इस देश के राष्ट्रपति ने बुर्का-हिजाब पर लगाया बैन, मजहब को लेकर कह दी बड़ी बात!
Burqa Ban
भारत
RP Raghuvanshi
10 Jul 2025 04:16 PM
Burqa Ban : जाने-माने इस्लामिक देश से एक ऐसा फैसला सामने आया है जिसने रूढ़िवाद की दीवारों को हिलाकर रख दिया है। दरअसल कजाकिस्तान ने सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकने यानी बुर्का, नकाब और हिजाब पर कानूनी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव ने अपराध रोकथाम कानून में संशोधन पर हस्ताक्षर कर इस फैसले पर मुहर लगा दी है।
क्या है कजाकिस्तान का साफ संदेश?
कजाकिस्तान के राष्ट्रपति टोकायेव ने अपने बयान में कहा, "हम अपने समाज में बराबरी, पारदर्शिता और खुली सोच को बढ़ावा देना चाहते हैं। चेहरा छुपाना हमारी परंपरा नहीं बल्कि बाहरी प्रभाव है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि हिजाब या नकाब इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं, बल्कि एक सामाजिक चलन है जिसे कट्टरपंथ ने धर्म के नाम पर धीरे-धीरे स्थापित कर दिया।
सुरक्षा से जुड़ा है पर्दा कानून
सरकार का कहना है कि, यह फैसला सिर्फ धार्मिक प्रतीकों या फैशन को लेकर नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता और पहचान से जुड़ा हुआ है। चेहरा ढकने की प्रथा सार्वजनिक जीवन में बाधा बन रही थी। पहचान की दिक्कत, सामाजिक संवाद में रुकावट और चरमपंथी विचारों की आड़ भी इसी पर्दे में छुपी थी।
स्कूलों से हुई थी शुरुआत
कजाकिस्तान में इस बदलाव की नींव कई साल पहले रखी जा चुकी थी। 2017 में छात्राओं के हिजाब पहनने पर रोक लगाई गई। 2023 तक ये नियम स्कूलों के स्टाफ और शिक्षकों पर भी लागू कर दिया गया। हालांकि इससे कुछ छात्राओं ने पढ़ाई भी छोड़ दी, लेकिन सरकार अपने रुख पर अडिग रही।
महिला अधिकारों के नाम पर साहसिक फैसला
बीते वर्षों में कजाकिस्तान में धार्मिक उग्रवाद ने धीरे-धीरे अपने पांव पसारने शुरू कर दिए थे। महिलाओं पर हिजाब-बुर्का पहनने का दबाव बढ़ने लगा था। ऐसे में सरकार ने स्पष्ट किया कि धर्म की आड़ में व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बंधक नहीं बनाया जा सकता। सरकार का यह कदम एंटी-इस्लामिक नहीं बल्कि प्रगतिशील सोच का प्रतीक माना जा रहा है, जिसमें धर्म और आधुनिकता साथ चल सकते हैं।
क्या बाकी इस्लामिक देश लेंगे सबक?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अन्य इस्लामिक देश भी कजाकिस्तान की तरह महिलाओं को उनके फैसलों की आजादी देंगे? क्या पर्दा अब जरूरत नहीं, बल्कि विकल्प बनेगा? कजाकिस्तान का यह बड़ा निर्णय बताता है कि जब सरकार मजबूत इच्छाशक्ति दिखाए, तो मजहब और मॉडर्न सोच एक साथ चल सकते हैं। यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिला स्वाभिमान और स्वतंत्रता की वापसी है।