यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस अग्निकांड में नौ यात्रियों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या हादसे के लिए केवल बस मालिक, चालक और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी या परमिट, फिटनेस और सुरक्षा जांच करने वाले अफसरों से भी जवाब मांगा जाएगा ?

नौ जिंदगियां खत्म होने के बाद खुली व्यवस्था की पोल, अब हाईकोर्ट ने मांगा तीन साल का हिसाब; सवाल — सिर्फ बस मालिक और कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या जिम्मेदार अफसर भी जवाब देंगे ?
Greater Noida News : यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा के पास स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जिंदा जलकर मौत के मामले ने अब उत्तर प्रदेश की परिवहन व्यवस्था को सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट के कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस हादसे के बाद सामने आई खबरों में बस की फिटनेस, परमिट, सुरक्षा व्यवस्था और नियम उल्लंघनों को लेकर सवाल उठे। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेकर इस पूरे मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए लिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या हाईकोर्ट का यह हस्तक्षेप नौ मृतकों के परिवारों को वास्तविक न्याय दिला पाएगा या कुछ दिनों की सख्ती के बाद यह मामला भी उन अनेक सड़क हादसों की तरह सरकारी फाइलों में दब जाएगा ,जो हर रोज उत्तर प्रदेश की सड़कों पर होते रहते है।Greater Noida News
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में तैनात न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने मामले में प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव परिवहन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर जानकारी देने को कहा। कोर्ट ने प्रदेश में चल रही एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा और उनके निरीक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने सरकार से विशेष रूप से पिछले तीन वर्षों में जारी किए गए परमिट, परमिट से पहले की जांच, सीमा जांच चौकियों पर बसों की जांच, यात्री सुरक्षा संबंधी निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर की गई आपराधिक कार्रवाई का विवरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब जांच का दायरा केवल उस एक बस तक सीमित नहीं रहेगा। सवाल यह भी सामने आएगा कि उत्तर प्रदेश में स्लीपर बसों को सड़क पर उतरने की अनुमति देने और उनके संचालन की निगरानी की पूरी व्यवस्था वास्तव में कैसे काम कर रही है। Greater Noida News
हादसे के बाद प्रकाशित रिपोर्टों में दावा किया गया कि दुर्घटनाग्रस्त बस के खिलाफ पहले से अनेक चालान थे और परमिट, ओवरलोडिंग तथा अन्य परिवहन नियमों से जुड़े उल्लंघनों का रिकॉर्ड सामने आया। एक रिपोर्ट में 61 चालानों और करीब 2.65 लाख रुपये की चालान राशि का उल्लेख किया गया है। वहीं दूसरी रिपोर्टों के अनुसार पुलिस जांच में बस की फिटनेस, इंजन से जुड़ी खराबी और सामान की ओवरलोडिंग जैसे बिंदुओं की भी जांच की जा रही है। इस मामले में असली सवाल पैदा होता है कि अगर किसी वाहन में सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां थीं तो वह सड़क पर कैसे चल रहा था ? और इससे भी बड़ा सवाल उस वाहन की फिटनेस और संचालन को मंजूरी देने या उसकी निगरानी करने वाली सरकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी कहां तक तय होगी ? Greater Noida News
इस मामले में हाईकोर्ट की पहल का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि कोर्ट ने सिर्फ दुर्घटना के कारणों पर सवाल नहीं किया, बल्कि स्लीपर बसों की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था पर जानकारी मांगी है। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि क्या चालकों और परिचालकों को आग अथवा दूसरी आपात परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित निकालने का पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाता है। कोर्ट ने बसों में लागू सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने संज्ञान में पहले हुई ऐसी दुर्घटनाओं का भी उल्लेख किया है। Greater Noida News
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास स्तिथ यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद गिरफ्तारियां तो हुईं लेकिन मृतकों के परिवारों के लिए न्याय का अर्थ केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं है।
न्याय के कई सवाल हैं—
उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के बड़े अधिकारियों के हर बार जांच में बच निकलने का दावा गंभीर है, फिर भी इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड मांगा जाना महत्वपूर्ण है। इससे पहली बार यह जांचना संभव होगा कि परमिट जारी करने से लेकर फिटनेस, निरीक्षण, चेकिंग और कार्रवाई तक की पूरी सरकारी श्रृंखला में कौन-कौन से स्तर पर क्या हुआ। सामान्य प्रशासनिक जांच में किसी हादसे का कारण निर्धारित कर जिम्मेदारी कुछ व्यक्तियों तक सीमित हो सकती है। लेकिन हाईकोर्ट की जनहित याचिका के रूप में सुनवाई में सरकार को व्यापक रिकॉर्ड और अनुपालन की स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी। मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ अपर मुख्य सचिव परिवहन की उपस्थिति तथा तीन वर्ष का विस्तृत रिकॉर्ड मांगे जाने से यह मामला केवल एक बस की जांच से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश की स्लीपर बस सुरक्षा व्यवस्था की जांच का रूप ले सकता है। अब निगाह 13 अक्टूबर 2026 की सुनवाई पर रहेगी। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे की उस रात ने नौ परिवारों से उनके अपने छीन लिए। रिपोर्टों के अनुसार मृतकों में इंजीनियर, शिक्षक, निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग और परिवार के सदस्य शामिल थे। कई शव बुरी तरह जल जाने के कारण उनकी पहचान भी कठिन हो रही रही थी। इस मामले में यमराज बनकर दौडऩे वाली स्लीपर बस ने ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेस-वे पर यमराज बनकर नौ लोगों को जिंदा जला डाला। जिंदा जलने वालों में छतरपुर निवासी श्रुति रावत, हमीरपुर के राठ निवासी सरोज गुप्ता (52) तथा उनका बेटा मयंक गुप्ता (28), हरियाणा के हिंसार के रहने वाले देवेन्द्र सहाय भारद्वाज (60) जालौन के रहने वाले हरशरण गुप्ता (55) , उत्तर प्रदेश के हमीरपुर की रहने वाली ऊषा देवी हमीरपुर जिले की रहने वाली सुनीता गुप्ता (50 वर्ष) तथा सुनीता गुप्ता का बेटा शशांक गुप्ता एवं उत्तर प्रदेश के नोएडा में रहने वाले ओमप्रकाश शामिल हैं। Greater Noida News
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