
Donald Trump : संयुक्त राज्य अमेरिका की सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को शिक्षा विभाग में छंटनी की खुली छूट दे दी है। अदालत के इस फैसले ने न केवल संघीय स्तर पर शिक्षा विभाग की संरचना को चुनौती दी है, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक संतुलन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को एक आपातकालीन याचिका पर सुनवाई करते हुए, बिना किसी तर्क या व्याख्या के ट्रंप प्रशासन की छंटनी योजना को हरी झंडी दिखा दी। यह वही योजना है जिस पर पहले एक संघीय न्यायाधीश ने रोक लगा दी थी।
अदालत के इस फैसले ने तीन उदारवादी न्यायाधीशों को स्पष्ट असहमति जताने के लिए विवश कर दिया। जस्टिस सोनिया सोतोमयोर ने तीखी प्रतिक्रिया में लिखा, "कार्यपालिका ने खुलेआम कानून की अवहेलना की घोषणा की है, ऐसे में न्यायपालिका का दायित्व है कि वह उसे रोके, न कि मूक समर्थन दे। यह फैसला संविधान की शक्तियों के संतुलन के लिए गंभीर खतरा है।" उनके साथ जस्टिस एलेना कागन और जस्टिस केतांजी ब्राउन जैक्सन ने भी इस निर्णय को असंवैधानिक करार दिया और चेताया कि इससे कार्यपालिका को असीमित शक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस फैसले को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “देश के छात्रों और अभिभावकों की ऐतिहासिक जीत” बताते हुए स्वागत किया। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय संघीय शिक्षा विभाग को राज्यों को सौंपने की दिशा में निर्णायक कदम है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अब शिक्षा सचिव लिंडा मैकमोहन विभाग के विघटन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ करेंगी। बता दें कि ट्रंप ने अपने नए कार्यकाल की शुरुआत में ही एक कार्यकारी आदेश जारी कर शिक्षा विभाग को समाप्त करने की मंशा जताई थी, जिसके तहत पुनर्गठन और छंटनी की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
डमोक्रेसी फॉरवर्ड की प्रमुख स्काई पेरीमैन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “सार्वजनिक शिक्षा के लिए विनाशकारी” बताते हुए कहा कि यह फैसला कांग्रेस की उस मंशा के विपरीत है, जिसके तहत शिक्षा विभाग की स्थापना की गई थी। उन्होंने अदालत पर आरोप लगाया कि “एक बार फिर बिना किसी तार्किक व्याख्या के निचली अदालतों के निर्णयों को पलट दिया गया।” न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने भी फैसले की आलोचना करते हुए ट्रंप की कार्रवाई को “मनमानी और असंवैधानिक” करार दिया।
इस फैसले का तात्कालिक प्रभाव यह हुआ कि मैसाचुसेट्स के जिला न्यायाधीश म्योंग जॉन द्वारा 22 मई को दिए गए उस आदेश की वैधता समाप्त हो गई, जिसमें शिक्षा विभाग के 1,400 कर्मचारियों की बहाली का निर्देश दिया गया था। जज जॉन ने अपने निर्णय में लिखा था कि “उपलब्ध साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य विधायी मंजूरी के बिना विभाग को निष्क्रिय करना है।” इस पर सरकार के सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों में अतिक्रमण है। Donald Trump