टीटीपी की नई रणनीति से पाकिस्तान में हड़कंप : अब तक 114 अफसर किडनैप
भारत
चेतना मंच
03 Nov 2025 05:01 PM
पाकिस्तान में आतंकवाद की जड़ें एक बार फिर गहरी होती दिख रही हैं। साल 2025 के सितंबर तक सिर्फ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 114 सरकारी अधिकारियों का अपहरण किया जा चुका है। यही आंकड़ा बलूचिस्तान में भी लगभग समान है। पिछले साल यानी 2024 के सितंबर तक यह संख्या 100 से कम थी। ताजा घटनाओं में, आतंकियों ने इस्लामाबाद से एक वरिष्ठ साइबर क्राइम अधिकारी को गनप्वॉइंट पर अगवा कर लिया। यह घटना उस राजधानी में हुई जिसे पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता है। Islamabad News :
आतंकी अब किडनैप स्ट्रैटजी क्यों अपना रहे हैं?
पाकिस्तानी सेना ने हाल के महीनों में आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियानों को तेज किया है। साइबर सेल और खुफिया एजेंसियों की मदद से सेना ने 250 से ज्यादा टीटीपी आतंकियों को ढेर किया है। मारे गए आतंकियों में संगठन का डिप्टी कमांडर भी शामिल बताया जा रहा है। सेना की तकनीकी बढ़त को कमजोर करने के लिए टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) अब साइबर सेल और इंटेलिजेंस नेटवर्क से जुड़े अफसरों को निशाना बना रही है। किडनैप कर उन्हें या तो बंधक बनाया जा रहा है या मारा जा रहा है।
जिरगा आदेश : अफसर ही अब निशाने पर
साल 2025 की शुरुआत में टीटीपी ने एक जिरगा (बैठक) में फैसला लिया था कि अब उसके हमले सिर्फ सरकारी अधिकारियों और सेना से जुड़े लोगों पर होंगे। इस रणनीति के तहत आतंकियों ने पहले किडनैप, फिर एक्शन की नीति अपनाई है। पाकिस्तान सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के सितंबर तक टीटीपी ने 700 से ज्यादा हमले किए हैं। इन हमलों में 260 से अधिक जवानों की मौत हुई है। वहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने भी सेना पर 300 से ज्यादा अटैक किए हैं। वर्तमान में टीटीपी के पास लगभग 8,000, जबकि बीएलए के पास करीब 4,000 लड़ाके सक्रिय बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा अंदरूनी खतरा
यह पहला मौका है जब पाकिस्तान में राज्य अधिकारी और सुरक्षा तंत्र के सदस्य आतंकियों के सबसे बड़े टारगेट बने हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह रणनीति पाकिस्तान की खुफिया प्रणाली को पंगु करने की दिशा में बड़ा कदम है।
यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले महीनों में सरकारी मशीनरी का मनोबल टूटना तय है। Islamabad News