
Google : जब आप किसी लिंक पर क्लिक करते हैं, तो वह ब्राउज़र में विज़िटेड लिंक (Visited Link) माना जाता है। सामान्यतः ऐसा लिंक नीले से बैंगनी (Purple) रंग में बदल जाता है, जिससे पता चलता है कि वह पहले क्लिक किया जा चुका है।
लेकिन यह रंग केवल उसी वेबसाइट तक सीमित नहीं रहता था — यदि वही लिंक किसी दूसरी वेबसाइट पर हो, तो वहां भी वह बैंगनी दिखता था।
इसी विशेषता का फायदा उठाकर कुछ वेबसाइट्स यह जान सकती थीं कि आप किन-किन पेजेज़ पर पहले जा चुके हैं।
CSS के :visited सेलेक्टर का उपयोग करके वेबसाइट्स यह जांच सकती थीं कि कोई खास लिंक यूज़र ने पहले विज़िट किया है या नहीं।
इससे वे आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री तक पहुँचने में सक्षम थीं — एक गंभीर प्राइवेसी खामी!
यह बग लगभग 23 वर्षों से विभिन्न ब्राउज़र्स में मौजूद था।
गूगल ने एक नया तीन-स्तरीय सिक्योरिटी सिस्टम विकसित किया है जो इस बग को जड़ से खत्म करता है।
अब यदि आपने किसी साइट A पर कोई लिंक क्लिक किया है, तो वही लिंक साइट C पर विज़िटेड (बैंगनी) नहीं दिखाई देगा।
इसका मतलब यह है कि अब कोई भी वेबसाइट यह नहीं जान पाएगी कि आप किसी लिंक पर पहले जा चुके हैं या नहीं।
गूगल ने अपने Chrome Dev Blog में बताया कि :visited से जुड़ी CSS कोडिंग को इस तरह बदला गया है कि अब वह केवल उसी साइट तक सीमित रहेगा।
इसके अलावा, iframe और अन्य ब्राउज़र फ्रेम्स में :visited स्टेट को एक्सेस करना भी लगभग असंभव बना दिया गया है।
गूगल ने घोषणा की है कि Chrome का वर्जन 136 इस बग को पूरी तरह फिक्स कर देगा।
यह अपडेट 23 अप्रैल 2025 तक सभी यूज़र्स को स्टेबल चैनल पर उपलब्ध हो जाएगा।
बीटा टेस्टर्स और नाइटली बिल्ड्स यूज़ करने वाले यूज़र्स पहले से इस समस्या से सुरक्षित हैं।
प्राइवेसी का युग: यूज़र्स अब अपनी ऑनलाइन जानकारी को लेकर ज्यादा सतर्क हैं।
डेटा लीक की बढ़ती घटनाएं: ऐसे में यह बग आपकी निजी जानकारी को खतरे में डाल सकता था।
गूगल की विश्वसनीयता: इतने पुराने बग को आखिरकार फिक्स करना गूगल के यूज़र-सेंट्रिक विज़न को दर्शाता है।
सुनिश्चित करें कि आपने अपने Chrome ब्राउज़र को लेटेस्ट वर्जन (136) में अपडेट किया है।
अगर आप बीटा यूज़र नहीं हैं, तो स्टेबल अपडेट के लिए 23 अप्रैल तक इंतज़ार करें।
सिक्योरिटी अपडेट्स को हमेशा प्राथमिकता दें। Google :