पाकिस्तान ने बांग्लादेश को कराची पोर्ट आफर किया, भारत के लिए बढ़ी टेंशन
भारत
चेतना मंच
28 Oct 2025 05:28 PM
दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक मानचित्र पर हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान ने बांग्लादेश को अपने कराची पोर्ट के इस्तेमाल की पेशकश की है। वही बंदरगाह जो उसकी समुद्री अर्थव्यवस्था का केंद्र माना जाता है। यह प्रस्ताव ढाका में आयोजित पाकिस्तान-बांग्लादेश संयुक्त आर्थिक आयोग की 9वीं बैठक में रखा गया, जो लगभग दो दशक बाद हुई है। बैठक की अध्यक्षता पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक और बांग्लादेश के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद ने की। पाकिस्तान ने दावा किया कि कराची पोर्ट से बांग्लादेश को चीन, खाड़ी देशों और मध्य एशिया के बाजारों तक सीधी पहुँच मिलेगी। यानी भारत को बीच से हटाकर एक नया आर्थिक गलियारा बनाया जा सकता है। Islamabad/Dhaka :
क्या यह भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती है
पाकिस्तान का यह कदम ऐसे समय आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों में शीतलता बढ़ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद ढाका की नीतियों में भारत के प्रति गर्मजोशी कम हुई है। हाल ही में अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने एक पाकिस्तानी जनरल को विवादित नक्शा भेंट किया था, जिसमें भारत के असम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से बांग्लादेश से जुड़े दिखाए गए थे जिसने दिल्ली में नाराजगी और गहरा दी। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह आॅफर सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक चाल है। यह भारत के लिए दोहरी चुनौती पेश करता है। पहला आर्थिक मोर्चे पर, क्योंकि बांग्लादेश को एक वैकल्पिक समुद्री रास्ता मिल सकता है। दूसरा राजनीतिक मोर्चे पर, क्योंकि इससे भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी पर सीधा असर पड़ सकता है।
भारत की नीति का जवाब या रणनीतिक जाल?
दरअसल, भारत ने अप्रैल 2025 में बांग्लादेश की ट्रांजिट सुविधा समाप्त कर दी थी। पहले बांग्लादेश भारतीय भूमि के जरिए अपने माल को तीसरे देशों तक भेज सकता था, लेकिन नई नीति के तहत यह छूट खत्म कर दी गई। अब पाकिस्तान उसी खाली स्थान को भरने की कोशिश कर रहा है, खुद को विश्वसनीय विकल्प के तौर पर पेश करते हुए। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रस्ताव सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि एक जियोस्ट्रैटेजिक सिग्नल है। पाकिस्तान चाहता है कि भारत की कूटनीतिक पकड़ कमजोर पड़े और ढाका धीरे-धीरे इस्लामाबाद के प्रभाव क्षेत्र में वापस लौटे।
1971 के बाद पहली बार गर्माहट
1971 के विभाजन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा ठंडे रहे। लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ा है। अगस्त में पाक विदेश मंत्री इशाक डार ने ढाका जाकर यूनुस और वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। दोनों देशों ने तब वीजा प्रतिबंध हटाने और सरकारी आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति दी थी। अब कराची पोर्ट आॅफर के साथ यह सिलसिला एक नए अध्याय में प्रवेश कर गया है।
भारत के लिए संकेत क्या हैं
दक्षिण एशिया में प्रॉे-इंडिया गठजोड़ कमजोर हो सकता है। पाकिस्तान-बांग्लादेश के बढ़ते रिश्ते, चीन की स्ट्रिंग आॅफ पर्ल्स स्ट्रैटेजी को ताकत दे सकते हैं। भारत को पूर्वी समुद्री गलियारे (बंगाल की खाड़ी से अंडमान तक) की सुरक्षा पर अब ज्यादा फोकस करना होगा।
नई दिल्ली की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी है क्योंकि अगर ढाका कराची पोर्ट आॅफर को स्वीकार कर लेता है, तो यह न सिर्फ इकोनॉमिक गेम चेंजर होगा, बल्कि स्ट्रैटेजिक झटका भी साबित हो सकता है।