यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल हादसे से कहीं आगे निकल गया है। जिस बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान दर्ज होने की बात सामने आई, वह आखिर यात्रियों को लेकर सड़क पर दौड़ती कैसे रही ?

Greater Noida News : यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत ने केवल एक दर्दनाक सड़क हादसे की कहानी नहीं लिखी है, बल्कि उत्तर प्रदेश की यात्री बसों की निगरानी व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल अब यह नहीं रह गया कि बस में आग कैसे लगी। सवाल यह है कि नियमों और चालानों के रिकॉर्ड के बावजूद यह बस यात्रियों को लेकर सड़क पर दौड़ती कैसे रही ? 23 सितंबर की देर रात दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर आग का गोला बन गई। बस में करीब 35 यात्री सवार थे। हादसे में नौ लोगों की मौत हुई। पुलिस जांच में आपातकालीन निकास, सामान की स्थिति और यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हादसे के बाद बस के रिकॉर्ड ने सरकारी निगरानी व्यवस्था पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उपलब्ध सरकारी डेटाबेस की जानकारी के अनुसार बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान दर्ज थे। इनमें कम उम्र के चालक, रेट्रोफिटिंग, फ्यूल और परमिट से जुड़े उल्लंघनों का उल्लेख बताया गया है। यही वह बिंदु है जहां से पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का सवाल शुरू होता है। Greater Noida News
जिस बस में नौ यात्रियों की जान चली गई, उसका पंजीकरण नंबर BR32PA8647 बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसका पंजीकरण बिहार के मधुबनी में था। बस के मालिक का संबंध मध्य प्रदेश के छतरपुर से बताया गया है और इसे राज कल्पना ट्रैवल्स द्वारा संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके फिटनेस और प्रदूषण से जुड़े दस्तावेज दूसरे राज्यों से जारी होने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। Greater Noida News
बस के खिलाफ दर्ज 19 चालानों ने परिवहन प्रवर्तन व्यवस्था के सामने सीधा सवाल खड़ा किया है। यदि किसी वाहन के खिलाफ लगातार नियम उल्लंघन दर्ज हो रहे थे तो क्या उसका फिटनेस रिकॉर्ड दोबारा जांचा गया? क्या परमिट की समीक्षा हुई? क्या वाहन को रोककर तकनीकी जांच की गई ? इन सवालों का जवाब जांच और सरकारी रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगा।
लेकिन इतना जरूर है कि चालान दर्ज होना और वाहन का सड़क से हटना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। यही अंतर यात्रियों की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है। Greater Noida News
हादसे वाली बस का रिकॉर्ड कई राज्यों से जुड़ा बताया जा रहा है। पंजीकरण बिहार में, मालिक का संबंध मध्य प्रदेश से और फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान से जारी होने की जानकारी सामने आई है। बस दिल्ली से महोबा के बीच चल रही थी। Greater Noida News
दूसरे राज्य में पंजीकृत बस का उत्तर प्रदेश में चलना अपने आप में अवैध नहीं है। अंतरराज्यीय यात्री परिवहन के लिए निर्धारित परमिट और अन्य कानूनी शर्तें होती हैं। असल सवाल यह है कि क्या उन सभी शर्तों की वास्तविक जांच हुई थी ? यदि बस के खिलाफ लगातार चालान थे, तो क्या वाहन की सुरक्षा स्थिति का समग्र आकलन हुआ? क्या फिटनेस प्रमाणपत्र केवल दस्तावेज रहा या वाहन की वास्तविक स्थिति भी जांची गई? सुप्रीम कोर्ट ने भी अब सरकार से बस के परमिट, फिटनेस, बीमा और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुपालन की जानकारी मांगी है। Greater Noida News
हादसे की एफआईआर के अनुसार यात्रियों ने बस में जलने की गंध और धुएं को लेकर चालक-परिचालक को चेताया था। आरोप है कि बस तत्काल नहीं रोकी गई। बाद में आग तेजी से फैल गई। Greater Noida News
प्रत्यक्षदर्शी यात्रियों के अनुसार बस के भीतर धुआं भरने के बाद अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री बिना सामान लिए किसी तरह बाहर निकले। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बस की सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी थी। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि आपातकालीन निकास के काम न करने और सामान के कारण रास्ता बाधित होने की आशंका की जांच की जा रही है। स्लीपर बसों में सुरक्षा के नाम पर क्या हो रहा है यमुना एक्सप्रेसवे की यह घटना स्लीपर बसों की बनावट और उनमें किए जाने वाले बदलावों पर भी सवाल खड़े करती है। Greater Noida News
विशेषज्ञों और जांच से जुड़े इनपुट में स्लीपर बसों में किए गए अनधिकृत इलेक्ट्रिकल बदलाव, रेट्रोफिटिंग, सामान की अधिकता और आपातकालीन निकास से जुड़ी समस्याओं को सुरक्षा जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है। यात्री बस में बैठता है तो उसे यह पता नहीं होता कि जिस वाहन में वह सफर कर रहा है उसकी फिटनेस जांच वास्तव में कितनी गहराई से हुई है।उसके पास केवल एक टिकट होता है और सामने सरकारी व्यवस्था पर भरोसा। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद गौतमबुद्ध नगर में स्लीपर बसों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। दिल्ली से आने-जाने वाली बड़ी संख्या में स्लीपर बसें जिले की सीमाओं से होकर गुजरती हैं। Greater Noida News
हादसे के बाद परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई अभियान चलाया गया और बड़ी संख्या में बसों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई। लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसी कार्रवाई नियमित निगरानी व्यवस्था में बदलती है या फिर हादसा शांत होते ही प्रवर्तन की रफ्तार भी धीमी पड़ जाती है। यात्रियों की सुरक्षा केवल अभियान के तीन-चार दिनों की कार्रवाई से सुनिश्चित नहीं हो सकती। Greater Noida News
गौतमबुद्ध नगर से लेकर प्रदेश स्तर तक परिवहन विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों तथा बस संचालकों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। Greater Noida News
अधिकारियों पर किसी प्रकार की रिश्वत या मिलीभगत का आरोप तभी तथ्य माना जा सकता है जब सक्षम जांच एजेंसी या न्यायिक प्रक्रिया में उसकी पुष्टि हो। फिलहाल ऐसे आरोप सार्वजनिक रूप से लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। लेकिन दूसरी ओर, नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड और उसके बावजूद वाहन का संचालन एक ऐसा तथ्य है जिसकी प्रशासनिक जांच होना जरूरी है। यही कारण है कि अब जांच केवल ड्राइवर या कंडक्टर तक सीमित रखने के बजाय वाहन की फिटनेस, परमिट, पंजीकरण, प्रवर्तन कार्रवाई और संचालक की भूमिका तक पहुंचनी चाहिए। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहले ही स्वतः संज्ञान ले चुका है। अदालत ने स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा जांच, फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास और चालक-परिचालक के प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी मांगी है। Greater Noida News
अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने यह जानकारी मांगी है कि बस के चालक और पंजीकृत मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई तथा बस सभी सुरक्षा और नियामकीय मानकों को पूरा करती थी या नहीं। सुप्रीम कोर्ट के सवालों का केंद्र वही है जो हादसे के बाद आम लोगों के मन में है अगर बस के खिलाफ पहले से नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड था, तो वह यात्रियों को लेकर सड़क पर कैसे दौड़ती रही? Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे का हादसा एक बड़ा सवाल सामने रखता है। निजी बस संचालकों के पास पैसा, नेटवर्क और कई राज्यों में फैला संचालन तंत्र हो सकता है, लेकिन यात्री अपनी सुरक्षा के लिए सरकारी निगरानी व्यवस्था पर निर्भर रहता है। Greater Noida News
किसी वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र यह सुनिश्चित करने के लिए होता है कि वाहन सार्वजनिक सड़क पर सुरक्षित रूप से चल सकता है। लेकिन यदि कागजों पर फिट वाहन सड़क पर यात्रियों की जान के लिए खतरा बन जाए तो पूरी फिटनेस प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसलिए अब जांच का विषय सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि बस फिट थी या नहीं, बल्कि यह भी होना चाहिए कि फिटनेस जांच की प्रक्रिया कितनी वास्तविक और प्रभावी थी। Greater Noida News
स्लीपर बसों में यात्रियों के बाहर निकलने की व्यवस्था सामान्य बसों से अलग चुनौती पेश करती है। रात में ज्यादातर यात्री सो रहे होते हैं। आग लगने पर कुछ मिनट का समय ही उपलब्ध होता है। Greater Noida News
स्लीपर बसों की जांच में कम से कम इन बिंदुओं पर वास्तविक निरीक्षण जरूरी है
आपातकालीन निकास वास्तव में खुल रहा है या नहीं
अग्निशमन उपकरण काम करने की स्थिति में हैं या नहीं
विद्युत वायरिंग सुरक्षित है या नहीं
एसी और ईंधन प्रणाली में कोई जोखिम तो नहीं
स्लीपर केबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं या नहीं
सामान यात्रियों के निकासी मार्ग को बाधित तो नहीं कर रहा
चालक और परिचालक आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित हैं या नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही में भी स्लीपर बसों के फायर सेफ्टी और सुरक्षा मानकों से जुड़े ऐसे ही सवाल उठे हैं। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे पर नौ यात्रियों की मौत के बाद पुलिस की जांच चल रही है। चालक, परिचालक और बस संचालन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। कंपनी के एक प्रबंधक की गिरफ्तारी की भी रिपोर्ट सामने आई है। लेकिन इसके साथ एक समानांतर प्रशासनिक जांच की जरूरत भी महसूस होती है। Greater Noida News
जांच में यह सामने आना चाहिए कि—
19 चालान कब-कब हुए?
कितने चालान जमा हुए?
कितने लंबित थे?
किस अधिकारी ने उनका संज्ञान लिया?
बस की फिटनेस कब हुई?
किस आधार पर हुई?
परमिट की जांच कब हुई?
बस में किए गए बदलावों की जांच किसने की?
और सबसे महत्वपूर्ण इन सबके बावजूद बस को यात्रियों के साथ चलने की अनुमति कैसे मिलती रही?
इन सवालों का जवाब ही बताएगा कि मामला केवल एक बस की लापरवाही का था या निगरानी व्यवस्था में भी कहीं गंभीर कमी थी। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे पर जली बस अब सड़क किनारे खड़ी कोई साधारण दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी नहीं है। वह परिवहन व्यवस्था के सामने खड़े सवालों का प्रतीक बन चुकी है। सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगाह इस मामले पर है। अब सरकार को अदालत के सामने तथ्य रखने हैं। जांच एजेंसियों को अपनी रिपोर्ट देनी है और परिवहन विभाग को अपनी व्यवस्था का जवाब देना है। बस माफिया के सामने घुटनों पर है पूरा सरकारी सिस्टम यह एक गंभीर आरोप और जनचिंता के रूप में सामने आया है। अब इसकी सच्चाई का फैसला आरोपों से नहीं, बल्कि जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और जवाबदेही तय करने वाली कार्रवाई से होगा। क्योंकि नौ यात्रियों की मौत के बाद सबसे जरूरी सवाल यही है सड़क पर अगली बस निकलने से पहले सिस्टम जागेगा या अगली त्रासदी का इंतजार करेगा? Greater Noida News
विज्ञापन