हादसे के बाद परिवहन आयुक्त की भूमिका को लेकर भी सवाल क्यों उठ रहे हैं ? नोएडा क्षेत्र में तैनात RTO और ARTO की प्रवर्तन व्यवस्था पर चर्चा क्यों तेज हो गई है ? क्या निजी यात्री बसों की फिटनेस और सुरक्षा जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है या वास्तव में भी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है ?

Greater Noida News : उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग में 9 यात्रियों की मौत के बाद अब सवाल केवल हादसे की वजह तक सीमित नहीं रह गए हैं। इस दर्दनाक हादसे ने उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर जिस बस में 30 से 35 यात्री सफर कर रहे थे, वह सड़क पर चलने के लिए सभी जरूरी मानकों पर कितनी खरी थी और परिवहन विभाग की जांच व्यवस्था ने उसे किस स्तर तक परखा था? हादसे के बाद पुलिस बस के परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, चालक के लाइसेंस और दूसरे दस्तावेजों की जांच कर रही है। Greater Noida News
उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में परिवहन आयुक्त की भूमिका महत्वपूर्ण है। इन दिनों उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) 2010 बैच के IAS अधिकारी आशुतोष निरंजन हैं। अप्रैल 2026 में हुए प्रशासनिक फेरबदल में आशुतोष निरंजन को परिवहन आयुक्त बनाया गया था। अप्रैल-2026 से पहले उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध महिला IAS अधिकारी किंजल सिंह उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) थीं। किंजल सिंह से पहले नोएडा के डीएम रहे ठा. बी.एन. सिंह परिवहन आयुक्त (Transport Commissioner) थे। उनके दौर में एक भी बड़ा सडक़ हादसा इसलिए नहीं हुआ कि वह नीचे से लेकर ऊपर तक पूरे विभाग को ईमानदारी से चला रहे थे। लेकिन इन दिनों उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन पर आरोप है कि वह सभी जिलों में तैनात RTO तथा ARTO से ‘‘मलाई’’ में हिस्सेदारी बांटते हैं। यही कारण है कि जिस बस में 9 जानें चली गई उस बस पर 19 चालान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में दर्ज हैं। इसके बावजूद बस सडक़ों पर फर्राटे भर रही थी। Greater Noida News
नोएडा में इन दिनों RTO के पद पर सियाराम वर्मा तथा ARTO प्रशासन के पद पर नंद कुमार तैनात हैं। इन दोनों के ऊपर सीधा आरोप है कि वह अवैध बसों के संचालन में ‘‘खुला खेल फर्रूखाबादी’’ खेल रहे हैं। इस खेल के दौरान एकत्र होने वाली ‘‘मलाई’’ में से अच्छा-खासा हिस्सा नोएडा क्षेत्र में सक्रिय राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा पत्रकारों को भी चटाया जाता है। इसी कारण नोएडा का एक भी राजनेता, सामाजिक कार्यकर्ता तथा एक भी पत्रकार नोएडा की सडक़ों पर यमराज बनकर दौड़ रही बिना तकनीकी मापदंड पास किए बसों को देखकर अंजान बने रहते हैं। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे पर 23 सितंबर की देर रात कश्मीरी गेट से महोबा जा रही स्लीपर बस आग का गोला बन गई। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग बस के अगले हिस्से में ड्राइवर केबिन के पास लगी और देखते ही देखते धुआं तथा आग बस के अंदर फैल गई। सबसे गंभीर बात यह है कि FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार यात्रियों ने आग लगने से पहले ही बस के अंदर जलने की बदबू आने की शिकायत चालक और परिचालक से की थी। आरोप है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और बस को तत्काल रोककर जांच नहीं की गई। इसके बाद आग तेजी से फैल गई। अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होना चाहिए कि जिस वाहन को लंबी दूरी की यात्रा पर दर्जनों यात्रियों को लेकर चलने की अनुमति थी, उसकी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी स्थिति क्या थी। Greater Noida News
यमुना एक्सप्रेसवे का यह हादसा उत्तर प्रदेश में निजी यात्री बसों की निगरानी व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है। 9 लोगों की मौत के बाद अब लोगों को केवल मुआवजे और कार्रवाई की घोषणा नहीं, बल्कि यह जवाब भी चाहिए कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था ने हादसे से पहले क्या किया था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में परिवहन विभाग की ओर से कोई प्रशासनिक या नियामकीय चूक हुई थी अथवा नहीं। लेकिन फिलहाल हादसे ने परिवहन विभाग के सामने यही सवाल खड़ा कर दिया है ‘सडक़ पर दौड़ती यात्री बसों की फिटनेस कागजों में सुनिश्चित हो रही है या वास्तव में भी?’ Greater Noida News
विज्ञापन