भारत के खिलाफ साजिश नाकाम, अब पाक को सता रहा थ्री-फ्रंट वॉर का डर
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 02:49 AM
भारत के खिलाफ पाकिस्तान और चीन की दो-मोर्चे की रणनीति पूरी तरह विफल हो चुकी है। मई 2025 में हुए चार दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष (आॅपरेशन सिंदूर) के बाद से इस्लामाबाद की सैन्य और राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर पड़ रही है। अब वही पाकिस्तान, जो भारत को टू-फ्रंट वॉर की चुनौती देने की बात करता था, थ्री-फ्रंट वॉर के खतरे से खुद घिर गया है। भारत, आतंकी संगठनों और बलूच विद्रोहियों से एक साथ उसे निपटना पड़ रहा है। New Delhi News :
आपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की छवि सुधार कवायद
आपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। इस कार्रवाई में भारत ने कई आतंकी ठिकाने और रणनीतिक पोस्ट तबाह किए। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम की अपील की गई और देश के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल बढ़ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से पाकिस्तान ने राहत लेने की कोशिश की। उन्होंने पाकिस्तान को स्थिरता की दिशा में प्रयासरत देश बताया। लेकिन हकीकत यह है कि पाकिस्तान की स्थिति आज पहले से कहीं ज्यादा असुरक्षित और बिखरी हुई है।
अब क्यों डर रहा है पाकिस्तान तीन मोर्चों के युद्ध से?
पूर्वी मोर्चा पर भारत की रणनीतिक बढ़त बनी हुई है। भारत ने पिछले एक साल में न सिर्फ सीमाई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है, बल्कि पूर्वी लद्दाख से लेकर राजस्थान तक युद्ध तैयारी में भारी सुधार किया है। एकीकृत थिएटर कमांड की तैनाती ने भारत की युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। पाकिस्तान के भीतर अब खुद उसके दुश्मनों की फौज खड़ी हो गई है। टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) ने 2025 में अब तक 700 से ज्यादा हमले किए हैं, जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) भी दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में 300 से अधिक हमले कर चुकी है। दोनों गुट अब खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना को निशाना बना रहे हैं।
उत्तरी मोर्चा पर चीन की ठंडी रणनीति
चीन, जिसने पहले भारत के खिलाफ पाकिस्तान को खुला समर्थन दिया था, अब पीछे हटता दिख रहा है। गलवान और डोकलाम के सबक के बाद चीन अब खुली टकराव की नीति से बच रहा है। सीमा पर अब उनकी गतिविधियां रक्षात्मक दिखाई दे रही हैं। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान का पारंपरिक सुरक्षा सिद्धांत पूर्व में भारत, पश्चिम में रणनीतिक गहराई अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
अफगानिस्तान से तालिबान का रुख ठंडा है, चीन भरोसेमंद नहीं रहा और भीतर से बलूच व टीटीपी ने मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तान अब तीन दिशाओं से घिरा हुआ है। भारत से पारंपरिक खतरा, आतंकी संगठनों से गृहयुद्ध जैसा संकट, और बलूचिस्तान से अलगाववाद की आग।
भारत के लिए रणनीतिक फायदा
भारत ने इस पूरे समीकरण में डिफेंसिव डिप्लोमेसी अपनाई है। बिना सीधे मोर्चे पर उलझे, सीमा प्रबंधन, आर्थिक दबाव और तकनीकी खुफिया रणनीति से पाकिस्तान को कमजोर किया। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को किसी दो-मोर्चे वाले युद्ध से ज्यादा खतरा नहीं रहेगा, क्योंकि पाकिस्तान अब खुद अपने भीतर तीन जंग लड़ रहा है। New Delhi News