बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलन को आगे बढ़ा रहे प्रमुख सशस्त्र गठबंधन बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) ने एक बार फिर पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बड़े हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि पंजगुर जिले के मतिन गोरान इलाके में स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्य शिविर पर हुए हमले में कम से कम 22 सैनिकों को मार गिराया गया, जबकि कैप्टन ओसामा समेत 14 से अधिक सैन्यकर्मी घायल हुए हैं।

बलूचिस्तान में अलगाववादी आंदोलन को आगे बढ़ा रहे प्रमुख सशस्त्र गठबंधन बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) ने एक बार फिर पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था को चुनौती देते हुए एक बड़े हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि पंजगुर जिले के मतिन गोरान इलाके में स्थित पाकिस्तानी सेना के मुख्य शिविर पर हुए हमले में कम से कम 22 सैनिकों को मार गिराया गया, जबकि कैप्टन ओसामा समेत 14 से अधिक सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। Balochistan
‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, बीआरएएस के प्रवक्ता बलूच खान ने रविवार को जारी एक बयान में बताया कि यह हमला शुक्रवार शाम करीब 6 बजे हुआ, जब संगठन के लड़ाकों ने 91 विंग के केंद्रीय सैन्य शिविर और उससे जुड़ी चौकियों पर तीन दिशाओं से घेरा डालकर हमला किया। दोनों पक्षों के बीच संघर्ष करीब दो घंटे तक चला, जिसमें हमलावरों ने शिविर के प्रमुख हिस्सों और दो रणनीतिक चौकियों पर कब्जा कर लिया।
BRS के मुताबिक इस अभियान के दौरान उनके लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना से भारी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण भी कब्जे में ले लिए, जिनमें कलाश्निकोव, G-3 राइफलें, मशीनगन, नाइट विजन डिवाइस और थर्मल स्कैनर शामिल हैं। संगठन का दावा है कि लड़ाई के दौरान सीपीईसी (चीन-पाक आर्थिक गलियारा) मार्ग को दो स्थानों पर अवरुद्ध कर दिया गया ताकि पाकिस्तानी फोर्सेज अतिरिक्त सहायता नहीं पहुंचा सकें। Balochistan
प्रवक्ता ने यह भी बताया कि हमले के दौरान निगरानी कैमरे नष्ट कर दिए गए, जिससे पाकिस्तान की खुफिया निगरानी प्रणाली को गहरा नुकसान पहुंचा। BRAS ने यह भी कहा कि उनके लड़ाकों ने एक कब्जे में ली गई चौकी पर तीन पाकिस्तानी जवानों को आत्मसमर्पण के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन बातचीत के दौरान संगठन के एक वरिष्ठ सदस्य अमीर उर्फ बाबा को पीछे से गोली मार दी गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
BRAS प्रवक्ता के अनुसार, अमीर बलूच लिबरेशन आर्मी से 2014 में जुड़े थे और वे शहरी व पर्वतीय दोनों मोर्चों पर सक्रिय रहे। संगठन ने उन्हें “बलिदान का प्रतीक” बताते हुए कहा कि अमीर और उनके साथियों का त्याग बलूच स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत नींव है। बीआरएएस ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक बलूचिस्तान की मुक्ति नहीं हो जाती और पाकिस्तानी सेना को पूर्णतः पीछे हटने पर मजबूर नहीं कर दिया जाता। Balochistan