
Fentanyl Drug Crisis : अमेरिका में नशे के खिलाफ छिड़ी जंग अब कूटनीति की शक्ल ले चुकी है। इस बार निशाने पर है पड़ोसी देश कनाडा, और बहस के केंद्र में है एक जानलेवा दवा - फेंटानिल। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दवा पर 35 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया है, और इसके लिए सीधे तौर पर कनाडा को ज़िम्मेदार ठहराया है। लेकिन यह मामला सिर्फ एक दवा का नहीं, बल्कि अमेरिका में तेजी से फैलते नशे के वैश्विक सिंडिकेट का है। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर यह फेंटानिल है क्या, और क्यों यह आज अमेरिका से लेकर चीन, कनाडा और भारत तक की सरकारों के लिए सिरदर्द बन गया है।
फेंटानिल एक सिंथेटिक ओपिओइड है, जो मूलतः गंभीर दर्द से जूझ रहे कैंसर रोगियों को राहत देने के लिए विकसित की गई थी। इसका असर मॉर्फिन से 50 गुना और हेरोइन से 100 गुना ज्यादा होता है। इसका नियंत्रित उपयोग मेडिकल साइंस की उपलब्धि माना जाता है। लेकिन जब यही दवा नशे और तस्करी का ज़रिया बन जाए, तो यह ज़हर से भी घातक हो जाती है। आज की तारीख में यही हो रहा है— यह दवा न केवल अवैध रूप से बनाई जा रही है, बल्कि टैबलेट, कैंडी और पाउडर के रूप में ब्लैक मार्केट में धड़ल्ले से बिक रही है।
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में फेंटानिल के ओवरडोज़ से होने वाली मौतों में विस्फोटक बढ़ोतरी देखी गई है। CDC और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 में 70 हजार से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की मौतें केवल फेंटानिल या इससे मिलते-जुलते सिंथेटिक ड्रग्स की वजह से हुईं। यह दवा इतनी खतरनाक है कि पेंसिल की नोक जितनी मात्रा भी मौत का कारण बन सकती है। ट्रंप का आरोप है कि कनाडा की तरफ से हो रही तस्करी के चलते यह ज़हर अमेरिका में आसानी से पहुंच रहा है। कनाडा और अमेरिका के बीच लंबे समय से व्यापारिक मतभेद चले आ रहे हैं। ट्रंप के पत्र में कनाडा को इस संकट के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है। पर मैनहट्टन इंस्टीट्यूट की एक ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि कनाडा की भूमिका न्यूनतम है, और ज़्यादातर अवैध फेंटानिल या इसके रसायन चीन और मैक्सिको से अमेरिका पहुंच रहे हैं।
यह केवल अमेरिका की नहीं, बल्कि कनाडा की भी समस्या है। दोनों देशों में इस ड्रग के कारण न केवल मौतें, बल्कि अपराध, स्वास्थ्य तंत्र पर बोझ, और सामाजिक अव्यवस्था तेजी से बढ़ी है। पुलिस से लेकर अस्पताल और NGO तक—हर कोई इस अदृश्य महामारी से जूझ रहा है। कनाडा ने जहां कानूनों को सख्त किया है, वहीं अमेरिका ने मैक्सिको और चीन पर दबाव बनाना शुरू किया है कि वे फेंटानिल के कच्चे माल की तस्करी रोकें।
चीन: लंबे समय तक सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक रहा है। यहां कई अवैध लैब्स आज भी सक्रिय हैं।
मैक्सिको: अब अवैध फेंटानिल उत्पादन का मुख्य केंद्र बन चुका है। यहीं से सबसे ज्यादा तस्करी अमेरिका में हो रही है।
भारत: यहां फेंटानिल का वैध उत्पादन होता है, जिसे मेडिकल जरूरतों के लिए एक्सपोर्ट किया जाता है।
कनाडा: कुछ अवैध लैब्स पकड़ी गई हैं, लेकिन सरकारी निगरानी भी सख्त है।
अमेरिका: वैध उत्पादन सीमित है, अवैध उत्पादन की घटनाएं बहुत कम हैं।
यूरोप (बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड): सीमित मात्रा में मेडिकल उपयोग के लिए उत्पादन होता है, अवैध गतिविधियां बेहद कम हैं। Fentanyl Drug Crisis