शराब के सहारे टिकी उत्तर प्रदेश की ये इंडस्ट्री, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 04:23 AM
UP News : उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की पहचान भले ही 'कांच नगरी' के रूप में होती हो लेकिन इस चमकते उद्योग की असली रीढ़ हकीकत में शराब है। जी हां, इंटरनेशनल स्प्रिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की कांच इंडस्ट्री का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ शराब उद्योग को सप्लाई होता है।
शराब घटते ही कांपेगा कांच उद्योग
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर शराब की बिक्री में थोड़ी भी गिरावट आती है तो इसका सीधा असर सबसे पहले कांच उद्योग पर पड़ता है। कांच की बोतलों की डिमांड कम होते ही इस सेक्टर की कमर टूटने लगती है। रिपोर्ट के अनुसार, कांच की बोतलें बीयर और महंगी शराब की कुल लागत का 20 से 25 फीसदी हिस्सा होती हैं।
फिरोजाबाद के हर बोतल में दिखता है कारोबार
फिरोजाबाद में देश का एक बड़ा कांच उद्योग मौजूद है, और यहां का 70% से ज्यादा उत्पादन शराब व बीयर की बोतलों के लिए होता है। सिर्फ 12 फीसदी कांच का उपयोग गिलास, झूमर और सजावटी उत्पादों के लिए किया जाता है। इससे साफ होता है कि यह पूरा उद्योग शराब उद्योग पर किस कदर निर्भर है।
विदेशी शराब की मांग भी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल बाजार में 65 फीसदी हिस्सेदारी देशी शराब की है। हालांकि, विदेशी शराब की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। मध्यम वर्ग की शराब की सालाना ग्रोथ 7 फीसदी, जबकि विदेशी शराब की ग्रोथ 32 फीसदी तक पहुंच गई है। इस कारण प्रीमियम शराब में इस्तेमाल होने वाली महंगी बोतलों की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है।
बोतलों की दुनिया में रोजगार की रफ्तार
फिरोजाबाद में आज 70 फीसदी से अधिक कामगार स्वचालित इकाइयों में कांच की बोतलें तैयार करने में जुटे हैं। एमएसएमई सेक्टर इस उद्योग की बड़ी ताकत है, जो देश में कुल कांच उत्पादन का 70% से अधिक हिस्सेदारी रखता है।
बोतलों के पीछे की कहानी
अखिल भारतीय कांच निर्माता संघ के अनुसार, भारत में तैयार होने वाला 88% कंटेनर कांच शराब व बीयर उद्योग के लिए इस्तेमाल होता है। इसमें 69% शराब और 19% बीयर की बोतलें शामिल हैं।