चीन का स्टील्थ वार: पाकिस्तान के जरिए भारत को घेरने की साजिश?
J-35A Stealth Fighter
भारत
चेतना मंच
25 Jun 2025 03:01 PM
J-35A Stealth Fighter : चीन ने अपनी अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी की स्टील्थ मल्टीरोल फाइटर जेट J-35A को वैश्विक बाजार में बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। इसकी सबसे पहली डील पाकिस्तान से होने की खबर है जो भारत की सुरक्षा चिंताओं को और भी गहरा बना रही है। इस जेट की क्षमताएं और पाकिस्तान को इसकी संभावित आपूर्ति, भारत के लिए एक गंभीर सैन्य और रणनीतिक चुनौती बन सकती हैं।
J-35A: क्या है ये स्टील्थ फाइटर जेट?
J-35A को चीन की शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ने विकसित किया है। यह पहले FC-31 प्रोटोटाइप पर आधारित है, जिसे खास तौर पर निर्यात के लिए डिजाइन किया गया था। J-35 के दो वैरिएंट हैं:
J-35A: जमीन से ऑपरेट होने वाला मॉडल, जो वायुसेना के लिए है।
J-35: विमानवाहक पोतों से उड़ान भरने वाला नौसेना संस्करण।
इसकी प्रमुख खूबियां
स्टील्थ डिजाइन: रडार से बचने के लिए खास इनलेट डिजाइन और आंतरिक हथियार ले जाने की व्यवस्था।
आधुनिक एवियोनिक्स: AESA रडार, IRST सेंसर और उन्नत डेटा फ्यूजन तकनीक।
हथियार क्षमता: 8,000 किलो तक हथियार, जिसमें 400 किमी रेंज वाली PL-17 मिसाइल भी शामिल है।
इंजन: WS-13E या WS-19 इंजन, जो सुपरसोनिक उड़ान बिना आफ्टरबर्नर के (सुपरक्रूज) देने में सक्षम हैं।
चीन की बिक्री रणनीति और पाकिस्तान का रोल
नवंबर 2024 के ज़ुहाई एयरशो में J-35A को पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाया गया। इसके बाद चीन ने इसे वैश्विक हथियार बाजार में उतारने की योजना बनाई है।
पाकिस्तान: पहला संभावित खरीदार। 40 J-35A जेट्स की डील लगभग तय है। डिलीवरी अगस्त 2025 से शुरू हो सकती है और पाकिस्तानी पायलट पहले ही प्रशिक्षण ले रहे हैं।
अन्य ग्राहक: मिस्र, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं।
कम कीमत, ज्यादा आकर्षण: F-35 जैसे पश्चिमी स्टील्थ जेट्स की तुलना में J-35A की कीमत काफी कम होगी, जिससे विकासशील देश इसकी ओर आकर्षित हो सकते हैं।
चीन की रणनीति: पाकिस्तान के जरिए इस जेट को “युद्ध-प्रमाणित” साबित कर दूसरे देशों को लुभाना।
भारत के लिए क्यों है ये खतरा?
पांचवीं पीढ़ी का अंतर
भारत के पास फिलहाल कोई पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है। AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) परियोजना अभी विकास के चरण में है और इसका पहला फुल ऑपरेशनल मॉडल 2035 से पहले आने की संभावना नहीं है।
पाकिस्तान की बढ़ती ताकत
JF-17 और F-16 जैसे पुराने जेट्स की तुलना में J-35A कहीं अधिक उन्नत है। इसकी स्टील्थ और लंबी दूरी की मिसाइलें भारतीय एयर डिफेंस, यहां तक कि S-400 सिस्टम को भी चुनौती दे सकती हैं।
चीन-पाकिस्तान का गठजोड़
J-35A की आपूर्ति से चीन-पाकिस्तान की सैन्य साझेदारी और गहरी होगी। भविष्य में चीन के J-20 और पाकिस्तान के J-35A साथ में ऑपरेट कर सकते हैं, जिससे भारत को दो मोर्चों पर दबाव झेलना पड़ेगा।
हवाई संतुलन का बिगड़ना
IAF के पास सिर्फ 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि ज़रूरत 42 की है। अगर पाकिस्तान J-35A से लैस होता है, तो वह भारत के अंदर तक हमले और हवाई नाकेबंदी की क्षमता हासिल कर सकता है।
क्षेत्रीय असर
अगर मिस्र और अन्य देश भी J-35A खरीदते हैं, तो चीन हथियार बाजार में और मज़बूत हो जाएगा। इससे भारत की कूटनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
भारत की मौजूदा चुनौतियां
AMCA में देरी: अभी डिजाइन और टेस्टिंग चरण में है। प्रोटोटाइप 2028-29 तक और फुल स्केल तैनाती 2035 तक संभव।
रडार और मिसाइल चुनौती: J-35A की स्टील्थ तकनीक और PL-17 जैसी मिसाइलें भारत की मौजूदा रडार पकड़ और एयर डिफेंस को मात दे सकती हैं।
तकनीकी निर्भरता: भारत को इंजन और अत्याधुनिक सेंसर में अभी विदेशी मदद की जरूरत है।
भारत की संभावित रणनीति
तत्काल कदम
मौजूदा जेट्स का उन्नयन: राफेल और Su-30MKI को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और मेटियोर जैसी मिसाइलों से लैस करना।
Su-57 जैसे विकल्पों पर विचार: रूस के Su-57 को अस्थायी समाधान के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन यह राजनीतिक और तकनीकी रूप से जटिल फैसला होगा।
रडार नेटवर्क को मजबूत बनाना: ओवर-द-होराइज़न रडार और इंटीग्रेटेड डेटा नेटवर्क पर निवेश बढ़ाना।
दीर्घकालिक रणनीति
AMCA कार्यक्रम को तेज करना: निजी कंपनियों और वैश्विक साझेदारों को जोड़कर इसे मिशन मोड में लाना।
स्वदेशी तकनीक में आत्मनिर्भरता: इंजन, रडार, एवियोनिक्स और स्टील्थ टेक्नोलॉजी में भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा।
IAF की स्क्वाड्रन संख्या बढ़ाना: तेजी से नए विमानों की खरीद और उत्पादन जरूरी है।
कूटनीतिक मोर्चा
अमेरिका, फ्रांस और इज़राइल जैसे रक्षा साझेदारों से तकनीकी सहयोग बढ़ाना।
क्षेत्रीय गठबंधन मजबूत करना ताकि चीन की सैन्य बिक्री और प्रभाव को संतुलित किया जा सके।