
Sheikh Hasina : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की राजनीतिक विरासत पर एक और गंभीर धब्बा लग गया है। ढाका की एक अदालत ने उनके खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों में औपचारिक आरोप तय करते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह वही शेख हसीना हैं, जिन्होंने वर्षों तक बांग्लादेश की सत्ता पर मज़बूती से पकड़ बनाए रखी, लेकिन सत्ता से हटने के बाद उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ढाका स्थित एक ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना, तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान और पूर्व पुलिस महानिदेशक अब्दुल्ला अल मामून के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। तीनों पर आरोप है कि उन्होंने सरकार विरोधी छात्र आंदोलनों को बलपूर्वक कुचलने का आदेश दिया, जिसके परिणामस्वरूप जनसंहार जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
गौरतलब है कि इन घटनाओं के बाद शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। असदुज्जमां खान भी फरार बताए जा रहे हैं, जबकि अब्दुल्ला अल मामून फिलहाल जेल में हैं और उन्होंने प्रारंभिक पूछताछ में आरोप स्वीकार भी कर लिए हैं।
इस बीच, अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने मई 2025 में कड़ा कदम उठाते हुए शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर आतंकवाद-रोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया। सरकार का कहना है कि जब तक पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) में चल रही कार्यवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।
सरकार ने यह प्रतिबंध देश की संप्रभुता, आंतरिक सुरक्षा और गवाहों-सहित पीड़ितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लगाया है। यूनुस की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में अंतरराष्ट्रीय अपराध कानून में संशोधन भी किया गया, जिसके तहत अब किसी भी राजनीतिक दल और उससे जुड़े संगठनों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार दिया गया है। Sheikh Hasina