
Trump : ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने संबंधी डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव को फिर भड़काने का काम किया है। व्हाइट हाउस में मीडिया से मुख़ातिब होते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह एक ऐसा परमाणु समझौता चाहते हैं, जिसमें अमेरिका निरीक्षकों के ज़रिए ईरान के परमाणु ठिकानों में जाकर ज़रूरत पड़ने पर उन्हें नष्ट कर सके – वह भी बिना किसी जान की हानि के। उन्होंने साफ कहा, "हम किसी प्रयोगशाला को उड़ा सकते हैं, बशर्ते वहां कोई मौजूद न हो।
ट्रंप की टिप्पणी के बाद ईरान ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। सरकारी समाचार एजेंसी 'फार्स न्यूज' ने शुक्रवार को ईरानी प्रशासन के हवाले से कहा कि अमेरिका की यह भाषा "खुले तौर पर ईरानी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ शत्रुता" है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अगर अमेरिका वास्तव में कूटनीतिक हल चाहता है, तो उसे धमकी और दबाव की नीति को त्यागना होगा। यह रवैया किसी भी सार्थक वार्ता की राह में रोड़ा बन सकता है।" ईरान ने ट्रंप की बात को 'रेड लाइन' करार देते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह की बयानबाज़ी के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
ट्रंप के इस बयान से पहले ही पश्चिम एशिया का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ था। हाल ही में सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई से मुलाक़ात की थी। इस दौरान उन्होंने ईरान को आगाह किया था कि यदि वह परमाणु समझौते पर ट्रंप प्रशासन के साथ गंभीरता से बातचीत नहीं करता, तो उसे इज़राइल के साथ संभावित युद्ध के लिए तैयार रहना होगा।
बुधवार को दिए गए अपने बयान में ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से आग्रह किया है कि वे ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल टाल दें, ताकि वाशिंगटन को तेहरान के साथ नए परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने का समय मिल सके। ट्रंप ने कहा, "हम समाधान के बहुत क़रीब हैं, ऐसे में अभी हमला करना सही नहीं होगा।" संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के प्रमुख ने भी हाल ही में कहा था कि ईरान के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अब भी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है। Trump