विनय संकोचीHealth :आलूबुखारा (Plum) एक खट्टा मीठा फल है, जो भारत के पहाड़ी प्रदेशों में होता है। आलूबुखारा का गूदा रसदार होता है और इसका पतला छिलका गूदे से कुछ ज्यादा ही खट्टा होता है। अधिकतर आलूबुखारे का इस्तेमाल एक स्वादिष्ट फल के तौर पर किया जाता है। इसके कच्चे फल का रंग हरा होता है और पकने के बाद यह लाल, गहरा बैंगनी हो जाता है। भारत में आलूबुखारा पसंद तो खूब किया जाता है, लेकिन इसकी खेती यहां बहुत कम होती है। इसके कच्चे फल का इस्तेमाल मुरब्बा बनाने में भी किया जाता है। पके आलूबुखारा फलों को शराब बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। सूखे हुए आलूबुखारा में एंटी ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो तमाम तरह के रोगों से शरीर का बचाव करने में सक्षम है।
आलूबुखारा पोषक तत्वों का खजाना होता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर, शुगर जैसे पोषक तत्व और कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम और जिंक जैसे मिनिरल्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं। अगर विटामिनों की बात करें तो इसमें विटामिन सी,(Vitamin C) थायमिन(Thiamine), राइबोफ्लेविन(Riboflavin), नियासिन(Niacin), विटामिन बी6(Vitamin-B 6 ), फोलिक एसिड(Folic Acid), विटामिन ए (Vitamin-A), विटामिन ई (Vitamin-E) और विटामिन के(Vitamin-K) पर्याप्त मात्रा में मौजूद होते हैं। इन सबके अतिरिक्त इस खट्टे मीठे 100 ग्राम फल में फैटी एसिड, सैचुरेटेड 0.017 ग्राम (Fatty Acids,Saturated 0.017 g), फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड 0.134 ग्राम (Fatty Acid Total Monounsaturated 0.134 g) और फैटी एसिड टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड 0.044 ग्राम (Fatty Acid Total Polyunsaturated 0.044 g) मात्रा में पाए जाते हैं। गर्मियों के मौसम में आलूबुखारा (plum) के सेवन से सेहत और सौंदर्य को बरकरार रखने में मदद मिल सकती है।
आइए जानते हैं आलूबुखारा के गुण उपयोग के बारे में -
• ताजा और सूखे दोनों ही प्रकार के आलूबुखारा में एंटी कैंसर गुण पाए जाते हैं। सूखे आलूबुखारा में मौजूद फाइबर और पॉलीफेनॉल (Fiber and Polyphenols ) पेट के कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं और आलूबुखारा का अर्क स्तन कैंसर का खतरा कम कर सकता है।
• फाइबर से भरपूर आलूबुखारा शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। आलूबुखारा के नियमित सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।
• आलूबुखारा मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। आलूबुखारा में मौजूद पॉलीफेनोल्स कंपाउंड मस्तिष्क के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं। इतना ही नहीं यह कंपाउंड मस्तिष्क के कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम कर दिमागी बीमारियों के खतरे को कम कर सकता है। इसके लिए आलूबुखारा जूस का सेवन ज्यादा उपयोगी होता है।
• आलूबुखारा इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी सहायक है। प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण विटामिन ए और विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायता करते हैं।
• आलूबुखारे के सेवन से अपनी आंखों को भी स्वस्थ रखा जा सकता है। इसमें मौजूद विटामिन सी और विटामिन ई उम्र के साथ घटती नेत्र ज्योति की समस्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
• आलूबुखारे के नियमित सेवन से वजन कम करने में सहायता मिलती है। आलूबुखारे में कैलोरी काफी कम होती है और फाइबर भरपूर होता है, जिससे यह वजन कम करने में सहायक होता है।
• प्रतिदिन 100 ग्राम सूखा आलूबुखारा खाने से हड्डी कमजोर करने वाले कारकों को खत्म करने में सहायता मिल सकती है।
• मधुमेह रोगियों के लिए भी आलूबुखारा बहुत उपयोगी है। स्वाद में मीठा होने के बावजूद सूखा आलूबुखारा रक्त शर्करा को नहीं बढ़ाता है और मधुमेह के खतरे को कम करता है।
• फाइबर से भरपूर होने के कारण आलूबुखारे को कब्ज के इलाज में फायदेमंद माना जाता है। सूखे आलू बुखारे से सेवन से कब्ज से निजात मिल सकती है।
• आलूबुखारा दिल का भी दोस्त है, क्योंकि यह उच्च रक्तचाप को भी नियंत्रित कर सकता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को भी। अपने इन्हीं गुणों के कारण यह दिल को बीमारियों से बचाए रखता है।
• जरूरी बात : आलूबुखारा में पेट साफ करने का प्राकृतिक गुण होता है। इसलिए, इसके अत्यधिक सेवन से डायरिया हो सकता है।
सूखे आलूबुखारे के ज्यादा सेवन से गैस की समस्या हो सकती है। सूखे आलूबुखारे के अधिक सेवन से शरीर में पोटैशियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे सीने में दर्द, सांस की तकलीफ, जी मिचलाना और उल्टी की शिकायत हो सकती है।
( विशेष : यहां आलूबुखारे के गुण और उपयोग के बारे में विशुद्ध सामान्य जानकारी दी गई है। परंतु सामान्य जानकारी चिकित्सकीय परामर्श का विकल्प कदापि नहीं है। इसलिए हम किसी उपाय अथवा जानकारी की सफलता का दावा नहीं करते हैं। रोग विशेष के उपचार में आलूबुखारे को औषधि रूप में अपनाने से पूर्व योग्य आयुर्वेदाचार्य / चिकित्सक /आहार विशेषज्ञ से परामर्श आवश्यक है।)