा आरोपों की सूई का कांटा जाकर आरटीओ, एआरटीओ और परिवहन आयुक्त पर जाकर रुक जाता है। सवाल यह भी कि इन तीनों ने 'कागजी फिटनेस' को असली सुरक्षा कैसे मान लिया। Greater Noida :
यमुना एक्सप्रेस-वे के 33वें किलोमीटर पर जली स्लीपर बस में राख नौ बदन तमाम सवाल छोड़ गए हैं। चालक के केबिन से शुरू हुई आग ने बस को लाक्षागृह में बदल दिया। दुहराया जा रहा है कि ताकि सनद रहे बस का पंजीकरण एक राज्य में , फिटनेस सर्टिफिकेट किसी दूसरे राज्य में और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उस पर 19 चालान। हैरानी इतना सब होने के बावजूद वह उत्तर प्रदेश की सडक़ों पर फर्राटे भरती रही। यह कागजी हादसा भर नहीं है। यह सिर्फ एक बस का हादसा नहीं है — यह उस निगरानी व्यवस्था का पोस्टमार्टम है, जो कागज के दस्तावेज को ही 'फिटनेस' मान लेती है। सवाल सीधा है, अगर किसी वाहन का पंजीकरण राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड या किसी और राज्य में है और फिटनेस सर्टिफिकेट किसी और राज्य का है तो उत्तर प्रदेश की सडक़ पर वह बस चलने योग्य कैसे मानी गई? महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक राज्य में पंजीकृत वाहन पड़ोसी राज्य में अस्थायी रूप से चल सकता है पर उसके लिए भी कड़े नियम हैं। इसमें परमिट का प्रकार देखा जाता है। अंतर-राज्य यात्री परिवहन के लिए विशेष अनुमति लेनी होती है। इसके लिए इंजोनल (राष्ट्रीय परमिट) आवश्यक है। फिटनेस सर्टिफिकेट दूसरे राज्य में जारी हो तो भी उस पर गाड़ी के निर्माण, चेसिस और प्रदूषण-मानकों की जांच का वास्तविक प्रमाण होना चाहिए। सिर्फ दूसरे राज्य के कागज से काम नहीं चलता। चालान का रिकॉर्ड भी होता है। वाहन डेटाबेस (वाहन/सारथी) में चालान दर्ज होते ही वह सिस्टम की 'रडार' में आ जाता है। राज कल्पना की इस बस का 19 बार चालाना होता है। उसे न तो इंपाउंड किया गया। न ही फिटनेस सर्टिफिकेट पर रोक लगी। न चालक- परिचालक पर सख्त कार्रवाई हुई। इन सवालों का सीधा जवाब है सिस्टम काला है। मुट्ठी गरम की कहानी यहां भी दुहराई गई। विभाग ने दूसरे राज्य के 'कागजी फिटनेस सर्टिफिकेट' को पर्याप्त इसीलिए समझा। सवाल यह भी कि इस बस ने अलग-अलग जिलों में 19 बार नियम तोड़े। यह नियम ओवर स्पीड और अन्य हो सकते हैं। इससे ड्राइवर के लाइसेंस पर भी सवाल खड़े होते हैं। और सवाल यह भी क्या इन 19 चालानों के जुर्माने की राशि कभी वसूल हुई? क्या किसी आरटीओ ने इन चालानों को देखकर बस को रोककर फिटनेस की ताजा जांच करवाई? क्या किसी एसपी-ट्रैफिक ने परिचालक को रोका?
यहां सबसे घातक प्रश्न है — चालान ठोकने और वाहन को रोकने की शक्ति बंटी हुई है। परिवहन विभाग के मोहरे चालान लिखते हैं पर कारगर कार्रवाई (इंपाउंड, फिटनेस-रद्द, रजिस्ट्रेशन-रद्द) के लिए कोई सुनवाई नहीं होती। वही 'प्रवर्तन-व्यवस्था' आज यात्री बसों के मामले में कागज का बाघ बनकर रह गई है। यमुना एक्सप्रेस-वे पर यह पहला बस हादसा नहीं। अतीत में भी बड़ी बस दुर्घटनाओं ने इसी मार्ग को कब्रिस्तान बनाया है। 8 जुलाई 2019 को लखनऊ से दिल्ली आ रही बस 20 फीट गहरे नाले में पलट गई। 29 लोग मारे गए। तब भी सवाल उठा कि क्या बस की रात्रि यात्रा के लिए उचित फिटनेस और चालक-व्यवस्था थी? जांच के सार्वजनिक निष्कर्ष आज तक सामने नहीं आए, न ही किसी अधिकारी के खिलाफ स्तरीय कार्रवाई की बात कही गई। 16 दिसंबर 2025 को मथुरा के पास कोहरे में आठ बसों और दो छोटे वाहनों की टक्कर में19 लोग मारे गए। और अब राज कल्पना बस हादसा। तीनों हादसों में एक ही 'सूत्र' है प्रवर्तन का खेल कागज पर हल्का, हकीकत में भले ही बड़ा। पर अब कोई कहे कि अधिकारियों ने आंख बंद कर रखी थी, तो क्या वह गलत होगा? पूर्व हादसों की जांच रिपोर्ट कहीं प्रकाशित नहीं हुई, किसी आरटीओ को सस्पेंड नहीं किया गया, किसी परिवहन अधिकारी को बर्खास्त नहीं किया गया — यानी अगले हादसे की खाद बनती रही।
परिवहन आयुक्त (ट्रांसपोर्ट कमिश्नर) आशुतोष निरंजन। यह 2010 बैच के IAS अधिकारी हैं। उन्होंने अप्रैल 2026 में परिवहन आयुक्त का पद संभाला। उन पर आरोप है कि वे सभी जिलों में तैनात RTO और ARTO से 'मलाई' में हिस्सा लेते हैं। यानी अवैध बसों से एकत्र होने वाले पैसे का सिलसिला ऊपर तक जाता है।
इसी कड़ी में नाम आता है नोएडा में तैनात RTO सियाराम वर्मा और ARTO नंद कुमार का गौतमबुद्धनगर जिले में तैनात उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के RTO सियाराम वर्मा तथा ARTO प्रशासन नंदकुमार दोनों पर सीधा आरोप है कि अवैध बसों के संचालन में करोड़ों का वारा न्यारा कर रहे हैं। तभी सडक़ पर 'यमराज' दौड़ रहे हैं। आरोप की परतें यहां तक गई कि इस खेल में एकत्र 'मलाई' का अच्छा-खासा हिस्सा नोएडा क्षेत्र के राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को भी चटाया जाता है। कहा जा रहा है कि यही वजह है कि इन सबने कभी बिना कागज वाली बसें देखकर आवाज नहीं उठाई। FIR के अनुसार यात्रियों ने आग लगने से पहले बस के अंदर जलने की बदबू आने की शिकायत चालक से की थी। आरोप है कि उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि 'फिटनेस' में यह भी जांचना चाहिए कि केबिन का इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन सुरक्षित है, आग-रोधी सामग्री वाला है, निकास द्वार खुलने लायक है तथा अग्निशामक जगह-जगह सुलभ हैं या नहीं ?
उत्तर प्रदेश का परिवहन विभाग इतना तो कर ही सकता है कि राष्ट्रीय एकीकृत वाहन-डेटाबेस: वाहन और सारथी पोर्टल को सख्त बनाएं।चालान दर्ज होते ही सिस्टम अलर्ट दे। फिटनेस लटकने पर स्वचालित नोटिस जाए। यमुना एक्सप्रेस-वे के प्रत्येक टोल प्लाजा पर बसों के पंजीकरण-राज्य, फिटनेस और परमिट की स्वचालित पहचान का सिस्टम लगाएं — जो वाहन दूसरे राज्य का है और बिना वैध परमिट के, उसे तुरंत रोका जाए। किसी बाहरी राज्य की बस बिना वैध परमिट उत्तर प्रदेश में चल रही हो, तो उस जिले के आरटीओ/एआरटीओ की संलिप्तता की जांच हो और दोषी होने पर सस्पेंशन तत्काल। अच्छा होगा 2019 और दिसंबर 2025 के हादसों की पूरी फॉरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए — ताकि पता चले कि पहली बार में कौन-से फिटनेस-छेद बंद नहीं हुए।
नौ लोग जलकर मरे, 19 चालानों के बाद भी बस दौड़ती रही। नोएडा का आरटीओ सियाराम वर्मा कहता है कि "बस तो दूसरे राज्य की है" और आरटीओ नंद कुमार कहता है कि "देखरेख की हमारी जिम्मेदारी नहीं" — तब दो जिम्मेदारी की जगह सिर्फ एक जिम्मेदारी बचती है- लाश की। यमुना एक्सप्रेस-वे पर औसतन 2 हादसे रोज होते हैं। हर बार अधिकारी कहते हैं — "जांच हो रही है।" परिवहन आयुक्त के दफ्तर से निकलने वाले फिटनेस कागज सच में सडक़ के आईने में उतरते हैं, या मंत्रालय के लिफाफों में दबे रहते हैं? जवाब दें वे, जो 9 जिंदगियों से पहले सिर्फ 19 चालान लिख पाए। सडक़ तो चलती रहेगी— कल फिर कोई बस निकलेगी। पर सवाल वही रह रहा है: क्या वह बस भी दूसरे राज्य के कागज पर दौड़ेगी, और कोई नहीं रोकेगा पंजीकरण और फिटनेस का खेल।
कावेरी ट्रैवल्स बस (आंध्र प्रदेश, 24 अक्टूबर 2025)। कुरनूल जिले में रात 3:30 बजे आग लगी — 19 यात्री जलकर मरे। रजिस्ट्रेशन डीडी01एम9490 — मूल रूप से दमन और दीव (अगस्त 2018) में। हादसे से छह महीने पहले (अप्रैल 2025) रायगढ़ (ओडिशा) आरटीओ में ट्रांसफर हुआ। फिटनेस सर्टिफिकेट: सिलवासा, दमन और दीव का — मार्च 2027 तक वैध। मालिक: ओडिशा के रायगढ़ का निजी ऑपरेटर। बस हैदराबाद से चलती थी। तेलंगाना में ही 16 पेंडिंग चालान (23,000) पर बस "वैध" होकर दौड़ती रही, और 19 लाशें बिछ गईं। यानी — रजिस्ट्रेशन दूसरे राज्य, फिटनेस तीसरे राज्य, चालान चौथे... और बस सडक़ पर। राज कल्पना बस केस का एकदम असली जुड़वा। समृद्धि एक्सप्रेस-वे हादसा (बुलढाणा, महाराष्ट्र, 1 जुलाई 2023)। 25 यात्री जिंदा जले। बस (एमएच 29 बीई-1819) यवतमाल आरटीओ में पंजीकृत थी। फिटनेस टेस्ट 10 मार्च 2022 को हुआ, पर फिटनेस सर्टिफिकेट 29 नवंबर 2022 को — यानी 9 महीने बाद जारी हुआ। इस दौरान बस को दो बार "एक्सपायर्ड फिटनेस" के चालान मिले (अगस्त व अक्टूबर 2022) — दोनों चालान तुरंत चुका दिए गए। आरटीओ व एनजीओ ने इसे "प्रशासनिक लापरवाही" और फिटनेस-परीक्षण की धमकी कहा। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद टेस्ट की वीडियो-रिकॉर्डिंग कभी सार्वजनिक नहीं हुई। बीड आरटीओ बस्ट (जनवरी 2026)। इस आरटीओ ने अंतर-राज्य फिटनेस स्कैम का भंडाफोड़ किया। इंदौर (मध्य प्रदेश) के एक स्वचालित टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) बगैर भौतिक जांच के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर रहा था। बीड में खड़े वाहनों का इंदौर में "परीक्षण" दिखाया गया। सात साल से ज्यादा वैधता वाला फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी हुआ। निष्क्रिय सरकारी लॉगिन-आईडी का दुरुपयोग भी हुआ। जून 2026 में बड़ा खुलासा। हैदराबाद से चलने वाली 1,150 निजी बसों में से 750 नागालैंड/अरुणाचल में पंजीकृत। 2,800 किलोमीटर दूर से वीडियो कॉल के जरिए फिटनेस सर्टिफिकेट बने । हैदराबाद मेल की जांच में यह खुलासा हुआ। इस साबित होता है कि हाथ गरम करना एक राष्ट्रीय उद्योग बन चुका है।
इस विषय में ग्रेटर नोएडा में सक्रिय विश्व हिन्दू परिषद के नेता शिव कुमार आर्य का कहना है कि इस मामले की SIT से जांच हो और कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर सख्त कार्यवाही की जाए। ग्रेटर नोएडा में सपा नेता बबल भाटी (हरेन्द्र) का कहना है कि सरकार एवं RTO की मिलीभगत से सडक़ों पर डग्गामार बसें दौड़ रही हैं जो आम लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रही हैं। भाजपा नेता लोकमन प्रधान का कहना है कि ऐसी बस कंपनियों को उत्तर प्रदेश सरकार की तथा पूरे सरकारी सिस्टम की सह प्राप्त है। उनका कहना है कि ऐसी बस कंपनियों के खिलाफ सीबीआई से जांच हो। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कसाना का कहना है कि RTO तथा सरकार की कृपा से डग्गामार बसों की भरमार है। पूर्व जिलाध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी चैनपाल प्रधान का इस मामले में कहना है कि RTO को मोटा पैसा बस कंपनियां सुविधाशुल्क के नाम पर देती हैं और इन्हीं की कृपा से ये बसें सड़कों पर मौत बनकर दौड़ती हैं। Greater Noida :
इस मामले में यमराज बनकर दौडऩे वाली स्लीपर बस ने ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर यमराज बनकर नौ लोगों को जिंदा जला डाला। जिंदा जलने वालों में छतरपुर निवासी श्रुति रावत, हमीरपुर के राठ निवासी सरोज गुप्ता (52) तथा उनका बेटा मयंक गुप्ता (28), हरियाणा के हिंसार के रहने वाले देवेन्द्र सहाय भारद्वाज (60) जालौन के रहने वाले हरशरण गुप्ता (55) , उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की रहने वाली ऊषा देवी हमीरपुर जिले की रहने वाली सुनीता गुप्ता (50 वर्ष) तथा सुनीता गुप्ता का बेटा शशांक गुप्ता एवं उत्तर प्रदेश के नोएडा में रहने वाले ओमप्रकाश शामिल हैं।
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