अमेरिका-चीन के बीच 'टैरिफ वॉर' में ब्राजील बना गेमचेंजर, रेयर अर्थ भंडार से पलटेगा शक्ति संतुलन
भारत
चेतना मंच
25 Oct 2025 06:36 PM
दुनिया की आर्थिक रणनीति के केंद्र में अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स यानी दुर्लभ धातुएं आ चुकी हैं। और इस भू-राजनीतिक खेल में अब ब्राजील वह देश बन गया है, जिसके पास ऐसा हथियार है जो न सिर्फ अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा का रुख बदल सकता है, बल्कि नई वैश्विक शक्ति संतुलन की कहानी भी लिख सकता है। Tariff War :
रेयर अर्थ हाईटेक दुनिया की जीवनरेखा
रेयर अर्थ मेटल्स 17 ऐसी धातुएं हैं जो हर आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पैनल, मोबाइल फोन, मिसाइल सिस्टम से लेकर जेट इंजन तक। इन धातुओं के बिना कोई भी हाई-टेक उद्योग टिक नहीं सकता। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, चीन के पास 44 मिलियन मीट्रिक टन, जबकि ब्राजील के पास 21 मिलियन टन का विशाल भंडार है। यही कारण है कि इन धातुओं को अब भू-राजनीतिक हथियार कहा जा रहा है। जो देश इन्हें नियंत्रित करेगा, वह वैश्विक सप्लाई चेन की दिशा तय करेगा।
ट्रंप प्रशासन से बढ़ता तनाव और लूला का संतुलन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के बीच हाल के महीनों में टैरिफ विवाद बढ़ा है। अमेरिका ने ब्राजील से आयातित कुछ उत्पादों पर 50% तक का शुल्क लगा दिया है। हालांकि उम्मीद है कि आने वाले एसियन समिट (कुआलालंपुर) में ट्रंप और लूला की आमने-सामने मुलाकात इस विवाद को नए दिशा में मोड़ सकती है। लूला ने कहा है कि वे गाजा, यूक्रेन, रूस, वेनेजुएला और रेयर अर्थ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बात करने को तैयार हैं।
खनिज शक्ति से खुला अवसर का नया दरवाजा
ब्राजील के खनन मंत्री एलेक्जेंडर सिल्वेरा के अनुसार, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते अविश्वास ने हमारे देश के लिए अवसर की नई खिड़की खोली है। ब्राजील की खनिज क्षमता और अमेरिकी निवेश के बीच अब नए हितों का संगम बन सकता है। वर्तमान में कई अमेरिकी कंपनियां पहले ही ब्राजील के खनन प्रोजेक्ट्स में निवेश कर चुकी हैं, हालांकि यह निवेश फिलहाल केवल माइनिंग लेवल तक सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्राजील वाकई वैश्विक मंच पर निर्णायक भूमिका चाहता है, तो उसे खनिज प्रसंस्करण और मैग्नेट निर्माण जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्रों में उतरना होगा।
चीन के साथ साझेदारी की संभावना
एल इकोनोमिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्राजील के रेयर अर्थ विशेषज्ञ गिल्बर्टो फर्नांडीस मानते हैं कि अगर ब्राजील इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, तो उसे चीन की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहिए। दरअसल, चीन पहले से ही ब्राजील का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और आॅटोमोबाइल सेक्टर में भारी निवेश कर चुका है। दोनों देश ब्रिक्स समूह के सदस्य भी हैं। यही समीकरण अगर और गहरा हुआ तो यह वाशिंगटन के लिए चिंता का कारण बन सकता है।
वैश्विक शक्ति-संतुलन के चौराहे पर ब्राजील
आज ब्राजील एक रणनीतिक दोराहे पर खड़ा है। एक तरफ अमेरिकी पूंजी और आर्थिक साझेदारी का आकर्षण है, दूसरी ओर चीन की तकनीकी ताकत और दीर्घकालिक निवेश का भरोसा। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राजील की यही डुअल पॉलिसी पोजिशन उसे एक नई वैश्विक शक्ति बना सकती है जो आने वाले वर्षों में रेयर अर्थ डिप्लोमेसी के केंद्र में होगी। Tariff War :