सिंधु जल संधि स्थगित होने से भारत को बड़ा फायदा, दूरदराज के इलाकों को भी होगा मोटा मुनाफा
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भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:27 PM
International News : भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से स्थगित करने के बाद इसके प्रत्यक्ष और सकारात्मक असर सामने आने लगे हैं। विशेषकर जम्मू-कश्मीर के सलाल और बगलिहार जल विद्युत परियोजनाओं पर इसका लाभ देखने को मिला है। सरकार ने इस कदम के बाद इन बांधों में बड़े पैमाने पर सिल्ट (गाद) हटाने का अभियान शुरू किया, जिससे उनकी जल भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी हुई है और अब ये दोनों बांध 15-20% अधिक बिजली उत्पादन करने में सक्षम हो गए हैं।
भारत ने पाकिस्तान को जारी किया नोटिस
10 मई 2025 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर समझौते के बावजूद, भारत सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला लिया। इसी के तहत भारत ने पाकिस्तान को संधि के पुनरावलोकन के लिए नोटिस भी जारी किया। इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि भारत को अब सलाल (690 मेगावाट) और बगलिहार (900 मेगावाट) डैम्स पर बिना संधि-सीमाओं के पूर्ण रखरखाव की अनुमति मिल गई। पहले, संधि के तहत भारत को सीमित डिसिल्टिंग की ही अनुमति थी, जिससे सालों से बांधों में जमा गाद उनकी कार्यक्षमता घटा रही थी।
कैसे बढ़ी उत्पादन क्षमता?
चिनाब नदी से आने वाली भारी मात्रा में सिल्ट बांधों की स्टोरेज क्षमता को लगातार घटा रही थी।
अब जब भारत ने फ्लैशिंग यानी सिल्ट हटाने का व्यापक अभियान शुरू किया, तो टरबाइनों को स्थिर जलदबाव मिला और उनकी क्षमता पूरी तरह उपयोग होने लगी।
इससे बिजली उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव हुई है।
यह न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की स्थानीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड में भी भेजा जा सकेगा।
पहले से अधिक सतर्क और सक्रिय
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी जिसमें भारत को व्यास, सतलुज और रावी नदियों का पानी और पाकिस्तान को झेलम, चेनाब और सिंधु नदियों का पानी दिए जाने की व्यवस्था थी। लेकिन अब भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी नदियों पर अपने नियंत्रण को लेकर पहले से अधिक सतर्क और सक्रिय है।
जम्मू-कश्मीर को सीधा फायदा
स्थानीय स्तर पर बिजली की मांग पूरी होगी, जिससे गांवों व दूरदराज के इलाकों तक रोशनी और विकास पहुंचेगा। साथ ही इन परियोजनाओं से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली से राजस्व भी बढ़ेगा, जो जम्मू-कश्मीर के विकास में सहायक होगा। International News