परमाणु ठिकाने तबाह, टॉप जनरल ढेर... फिर भी ईरान को निर्णायक झटका देने से क्यों चूक गया इजरायल?
Iran-Israel War
भारत
चेतना मंच
13 Jul 2025 06:59 PM
Iran-Israel War : पश्चिम एशिया एक बार फिर बम धमाकों और मिसाइलों की गूंज से थर्रा उठा जब इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक चली भीषण जंग का सिलसिला सामने आया। इस संघर्ष में इजरायल ने ईरान के कई सैन्य और परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया, बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया और यहां तक कि ईरानी सेना के टॉप कमांडर्स और वैज्ञानिकों को मार गिराने का भी दावा किया गया। लेकिन इस सब के बावजूद, वह एक निर्णायक चोट देने से चूक गया और यह चूक रणनीतिक स्तर पर बेहद अहम मानी जा रही है।
सैन्य टॉप ब्रास को किया गया टारगेट
मीडिया रिपोर्ट्स और ईरानी सूत्रों के अनुसार, संघर्ष के दौरान ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख चेहरे हुसैन सलामी, सशस्त्र बल प्रमुख मोहम्मद बाघेरी और एयरफोर्स कमांडर अमीर अली हाजीजादेह इजरायली हमलों में मारे गए। इसके अलावा, कई परमाणु वैज्ञानिकों को भी ड्रोन स्ट्राइक और मिसाइल हमलों में निशाना बनाया गया। इजरायल और अमेरिका दोनों की लंबे समय से यह रणनीति रही है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को सैन्य दबाव से पीछे धकेला जाए।
राष्ट्रपति पर हमला, लेकिन बच गए
16 जून को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पर भी जानलेवा हमला हुआ। पश्चिमी तेहरान में शाहरक-ए-गर्ब इलाके की एक इमारत पर मिसाइलें तब दागी गईं जब वहां ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक चल रही थी। राष्ट्रपति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उस समय इमारत की निचली मंजिल पर मौजूद थे। हमले के बाद अफरा-तफरी मच गई, बिजली गुल हो गई और इमरजेंसी एग्जिट से सभी को निकालने की कोशिश की गई। इस हमले में पेजेशकियान के पैर में चोट आई और कुछ अन्य अधिकारियों को भी हल्की चोटें आईं। बाद में राष्ट्रपति ने सार्वजनिक तौर पर इजरायल पर उनकी हत्या की कोशिश का आरोप लगाया। अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन को दिए एक इंटरव्यू में पेजेशकियान ने कहा, "उन्होंने कोशिश की, पूरी योजना के तहत किया गया हमला था। लेकिन वे सफल नहीं हो सके।"
तो आखिर क्या रह गया अधूरा?
इस सैन्य अभियान को विश्लेषक 'सर्जिकल इंटेंसिटी' वाला हमला मानते हैं, लेकिन इसके बावजूद इजरायल वह आखिरी वार करने से चूक गया, जो ईरान की राजनीतिक और वैचारिक रीढ़ पर असर डालता अर्थात सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को टारगेट करना। कुछ खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने खामेनेई को भी निशाने पर लेने की योजना बनाई थी, लेकिन "सही समय और स्थिति" न मिल पाने के कारण आॅपरेशन रद करना पड़ा।
हमले की टाइमिंग और रणनीति पर सवाल
रिपोर्टों के मुताबिक, यह पूरी सैन्य योजना उस वक्त तैयार की गई थी जब हिज्बुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह बेरूत में एक ड्रोन हमले में मारे गए थे। उसी के बाद यह अटैक सीरीज शुरू हुई। हमले इतने सटीक थे कि इमारतों के प्रवेश और निकास मार्गों को पहले ही मिसाइलों से ध्वस्त कर दिया गया, ताकि अधिकारी फंस जाएं। लेकिन जानकार मानते हैं कि भले ही इजरायल ने सामरिक रूप से बड़ी सफलता पाई हो, लेकिन नेतृत्व-स्तर की चोट देने से चूक जाने का असर भविष्य की रणनीति पर पड़ेगा। इजरायल ने भले ही ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और परमाणु ठिकानों को नष्ट किया, और शीर्ष स्तर के सैन्य नेताओं को मार गिराया। लेकिन सुप्रीम लीडर जैसे राजनीतिक प्रतीकों को न छू पाने की रणनीतिक असफलता भविष्य की जंग में ईरान को फिर से संगठित होने का मौका दे सकती है। इस युद्ध विराम के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता रही, लेकिन इस टकराव से यह तो तय हो गया है कि पश्चिम एशिया की जंग अब "शब्दों की" नहीं, बल्कि "सटीक निशानेबाजी" की हो चुकी है।