
बलूचिस्तान के तुर्बत जिले में एक नाबालिग छात्र पर आतंकवाद का मुकदमा दर्ज कर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं। मामला एक वीडियो साझा करने से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता का भाषण था। अदालत ने फिलहाल छात्र को ज़मानत दे दी है, लेकिन मानवाधिकार समूहों और नागरिक समाज ने इस कार्रवाई को 'कानून का दुरुपयोग' करार दिया है। Balochistan
मकरान क्षेत्र की काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने तुर्बत के अबसार क्षेत्र के निवासी 17 वर्षीय सोहैब खालिद के खिलाफ आतंकवाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की। आरोप है कि सोहैब ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक पर गुलज़ार दोस्त नामक नागरिक समाज के सदस्य का एक भाषण साझा किया। गुलज़ार दोस्त आतंकवाद-रोधी कानून की चौथी अनुसूची में सूचीबद्ध व्यक्ति हैं।
सोहैब के वकील जदैन दश्ती ने अदालत में यह तर्क दिया कि छात्र नाबालिग है और उसे यह तक ज्ञात नहीं था कि साझा किया गया वीडियो कानूनी दृष्टि से संवेदनशील है। उन्होंने आरोपों को ‘बेबुनियाद और गैर-तार्किक’ बताया। वकील ने यह भी कहा कि मामले की FIR दर्ज होते ही छात्र के पिता को उसे अदालत में पेश करने के लिए बाध्य होना पड़ा।
मानवाधिकार संगठनों ने इस घटनाक्रम की तीखी आलोचना की है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने बयान जारी कर कहा कि “एक नाबालिग छात्र को आतंकवादी की तरह अदालत में पेश करना न्याय और मानवाधिकारों की मूल भावना के खिलाफ है।” आयोग ने यह भी मांग की कि प्राथमिकी तत्काल वापस ली जाए और इस घटनाक्रम के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। Balochistan