
S. Jaishankar : भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण रिश्तों में संवाद की राह फिर से खोलने की कोशिश के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार को बीजिंग पहुंचे। यात्रा की शुरुआत उन्होंने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से शिष्टाचार भेंट कर की । यह भेंट केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद की पुनर्बहाली के संकेत देती दिखी। बीजिंग आगमन के कुछ ही देर बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मुलाकात की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, आज बीजिंग पहुंचते ही उपराष्ट्रपति हान झेंग से मिलकर प्रसन्नता हुई। भारत ने चीन की एससीओ अध्यक्षता को लेकर अपना समर्थन दोहराया।
जयशंकर और हान झेंग के बीच हुई इस चर्चा में भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में संतुलन और सुधार के रास्तों पर फोकस रहा। विदेश मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह यात्रा परस्पर समझ और विश्वास बहाली के लिए सकारात्मक आधार तैयार करेगी। यह पहल ऐसे वक्त में हो रही है जब लद्दाख सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं और संवाद की संभावनाएं सीमित दिखाई दी थीं।
बीजिंग यात्रा से पहले जयशंकर सिंगापुर में थे, जहां उन्होंने उप प्रधानमंत्री गैन किम योंग से मुलाकात की। इस बातचीत में भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठे। विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
उन्होंने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन से भी मुलाकात की। जयशंकर ने कहा कि सिंगापुर, भारत की 'एक्ट ईस्ट नीति' का अहम स्तंभ है। वहीं बालाकृष्णन ने कहा, “जैसे-जैसे विश्व बहुध्रुवीयता की दिशा में बढ़ रहा है, भारत वैश्विक संतुलन के एक महत्वपूर्ण ध्रुव के रूप में उभरता जा रहा है।
विदेश मंत्री की चीन यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भाग लेना है, जो तियानजिन में आयोजित हो रहा है। इस मंच पर सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों पर समन्वय के लिए विचार-विमर्श करेंगे। भारत इस मंच पर एक जिम्मेदार और निर्णायक भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है। S. Jaishankar