गाजा नरसंहार के आरोप में फंसी इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी, दर्ज हुआ मुकदमा!
भारत
चेतना मंच
08 Oct 2025 03:24 PM
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। उनके खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट आॅफ जस्टिस में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि मेलोनी ने गाजा में नरसंहार के लिए जिम्मेदार इजराइल को हथियार मुहैया कराए, जिनसे हजारों नागरिकों की मौत हुई। हालांकि ऐसा नहीं है कि इजराइल को सिर्फ जॉर्जिया मेलोनी ने ही हथियार बेचे हैं, कई अन्य देशों ने भी हथियार सप्लाई की है और कर रहे हैं। Gaza Massacre :
आरोप क्या हैं?
मुकदमे में कहा गया है कि मेलोनी की सरकार ने 2022 से 2023 के बीच इजराइल को 136.3 करोड़ के हथियार बेचे, जिनमें नौसैनिक तोपें, गोला-बारूद और अन्य हथियार शामिल थे। इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा में हुआ, जहां हजारों लोग मारे गए। मेलोनी ने खुद इस मुकदमे की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि "यह दुनिया का इकलौता मामला है, जिसमें झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। मेरे रक्षा और विदेश मंत्री पर भी केस दर्ज किया गया है।"
गाजा पर मेलोनी की नीति
मेलोनी को गाजा मुद्दे पर हमेशा ढुलमुल रवैये के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है। उन्होंने आज तक फिलिस्तीन को एक अलग देश के रूप में मान्यता नहीं दी, जबकि फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे देश ऐसा कर चुके हैं। इटली में लेफ्ट पार्टियों का दबदबा है, जो फिलिस्तीन के समर्थन में मुखर रहती हैं। ऐसे में यह केस मेलोनी पर राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है। 2027 में होने वाले आम चुनाव से पहले यह मुकदमा मेलोनी की छवि पर असर डाल सकता है। यदि कोर्ट ने मामला स्वीकार किया और दोष सिद्ध हुआ, तो यह उनकी गिरफ्तारी तक का कारण बन सकता है।
इंटरनेशनल कोर्ट की प्रक्रिया
इंटरनेशनल कोर्ट पहले तय करता है कि मामला सुना जाएगा या नहीं। अगर हाँ, तो दोनों पक्षों को नोटिस जारी होता है। लंबी सुनवाई के बाद जज फैसला सुनाते हैं। हालांकि, आईसीजे अपने फैसले को खुद लागू नहीं कर सकता, यह जिम्मेदारी सदस्य देशों पर होती है। गाजा नरसंहार का आरोप इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी लगा था। उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन इजराइल आईसीजे का सदस्य नहीं है, इसलिए वारंट का खास असर नहीं हुआ। इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी पर यह मुकदमा यूरोप की राजनीति में बड़ा भूचाल ला सकता है। गाजा पर उनकी नीति पहले ही विवादों में रही है, और अब इंटरनेशनल कोर्ट की यह कार्यवाही उनके करियर का सबसे कठिन मोड़ साबित हो सकती है।